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रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर कर्नाटक कांग्रेस में उथल-पुथल, एचके पाटिल बोले — 'यह शिवकुमार सरकार के लिए बड़ी चेतावनी'

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रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर कर्नाटक कांग्रेस में उथल-पुथल, एचके पाटिल बोले — 'यह शिवकुमार सरकार के लिए बड़ी चेतावनी'

सारांश

रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सुलगते असंतोष की सतह पर आ गया है। एचके पाटिल की 'खतरे की घंटी' वाली टिप्पणी और विभागों के बँटवारे पर उठते सवाल बताते हैं कि शिवकुमार सरकार के सामने चुनौती सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता एचके पाटिल ने मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार के लिए 'खतरे की घंटी' बताया।
पाटिल ने एक्स पर पोस्ट कर रेड्डी से पार्टी हित में फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया।
पाटिल स्वयं शिवकुमार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हैं; उन्हें दूसरे चरण के विस्तार में जगह मिलने की उम्मीद थी।
राजन्ना ने ईश्वर खंड्रे और जी.
परमेश्वर को विभाग आवंटन पर सवाल उठाए।
मंत्री प्रियांक खड़गे और ईश्वर खंड्रे ने भरोसा जताया कि पार्टी आलाकमान मामला सुलझा लेगा।

कर्नाटक कांग्रेस में मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे को लेकर शुक्रवार, 5 जून को बेंगलुरु में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एचके पाटिल ने इसे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार के लिए 'खतरे की घंटी' करार दिया और पार्टी नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस सरकार के भीतर मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बँटवारे को लेकर असंतोष पहले से सुलग रहा है।

पाटिल ने रेड्डी से की सीधी अपील

एचके पाटिल ने मीडिया रिपोर्टों से रेड्डी के इस्तीफे की जानकारी मिलने के बाद उनसे फोन पर बात की। पाटिल ने बताया कि रेड्डी उनके व्यक्तिगत मित्र हैं और उन्होंने स्थिति की जानकारी लेने के लिए सीधे संपर्क किया। बातचीत में रेड्डी ने अपनी शिकायतें रखीं और आग्रह किया कि पार्टी नेतृत्व इस मसले पर बिना देरी के ध्यान दे।

इसके बाद पाटिल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा: 'मैं अपने दोस्त रामलिंगा रेड्डी से फिर से आग्रह करता हूँ कि वे पार्टी के व्यापक हित में अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। उनका इस्तीफा एक बड़ी चेतावनी है। मैं संबंधित नेताओं से आग्रह करता हूँ कि वे इस मामले को निष्पक्ष रूप से सुलझाने के लिए गंभीरता से ध्यान दें।'

पाटिल खुद कैबिनेट से बाहर, असंतोष की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि एचके पाटिल — जो पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के करीबी और पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक माने जाते हैं — उन मंत्रियों की सूची में शामिल नहीं थे जिन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ शपथ ली। उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें उम्मीद थी कि दूसरे चरण के विस्तार में उन्हें कैबिनेट में स्थान मिलेगा। यह तथ्य उनकी टिप्पणी को महज़ मित्रता-निभाने तक सीमित नहीं रहने देता — इसमें असंतुष्ट नेताओं की एक व्यापक भावना की झलक भी है।

विभागों के बँटवारे पर भी उठे सवाल

पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना ने रेड्डी के इस्तीफे को 'पुरानी खबर' बताते हुए मीडिया को नई घटनाओं पर ध्यान देने की सलाह दी। हालाँकि उन्होंने खुद विभागों के बँटवारे पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि ईश्वर खंड्रे को वन मंत्रालय क्यों नहीं दिया गया, जो उन्होंने पिछली सिद्दारमैया सरकार में सँभाला था। इसी तरह उन्होंने सवाल किया कि जी. परमेश्वर को गृह मंत्रालय के बजाय राजस्व विभाग क्यों सौंपा गया, जबकि वे पहले गृह मंत्री रह चुके हैं।

राजन्ना ने यह भी कहा कि जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को 'ट्रबलशूटर' कहा, तो उन्होंने इस छवि को ही खारिज कर दिया — 'यह तस्वीर मीडिया की बनाई हुई है।'

सरकार और पार्टी का रुख

मंत्री ईश्वर खंड्रे ने भरोसा जताया कि पार्टी नेता रेड्डी से बात करेंगे और वे अपना इस्तीफा वापस लेंगे। मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि रेड्डी की सेवाएँ पार्टी और राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं और पार्टी आलाकमान मामले को सुलझा लेगा। वरिष्ठ विधायक आर.वी. देशपांडे ने इसे पार्टी का आंतरिक मसला बताते हुए कहा कि इसे भीतर ही सुलझाया जाएगा।

आगे क्या होगा

कर्नाटक कांग्रेस में यह असंतोष एकाकी घटना नहीं है — यह मंत्रिमंडल विस्तार में हुई देरी, विभागों के बँटवारे में कथित असमानता और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की भावना से उपजी एक व्यापक बेचैनी का हिस्सा है। पार्टी नेतृत्व पर दबाव है कि वह रेड्डी को मनाए और आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक होने से रोके, ताकि विपक्ष को हमले का मौका न मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संकेत देता है कि असंतोष की जड़ें गहरी हैं। शिवकुमार, जिन्हें कांग्रेस का 'ट्रबलशूटर' कहा जाता रहा है, अब खुद उसी आंतरिक राजनीति के केंद्र में हैं जिसे सुलझाना उनकी पहचान रही है। मुख्यधारा की कवरेज इसे व्यक्तिगत नाराज़गी तक सीमित कर देती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या शिवकुमार सरकार वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाओं और सीमित पदों की वास्तविकता के बीच संतुलन बना पाएगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा क्यों दिया?
स्रोत के अनुसार रेड्डी के इस्तीफे की सटीक वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन कांग्रेस नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है कि मंत्रिमंडल में विभागों के बँटवारे को लेकर असंतोष इसकी पृष्ठभूमि में है। एचके पाटिल ने इसे पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चेतावनी बताया है।
एचके पाटिल ने इस मामले में क्या कहा?
एचके पाटिल ने रेड्डी के इस्तीफे को शिवकुमार सरकार के लिए 'खतरे की घंटी' बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर रेड्डी से पार्टी हित में फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया और पार्टी नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
क्या रामलिंगा रेड्डी अपना इस्तीफा वापस लेंगे?
मंत्री ईश्वर खंड्रे ने भरोसा जताया है कि पार्टी नेता रेड्डी से बात करेंगे और वे इस्तीफा वापस लेंगे। मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी कहा कि पार्टी आलाकमान मामले को सुलझा लेगा, हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कर्नाटक कांग्रेस में विभागों के बँटवारे पर विवाद क्यों है?
पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना ने सवाल उठाया कि ईश्वर खंड्रे को वन मंत्रालय और जी. परमेश्वर को गृह मंत्रालय क्यों नहीं दिया गया, जबकि दोनों ने पहले ये विभाग सँभाले थे। यह असंतोष मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से पार्टी के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस विवाद का कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर क्या असर पड़ सकता है?
आलोचकों का कहना है कि यह आंतरिक असंतोष विपक्ष को सरकार पर हमले का मौका दे सकता है। हालाँकि वरिष्ठ विधायक आर.वी. देशपांडे ने इसे पार्टी का आंतरिक मसला बताया है और कहा है कि इसे भीतर ही सुलझाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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