रामलिंगा रेड्डी का कर्नाटक मंत्रिमंडल से इस्तीफा, CM शिवकुमार पर बेंगलुरु विभाग के वादे से मुकरने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार, 5 जून को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़ा विभाग देने के वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए कर्नाटक मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। विभागों के आवंटन के ठीक एक दिन बाद सामने आया यह घटनाक्रम नवगठित कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
इस्तीफे की वजह
रेड्डी ने मुख्यमंत्री को भेजे इस्तीफा पत्र में लिखा, 'मुझे अपने मंत्रिमंडल में मंत्री पद का दायित्व सौंपने के लिए आपको और कांग्रेस पार्टी को धन्यवाद देता हूं। मैं अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध कार्य करने में असमर्थ हूं, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वह विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे।
बेंगलुरु के कोरमंगला स्थित अपने कार्यालय से रेड्डी ने बताया कि वर्ष 2023 में उन्हें पहले बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में परिवहन विभाग आवंटित कर दिया गया। उनके अनुसार, उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस विषय पर चर्चा में भाग लिया था।
व्यक्तिगत आश्वासन का दावा
रेड्डी ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के गठन के दौरान उन्हें ढाई वर्ष बाद बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़ा विभाग सौंपने का वादा किया गया था। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके भाई डी.के. सुरेश व्यक्तिगत रूप से उनके आवास पर आए और भरोसा दिलाया कि यह वादा पूरा किया जाएगा। बार-बार के इन्हीं आश्वासनों के आधार पर उन्होंने तत्कालीन व्यवस्था स्वीकार की थी।
हालांकि अंततः उन्हें बेंगलुरु शहरी विभाग के बजाय जल संसाधन विभाग सौंप दिया गया, जिसे उन्होंने अपने साथ किए गए वादे का उल्लंघन बताया।
पांच दशकों का राजनीतिक अनुभव
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रेड्डी ने बताया कि उनकी राजनीतिक यात्रा वर्ष 1973 में एनएसयूआई से एक छात्र नेता के रूप में शुरू हुई थी। वह नौ बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और जयनगर तथा बीटीएम लेआउट समेत बेंगलुरु के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
रेड्डी ने कहा, 'मैं पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस पार्टी में हूं। मैंने पूर्व मुख्यमंत्रियों एम. वीरप्पा मोइली, एस.एम. कृष्णा, धर्म सिंह और सिद्दारमैया के मंत्रिमंडलों में मंत्री के रूप में कार्य किया है। मैंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की है।'
पार्टी की प्रतिक्रिया
इस्तीफे के दौरान कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं ने रेड्डी से निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। कार्यकर्ताओं ने बताया कि केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद इस मुद्दे पर उनसे बातचीत कर रहे हैं। कथित तौर पर रेड्डी ने इस हस्तक्षेप को नकारते हुए इस्तीफे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री शिवकुमार ने हाल ही में पदभार संभाला है और कर्नाटक कांग्रेस के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष की खबरें आ रही थीं। गौरतलब है कि यह कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पहला सार्वजनिक विद्रोह है, जो आंतरिक समन्वय की चुनौतियों को उजागर करता है। आगे की राजनीतिक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को किस तरह संभालता है।