18 अगस्त 2026
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पंडित जसराज की छठी पुण्यतिथि: अनूप जलोटा बोले — मोतियों की माला मेरे जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद

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पंडित जसराज की छठी पुण्यतिथि: अनूप जलोटा बोले — मोतियों की माला मेरे जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद

सारांश

पंडित जसराज की छठी पुण्यतिथि पर अनूप जलोटा का वह किस्सा जो सुनकर आँखें नम हो जाएँ — हैदराबाद में भजन सुनकर पंडित जी की आँखों से बहे आँसू, और फिर मंच पर आकर उन्होंने अपनी मोतियों की माला जलोटा के गले में पहना दी। यही पल जलोटा के जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद बन गया।

मुख्य बातें

पंडित जसराज की छठी पुण्यतिथि पर अनूप जलोटा ने 18 अगस्त 2026 को भावुक स्मृतियाँ साझा कीं।
पंडित जसराज अनूप जलोटा को स्नेह से 'जमाईराज' कहते थे, क्योंकि जलोटा की पत्नी उनसे संगीत सीखती थीं।
हैदराबाद में एक भजन कार्यक्रम के दौरान पंडित जसराज ने मंच पर आकर जलोटा के गले में मोतियों की माला पहनाई थी।
पंडित जसराज ने मेवाती घराने की परंपरा में करीब 75 वर्षों तक संगीत साधना की।
जलोटा के अनुसार दोनों परिवारों के बीच पीढ़ियों पुराना आत्मीय संबंध रहा है।

भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष पंडित जसराज की छठी पुण्यतिथि पर प्रख्यात भजन गायक अनूप जलोटा भावुक हो उठे और उन्होंने संगीत सम्राट से जुड़ी अनमोल स्मृतियाँ साझा कीं। 18 अगस्त 2026 को मुंबई में अनूप जलोटा ने बताया कि पंडित जसराज द्वारा हैदराबाद में उन्हें पहनाई गई मोतियों की माला उनके जीवन का सर्वोच्च आशीर्वाद है।

पारिवारिक रिश्ते की अनोखी मिठास

अनूप जलोटा ने बताया कि पंडित जसराज उन्हें स्नेहपूर्वक 'जमाईराज' कहकर पुकारते थे। इसके पीछे एक खास वजह थी — अनूप जलोटा की पत्नी पंडित जसराज से संगीत की शिक्षा ग्रहण करती थीं, जिससे यह अनौपचारिक रिश्ता स्वाभाविक रूप से बन गया।

जलोटा ने कहा, 'पंडित जसराज के मेरे पिता के साथ भी बहुत अच्छे संबंध थे और दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से एक गहरा रिश्ता रहा है।' यह जुड़ाव महज़ संगीत तक सीमित नहीं था — यह पीढ़ियों में पिरोया हुआ एक आत्मीय बंधन था।

हैदराबाद का वह अविस्मरणीय पल

अनूप जलोटा ने हैदराबाद की एक विशेष स्मृति साझा की, जो उनके जीवन का सबसे भावपूर्ण क्षण बन गई। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम में जब वे भजन 'कभी-कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े' गा रहे थे, तब पंडित जसराज सामने बैठकर उन्हें सुन रहे थे।

जलोटा के शब्दों में, 'जब मैं भजन की आखिरी पंक्ति गा रहा था, तब उनकी आँखों से आँसू बहने लगे। वह अपनी जगह से उठकर मंच पर आए और अपनी खूबसूरत मोतियों की माला उतारी और मेरे गले में पहना दी।' उन्होंने आगे कहा, 'एक महान कलाकार से मिला वह स्नेह और सम्मान मेरे दिल में हमेशा रहेगा।'

संगीत की विरासत जो आज भी जीवित है

पुण्यतिथि पर पंडित जसराज को याद करते हुए अनूप जलोटा ने कहा, 'उनको याद करना अपने आप में संगीत से जुड़ने जैसा है। उनके संगीत की आवाज़ और सुरों का असर आज भी लोगों के मन पर महसूस किया जा सकता है।'

गौरतलब है कि पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत की मेवाती घराने की परंपरा के सबसे प्रतिष्ठित वाहक थे। उन्होंने करीब 75 वर्षों तक सक्रिय संगीत साधना की और देश-विदेश में भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक नई पहचान दी। उनकी गायकी में भक्ति और शास्त्रीयता का जो अद्वितीय संगम था, वह आज भी संगीत प्रेमियों के हृदय में अमर है।

अनूप जलोटा का श्रद्धांजलि संदेश

अनूप जलोटा ने कहा, 'पंडित जसराज से मुझे हमेशा बहुत प्यार और सम्मान मिला। पंडित जी के साथ मेरा रिश्ता परिवार जैसा था और मैं उम्मीद करता हूँ कि यह जुड़ाव हमेशा बना रहेगा।' यह पुण्यतिथि न केवल एक महान संगीतज्ञ को श्रद्धांजलि का अवसर है, बल्कि उस परंपरा को आगे ले जाने की प्रेरणा भी है जो पंडित जसराज ने अपने जीवनभर के संगीत से सींची।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब ऐसे संस्मरण शास्त्रीय संगीत की प्रासंगिकता और उसकी भावनात्मक शक्ति को रेखांकित करते हैं।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंडित जसराज की पुण्यतिथि कब है और यह कौन सी पुण्यतिथि है?
पंडित जसराज की पुण्यतिथि 17 अगस्त को मनाई जाती है और 2026 में यह उनकी छठी पुण्यतिथि थी। वे भारतीय शास्त्रीय संगीत के मेवाती घराने के सबसे प्रतिष्ठित गायकों में से एक थे।
अनूप जलोटा को पंडित जसराज 'जमाईराज' क्यों कहते थे?
अनूप जलोटा की पत्नी पंडित जसराज से संगीत की शिक्षा लेती थीं, इसी कारण पंडित जसराज उन्हें स्नेहपूर्वक 'जमाईराज' कहकर पुकारते थे। यह उनके बीच के पारिवारिक और आत्मीय रिश्ते का प्रतीक था।
हैदराबाद में पंडित जसराज ने अनूप जलोटा को माला क्यों पहनाई थी?
हैदराबाद के एक कार्यक्रम में अनूप जलोटा का भजन 'कभी-कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े' सुनकर पंडित जसराज इतने भावुक हो गए कि उनकी आँखों से आँसू बह निकले। वे मंच पर आए और अपनी मोतियों की माला उतारकर जलोटा के गले में पहना दी।
पंडित जसराज किस घराने से जुड़े थे और उन्होंने कितने वर्षों तक संगीत साधना की?
पंडित जसराज मेवाती घराने से जुड़े थे और उन्होंने करीब 75 वर्षों तक भारतीय शास्त्रीय संगीत की साधना की। उन्होंने देश के साथ-साथ विदेशों में भी भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
अनूप जलोटा और पंडित जसराज के परिवारों के बीच क्या संबंध था?
अनूप जलोटा के अनुसार उनके पिता के पंडित जसराज के साथ बहुत अच्छे संबंध थे और दोनों परिवारों के बीच पीढ़ियों पुराना गहरा रिश्ता रहा है। यह जुड़ाव केवल संगीत तक सीमित नहीं था बल्कि पारिवारिक आत्मीयता पर आधारित था।
राष्ट्र प्रेस
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