धीरेंद्र शास्त्री की पश्चिम बंगाल CM सुवेंदु अधिकारी से 3 बड़ी मांगें: गंगासागर राष्ट्रीय मेला, गोमाता राज माता, दंगे बंद हों
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 4 सितंबर को हावड़ा में पश्चिम बंगाल के विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं — गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित करना, गोमाता को राज माता का दर्जा देना और काली पूजा के दौरान होने वाले सांप्रदायिक टकरावों पर पूर्ण विराम। पश्चिम बंगाल में पहली बार गीता पाठ के लिए पहुंचे शास्त्री ने यह मांगें सार्वजनिक रूप से उठाईं।
तीन मांगें: विस्तार से
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली मांग गंगासागर मेले को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाना है, जो अब तक केवल राज्य स्तरीय आयोजन के रूप में मान्यता प्राप्त है। दूसरी मांग है कि गोमाता को राज माता का संवैधानिक या प्रशासनिक दर्जा दिया जाए। तीसरी और सबसे तीखी मांग में उन्होंने कहा कि काली पूजा के अवसर पर गलियों-मोहल्लों में होने वाले छोटे-छोटे दंगे अब बंद होने चाहिए — 'अब दंगे नहीं, हर-हर गंगे होना चाहिए।'
हिंदू राष्ट्र पर बयान
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा, 'भारत हिंदू राष्ट्र तो है ही, बस विचारों में घोषित होने की आवश्यकता है। उसके लिए हम बंगाल आए हुए हैं। आप जैसे बुद्धिमान लोग हिंदुत्व विचारधारा का समर्थन करेंगे तो भारत हिंदू राष्ट्र विचारों में भी परिवर्तन होकर रहेगा।' यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक राजनीति एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
ममता बनर्जी पर प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संदर्भ में शास्त्री ने संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'हम साधु हैं, कोई नेता नहीं, हम संदेश क्यों देंगे? उनको भी कहेंगे कि कथा में आप भी पधारो। कथा सबकी है, राम सबके हैं, कृष्ण सबके हैं, काली सबकी हैं।' गौरतलब है कि इससे पहले उनके बंगाल दौरे में रुकावटों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, 'हमको आने से रोका था, रही होगी कोई मजबूरी।'
युवा पीढ़ी पर संदेश
शास्त्री ने भारत की युवा पीढ़ी को लेकर एक रूपक का सहारा लिया — एक विमान जो तेज़ उड़ रहा हो, पर दिशा अज्ञात हो। उन्होंने कहा कि माता-पिता, गुरु, मंदिर और मदरसों का यह दायित्व है कि वे युवाओं को ऐसे संस्कार दें जिससे वे 'राम प्रेमी और राष्ट्र प्रेमी' बन सकें और सड़कों की बजाय विद्यालयों व विश्वविद्यालयों में अपना भविष्य संवारें।
सुवेंदु अधिकारी से अपेक्षाएँ
पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार को 'सनातनी सरकार' बताते हुए शास्त्री ने सुवेंदु अधिकारी से कहा कि अब जब वे मुख्यमंत्री पद पर हैं, तो प्रदेश की जनता की भावनाओं की कद्र करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वे अपनी बात केवल अधिकारी जैसे नेताओं के माध्यम से ही जनता तक पहुंचा सकते हैं। यह दौरा पश्चिम बंगाल में धार्मिक और राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दे सकता है।