कर्नाटक कांग्रेस में मंत्रिमंडल विवाद: रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर भाजपा का मध्यावधि चुनाव का दावा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार में जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी द्वारा 5 जून 2026 को इस्तीफे की घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार किया है। रेड्डी का आरोप है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु शहरी विभाग के आवंटन को लेकर किए गए वादे से पीछे हटकर उनके साथ विश्वासघात किया। यह घटनाक्रम विभागों के आवंटन के ठीक एक दिन बाद सामने आया, जिसे शिवकुमार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का हमला
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद के बाद कांग्रेस अब मंत्री पदों और विभागों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी झगड़ों में उलझी हुई है। उनके अनुसार, जो नेता कभी सर्वोच्च पद के लिए होड़ में थे, वे अब कैबिनेट में जगह और 'मलाईदार विभागों' के लिए लड़ रहे हैं।
विजयेंद्र ने कहा कि यह सरकार जन-कल्याण के बजाय भ्रष्टाचार, सत्ता की लड़ाई और असरदार पदों की होड़ में फंसी हुई है। उन्होंने सरकार के समय-चयन की भी आलोचना करते हुए कहा कि मानसून और खेती के मौसम में प्रशासन को किसानों को बीज, खाद और सहायता देने पर ध्यान देना चाहिए, न कि अंदरूनी राजनीतिक झगड़ों में।
विपक्ष के नेता आर. अशोक के आरोप
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि डॉ. बीआर अंबेडकर जैसे समाज सुधारकों के नाम पर शपथ लेने वाले कांग्रेस नेता विभागों के बंटवारे के वक्त अलग तरह से व्यवहार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता ऐसी महान हस्तियों के आदर्शों को मानने का दावा तो करते हैं, लेकिन व्यवहार में ताकतवर और असरदार मंत्रालयों के लिए लॉबिंग करते देखे जाते हैं।
अशोक ने दावा किया कि समाज कल्याण और आदिवासी कल्याण जैसे विभागों को संभालने में मंत्रियों की कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखती, जबकि इन विभागों का उद्देश्य समाज सुधारकों के विजन को साकार करना है। उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल में महिलाओं के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।
रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा: पृष्ठभूमि
जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर बेंगलुरु शहरी विभाग के आवंटन को लेकर किए गए वादे से मुकरने का आरोप लगाया। यह घटनाक्रम विभाग आवंटन के ठीक एक दिन बाद सामने आया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब शिवकुमार ने हाल ही में यह जिम्मेदारी संभाली है और सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
भाजपा की माँग और आगे की राह
भाजपा ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से अपील की है कि वे अंदरूनी झगड़ों को किनारे रखें और किसानों, खेतिहर मजदूरों तथा गरीबों के कल्याण को प्राथमिकता दें। विजयेंद्र ने चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर जनता का भरोसा टूट जाएगा।
भाजपा ने सरकार से इस्तीफा देने और जनता से नया जनादेश माँगने पर विचार करने को कहा है। पार्टी का दावा है कि चल रही राजनीतिक घटनाएँ राज्य सरकार के भीतर गहरे होते संकट का संकेत हैं और मध्यावधि चुनाव की आहट सुनाई दे रही है।