21 जुलाई 2026
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कर्नाटक कैबिनेट संकट: रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद भाजपा ने कहा — जल्द चुनाव संभव

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कर्नाटक कैबिनेट संकट: रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद भाजपा ने कहा — जल्द चुनाव संभव

सारांश

कर्नाटक में कांग्रेस कैबिनेट के विस्तार के 48 घंटों के भीतर जल मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे और KH मुनियप्पा की नाराजगी ने सरकार को संकट में डाल दिया। भाजपा ने इसे सरकार के पतन की शुरुआत बताते हुए जल्द चुनाव का दावा किया।

मुख्य बातें

जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने 5 जून 2026 को कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफा दिया; आरोप — CM डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु अर्बन पोर्टफोलियो का वादा नहीं निभाया।
कांग्रेस नेता केएच मुनियप्पा ने खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के बंटवारे पर नाराजगी जताते हुए कार्यभार लेने से मना किया।
कैबिनेट गठन के 48 घंटों के भीतर वरिष्ठ मंत्रियों में खुली कलह सामने आई।
भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने जल्द चुनाव का दावा किया; सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा — सरकार 6 महीने में गिरेगी।
कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया — रेड्डी ने पार्टी नहीं, केवल मंत्री पद छोड़ा; वरिष्ठ नेतृत्व बातचीत करेगा।

कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के लिए गंभीर संकट तब खड़ा हो गया जब जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने 5 जून 2026 को कैबिनेट से इस्तीफा देने का ऐलान किया। रेड्डी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु अर्बन पोर्टफोलियो के बंटवारे को लेकर किए गए वादे से मुकरते हुए उनके साथ विश्वासघात किया। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में जल्द विधानसभा चुनाव की संभावना जताई।

कैबिनेट संकट का मुख्य घटनाक्रम

रेड्डी के इस्तीफे के साथ-साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री केएच मुनियप्पा ने भी खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के बंटवारे पर कड़ी नाराजगी जताई और घोषणा की कि वे मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे। उल्लेखनीय है कि कैबिनेट विस्तार और गठन के 48 घंटों के भीतर ही वरिष्ठ मंत्रियों के बीच यह खुली कलह सामने आई।

भाजपा की प्रतिक्रिया

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने दावा किया कि कांग्रेस 'मजाक का पात्र' बन गई है। उन्होंने कहा, "कर्नाटक के लोग इस सरकार का भ्रष्टाचार और यह देख रहे हैं कि उन्हें कैसे धोखा दिया गया है। नए सीएम के साथ लोगों को विकास की उम्मीद थी, लेकिन अब संकेत बहुत साफ हैं।" विजयेंद्र ने यह भी कहा, "आपसी कलह को देखते हुए मुझे लगता है कि हम जल्द चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं।"

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कैबिनेट में किसी भी महिला विधायक को मंत्री के तौर पर शपथ नहीं दिलाई गई। उन्होंने कहा, "वे (कांग्रेस) सिर्फ नारे लगाते हैं, लेकिन महिला सशक्तिकरण के लिए उनकी नीयत साफ नहीं है।" पूनावाला ने यह भी जोड़ा, "डीके शिवकुमार को सरकार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था, लेकिन अब वही सब हो रहा है, जो पिछले तीन सालों से हो रहा था।"

भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने दावा किया, "डीके शिवकुमार को लाकर कांग्रेस ने सरकार को कुछ और समय तक बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन वहाँ की सरकार छह महीने के भीतर गिर जाएगी।"

कांग्रेस का पक्ष

कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि रामलिंगा रेड्डी ने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि केवल मंत्री पद छोड़ा है। उन्होंने कहा, "वह पार्टी के बहुत अहम नेता हैं और मुझे यकीन है कि सीनियर लीडरशिप उनसे बैठकर बात करेगी।" खड़गे को भरोसा था कि रेड्डी पार्टी के फैसले को मान लेंगे।

कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव ने कहा कि राजनीति में ऐसी बातें होती रहती हैं। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस मामले को सुलझा लेंगे। 1989 से रामलिंगा रेड्डी और डीके शिवकुमार साथ में सदस्य रहे हैं।"

आम जनता और राजनीतिक स्थिरता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पद पर शिवकुमार की नियुक्ति स्वयं लंबी खींचतान के बाद हुई थी। यदि असंतोष बढ़ता है तो राज्य की विकास परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस की वरिष्ठ नेतृत्व से रेड्डी और मुनियप्पा के साथ बातचीत की उम्मीद है। भाजपा के दावों को अभी कांग्रेस ने सिरे से खारिज किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह संकट सुलझने योग्य आंतरिक असंतोष है या सरकार के लिए गहरा खतरा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थगित किया है। भाजपा के 'जल्द चुनाव' के दावे अभी राजनीतिक बयानबाजी हैं — संख्याबल का संकट नहीं — लेकिन यदि रेड्डी जैसे वरिष्ठ नेता बाहर रहते हैं तो यह बयानबाजी ज़मीनी हकीकत बन सकती है। मुख्यधारा की कवरेज इस्तीफे पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी यह है कि पोर्टफोलियो बंटवारे जैसे प्रशासनिक निर्णय अब सार्वजनिक विद्रोह का रूप ले रहे हैं — जो शासन की कमज़ोरी का संकेत है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलिंगा रेड्डी ने कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दिया?
रामलिंगा रेड्डी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु अर्बन पोर्टफोलियो के बंटवारे को लेकर किए गए वादे से मुकर गए। उन्होंने 5 जून 2026 को मंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया, हालाँकि उन्होंने पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ी।
क्या कर्नाटक में जल्द विधानसभा चुनाव होंगे?
भाजपा नेताओं ने जल्द चुनाव का दावा किया है, लेकिन यह अभी राजनीतिक बयानबाजी है। कांग्रेस नेताओं ने संकट को आंतरिक मतभेद बताते हुए सरकार की स्थिरता पर भरोसा जताया है।
केएच मुनियप्पा का कर्नाटक कैबिनेट विवाद में क्या रोल है?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री केएच मुनियप्पा ने खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के बंटवारे पर कड़ी नाराजगी जताई और घोषणा की कि वे मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे। यह रेड्डी के इस्तीफे के साथ एक और बड़ा झटका है।
कांग्रेस ने इस संकट पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने कहा कि रेड्डी ने पार्टी नहीं छोड़ी और वरिष्ठ नेतृत्व उनसे बातचीत करेगा। कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवकुमार इस मामले को सुलझा लेंगे।
भाजपा ने कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी के आरोप लगाए। प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कैबिनेट में कोई भी महिला विधायक को मंत्री पद नहीं मिला, जो महिला सशक्तिकरण के दावों के विपरीत है।
राष्ट्र प्रेस
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