कर्नाटक कैबिनेट संकट: रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद भाजपा ने कहा — जल्द चुनाव संभव
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के लिए गंभीर संकट तब खड़ा हो गया जब जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने 5 जून 2026 को कैबिनेट से इस्तीफा देने का ऐलान किया। रेड्डी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु अर्बन पोर्टफोलियो के बंटवारे को लेकर किए गए वादे से मुकरते हुए उनके साथ विश्वासघात किया। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में जल्द विधानसभा चुनाव की संभावना जताई।
कैबिनेट संकट का मुख्य घटनाक्रम
रेड्डी के इस्तीफे के साथ-साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री केएच मुनियप्पा ने भी खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के बंटवारे पर कड़ी नाराजगी जताई और घोषणा की कि वे मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे। उल्लेखनीय है कि कैबिनेट विस्तार और गठन के 48 घंटों के भीतर ही वरिष्ठ मंत्रियों के बीच यह खुली कलह सामने आई।
भाजपा की प्रतिक्रिया
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने दावा किया कि कांग्रेस 'मजाक का पात्र' बन गई है। उन्होंने कहा, "कर्नाटक के लोग इस सरकार का भ्रष्टाचार और यह देख रहे हैं कि उन्हें कैसे धोखा दिया गया है। नए सीएम के साथ लोगों को विकास की उम्मीद थी, लेकिन अब संकेत बहुत साफ हैं।" विजयेंद्र ने यह भी कहा, "आपसी कलह को देखते हुए मुझे लगता है कि हम जल्द चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं।"
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कैबिनेट में किसी भी महिला विधायक को मंत्री के तौर पर शपथ नहीं दिलाई गई। उन्होंने कहा, "वे (कांग्रेस) सिर्फ नारे लगाते हैं, लेकिन महिला सशक्तिकरण के लिए उनकी नीयत साफ नहीं है।" पूनावाला ने यह भी जोड़ा, "डीके शिवकुमार को सरकार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था, लेकिन अब वही सब हो रहा है, जो पिछले तीन सालों से हो रहा था।"
भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने दावा किया, "डीके शिवकुमार को लाकर कांग्रेस ने सरकार को कुछ और समय तक बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन वहाँ की सरकार छह महीने के भीतर गिर जाएगी।"
कांग्रेस का पक्ष
कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि रामलिंगा रेड्डी ने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि केवल मंत्री पद छोड़ा है। उन्होंने कहा, "वह पार्टी के बहुत अहम नेता हैं और मुझे यकीन है कि सीनियर लीडरशिप उनसे बैठकर बात करेगी।" खड़गे को भरोसा था कि रेड्डी पार्टी के फैसले को मान लेंगे।
कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव ने कहा कि राजनीति में ऐसी बातें होती रहती हैं। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस मामले को सुलझा लेंगे। 1989 से रामलिंगा रेड्डी और डीके शिवकुमार साथ में सदस्य रहे हैं।"
आम जनता और राजनीतिक स्थिरता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई प्रशासनिक चुनौतियों का सामना कर रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पद पर शिवकुमार की नियुक्ति स्वयं लंबी खींचतान के बाद हुई थी। यदि असंतोष बढ़ता है तो राज्य की विकास परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस की वरिष्ठ नेतृत्व से रेड्डी और मुनियप्पा के साथ बातचीत की उम्मीद है। भाजपा के दावों को अभी कांग्रेस ने सिरे से खारिज किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह संकट सुलझने योग्य आंतरिक असंतोष है या सरकार के लिए गहरा खतरा।