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कर्नाटक CM शिवकुमार का ऐलान: रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे का विवाद सुलझा, अटकलें बंद करें

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कर्नाटक CM शिवकुमार का ऐलान: रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे का विवाद सुलझा, अटकलें बंद करें

सारांश

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर पोर्टफोलियो विवाद से उपजा संकट फिलहाल टल गया है। CM शिवकुमार ने रामलिंगा रेड्डी के व्हाट्सएप इस्तीफे को 'सुलझा हुआ मामला' बताया, लेकिन असंतोष की जड़ें अभी बाकी हैं।

मुख्य बातें

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने 6 जून को घोषणा की कि जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे का विवाद सुलझा लिया गया है।
रेड्डी ने अपना इस्तीफा व्हाट्सएप पर भेजा था; विवाद की जड़ बेंगलुरु विकास विभाग का पोर्टफोलियो न मिलना था।
एआईसीसी प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रेड्डी को भरोसा दिलाया कि वे मुख्यमंत्री से बात करेंगे।
पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी शिवकुमार से मुलाकात कर रेड्डी का इस्तीफा वापस दिलाने का आग्रह किया।
स्वास्थ्य मंत्री यू.टी.
खादर ने कहा कि पार्टी और देश व्यक्तियों से बड़े हैं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार, 6 जून को बेंगलुरु में पत्रकारों से साफ कहा कि जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे से जुड़ा विवाद पूरी तरह सुलझा लिया गया है और मीडिया को इस पर अटकलें लगाना बंद कर देना चाहिए। शिवकुमार ने रेड्डी को अपना करीबी मित्र बताते हुए कहा कि 'मामला आपसी सहमति से निपट चुका है।'

मुख्यमंत्री ने क्या कहा

शिवकुमार ने पत्रकारों से कहा, 'रामलिंगा रेड्डी मेरे दोस्त हैं। चिंता न करें या मनगढ़ंत खबरें न बनाएं — ऐसी खबरें गलत साबित हो रही हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा व्हाट्सएप पर भेजा था। मामला सुलझा लिया गया है।' उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे ऐसी खबरें न फैलाएं जो बाद में निराधार साबित हों।

मंत्री के साथ देर रात हुई बैठक के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि विवाद सहमति से सुलझ गया है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस सरकार के भीतर पोर्टफोलियो आवंटन को लेकर आंतरिक असंतोष की खबरें सामने आई थीं।

इस्तीफे की असली वजह

सूत्रों के अनुसार, रेड्डी ने एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला से कहा कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग का पोर्टफोलियो न दिए जाने की जानकारी पहले ही दे दी जानी चाहिए थी। रेड्डी ने कथित तौर पर कहा, 'भरोसा दिलाने के बाद इसे बदलना सही नहीं है। अगर मुझे पोर्टफोलियो आवंटन के बारे में पहले से पता होता, तो मैं कैबिनेट पद स्वीकार नहीं करता।'

बैठक के बाद, सुरजेवाला ने कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि वे मुख्यमंत्री से बात करेंगे और इस मुद्दे को सुलझाएंगे।

वरिष्ठ नेताओं की भूमिका

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी मुख्यमंत्री शिवकुमार से मुलाकात की और रेड्डी के इस्तीफे पर चर्चा की। कहा जाता है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से रेड्डी की मांग पर विचार करने और इस्तीफा वापस दिलाने का आग्रह किया। जारकीहोली ने कथित तौर पर पार्टी के भीतर मंत्री के.एच. मुनियप्पा को संतुष्ट रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।

शिवकुमार ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने सुरजेवाला के साथ इस मामले पर विस्तार से चर्चा की थी।

पीएम मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया

कर्नाटक के घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के संदर्भ में पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद देता हूं। हमें इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। हमारी सरकार लोगों के विकास पर ध्यान दे रही है। मैं राज्य से जुड़े मामलों पर प्रधानमंत्री से मिलूंगा।'

पार्टी की एकता पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने इस पूरी स्थिति और पूर्व मंत्री जमीर अहमद खान के पहले चरण में कैबिनेट में शामिल न हो पाने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी में 'धैर्य, निष्ठा, ईमानदारी और प्रतिबद्धता' सर्वोपरि हैं। खादर ने कहा, 'व्यक्तियों से ज्यादा पार्टी और देश महत्वपूर्ण है।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया जब कर्नाटक कांग्रेस में पोर्टफोलियो वितरण को लेकर असंतोष की आवाजें उठ रही थीं।

फिलहाल मुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है, लेकिन पार्टी के भीतर आंतरिक संतुलन बनाए रखना उनके सामने बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब तक पोर्टफोलियो असंतोष की संरचनात्मक वजहें नहीं सुलझतीं, ऐसे संकट दोबारा उभरते रहेंगे।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलिंगा रेड्डी ने कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दिया था?
सूत्रों के अनुसार, रेड्डी ने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग का पोर्टफोलियो नहीं दिया गया, जबकि उन्हें पहले इसका भरोसा दिलाया गया था। उन्होंने कहा कि अगर पहले से पता होता तो वे कैबिनेट पद ही स्वीकार नहीं करते।
CM शिवकुमार ने रेड्डी के इस्तीफे पर क्या कहा?
CM डीके शिवकुमार ने 6 जून को बेंगलुरु में कहा कि मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है और रेड्डी उनके करीबी दोस्त हैं। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे ऐसी खबरें न फैलाएं जो बाद में गलत साबित हों।
रेड्डी के इस्तीफे को सुलझाने में किन नेताओं की भूमिका रही?
एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रेड्डी से बात कर भरोसा दिलाया कि वे मुख्यमंत्री से मामला उठाएंगे। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी शिवकुमार से मुलाकात कर रेड्डी का इस्तीफा वापस दिलाने का आग्रह किया।
क्या कर्नाटक कांग्रेस में आंतरिक कलह जारी है?
रेड्डी के इस्तीफे के अलावा पूर्व मंत्री जमीर अहमद खान के कैबिनेट में शामिल न होने पर भी असंतोष की खबरें आई हैं। स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने पार्टी में 'धैर्य और निष्ठा' की जरूरत पर जोर दिया, जो आंतरिक तनाव का संकेत है।
PM मोदी की टिप्पणी पर शिवकुमार ने क्या जवाब दिया?
शिवकुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे राज्य से जुड़े मामलों पर प्रधानमंत्री से मिलेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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