कर्नाटक मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा विवाद: शाम तक सुलझेगी उलझन, कांग्रेस नेतृत्व से चर्चा जारी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शनिवार, 7 जून 2026 को बेंगलुरु में कहा कि उनके इस्तीफे को लेकर बनी राजनीतिक उलझन शनिवार शाम तक सुलझ जाएगी। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा जारी है और रेड्डी ने भरोसा जताया कि नेतृत्व ने अब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।
मुख्य घटनाक्रम
बेंगलुरु के कोरमंगला स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में रेड्डी ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उनसे इस मामले पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ एक होटल में मुलाकात हुई, जिसमें सभी मुद्दों पर बातचीत की गई।
रेड्डी ने यह भी बताया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने उन्हें फोन कर कहा कि सभी को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। रेड्डी के अनुसार, सुरजेवाला और मुख्यमंत्री शिवकुमार के बीच एक और बैठक अपेक्षित है, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि रेड्डी ने शुक्रवार, 6 जून को राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा की थी। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेंगलुरु शहरी पोर्टफोलियो के आवंटन को लेकर दिए गए आश्वासन से पीछे हटे। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पहले से ही आंतरिक खींचतान से जूझ रही है।
पोर्टफोलियो और पैरवी पर रेड्डी का पक्ष
रेड्डी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने विशेष रूप से बेंगलुरु विकास पोर्टफोलियो की माँग नहीं की थी और वर्तमान में सौंपे गए सिंचाई विभाग के बारे में उनकी सीमित जानकारी थी। उन्होंने कहा, 'मैं 1993 में पहली बार मंत्री बना। मैंने कभी किसी पद के लिए किसी मुख्यमंत्री से पैरवी नहीं की।' मंत्रिमंडल में उनका प्रवेश पार्टी के निर्णयों पर आधारित था, न कि व्यक्तिगत लॉबिंग पर।
रेड्डी का रुख और आगे की राह
रेड्डी ने संकेत दिया कि उनके रुख में अभी कोई बदलाव नहीं आया है और वे नेतृत्व की चर्चा के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने किसी भी बिंदु पर धैर्य नहीं खोया है। मुझे विश्वास है कि शाम तक सारा भ्रम खत्म हो जाएगा।' सुरजेवाला और शिवकुमार की अगली बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।