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भारत-उज्बेकिस्तान के 35 वर्षीय राजनयिक संबंधों पर भारतीय समुदाय लगाएगा 35,000 पेड़

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भारत-उज्बेकिस्तान के 35 वर्षीय राजनयिक संबंधों पर भारतीय समुदाय लगाएगा 35,000 पेड़

सारांश

उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय का 35,000 पेड़ लगाने का संकल्प महज़ एक पर्यावरण पहल नहीं — यह दो देशों के 35 वर्षीय रिश्ते को जन-स्तर पर जीवंत करने का प्रयास है। मोदी और मिर्जियोयेव के संयुक्त पौधरोपण ने इस साझेदारी को प्रतीकात्मक रूप दिया।

मुख्य बातें

उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय ने 35,000 पेड़ लगाने का संकल्प लिया, जो दोनों देशों के 35 वर्षीय राजनयिक संबंधों की वर्षगांठ का प्रतीक है।
यह पहल भारत के 'एक पेड़ मां के नाम' और उज्बेकिस्तान के 'याशिल माकोन' अभियानों के अंतर्गत की जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने ताशकंद स्थित राष्ट्रपति भवन में संयुक्त पौधरोपण किया।
घोषणा राजदूत स्मिता पंत द्वारा मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के परिणामों की जानकारी देने के दौरान की गई।
बैठक में विदेश मंत्री एस.
जयशंकर , NSA अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी शामिल रहे।

उज्बेकिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय ने 4 सितंबर को घोषणा की कि वह भारत के 'एक पेड़ मां के नाम' और उज्बेकिस्तान के 'याशिल माकोन' हरित अभियान के अंतर्गत पूरे उज्बेकिस्तान में 35,000 पेड़ लगाएगा। यह संकल्प दोनों देशों के बीच अगले वर्ष पूरे होने वाले 35 वर्षों के राजनयिक संबंधों की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में लिया गया है।

घोषणा की पृष्ठभूमि

ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, यह घोषणा उस अवसर पर की गई जब उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत ने भारतीय समुदाय के सदस्यों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया उज्बेकिस्तान यात्रा के प्रमुख परिणामों से अवगत कराया। भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस संकल्प की जानकारी साझा की।

गौरतलब है कि यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी की ताशकंद यात्रा के तुरंत बाद आई है, जो दोनों देशों के बीच पर्यावरण सहयोग को एक नई दिशा देने का प्रयास है।

मोदी और मिर्जियोयेव का प्रतीकात्मक पौधरोपण

अपनी उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ ताशकंद स्थित राष्ट्रपति भवन में एक पौधा लगाया। यह पौधरोपण भारत की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल और उज्बेकिस्तान के 'याशिल माकोन' अभियान को एक साथ जोड़ते हुए किया गया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'ताशकंद से एक बेहतर ग्रह के लिए साझा संकल्प। राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव और मैंने एक पौधा लगाकर भारत के 'एक पेड़ मां के नाम' और उज्बेकिस्तान के 'याशिल माकोन' कार्यक्रमों को एक साथ जोड़ा है। हम हरित क्षेत्र बढ़ाने और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए हमेशा कार्य करते रहेंगे।'

द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता भी की। इस बैठक में व्यापार, निवेश, उद्योग और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने पर विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पर्यावरण प्रतिबद्धता का व्यापक संदेश

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पहल भारत और उज्बेकिस्तान की पर्यावरण संरक्षण तथा हरित एवं टिकाऊ भविष्य के निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। 35,000 पेड़ लगाने का यह संकल्प केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच जन-स्तरीय जुड़ाव का भी प्रतिबिंब है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंचों पर जलवायु परिवर्तन से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता को बार-बार दोहरा रहा है। भारतीय समुदाय की यह पहल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 पेड़ों का यह संकल्प संख्या में भले ही प्रतीकात्मक हो, लेकिन यह भारत की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो सरकार-से-सरकार संबंधों से आगे बढ़कर जन-स्तरीय जुड़ाव को प्राथमिकता देती है। 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी घरेलू पहल को विदेश नीति के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना एक नई प्रवृत्ति है जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है। सवाल यह है कि इन पेड़ों की निगरानी और दीर्घकालिक देखभाल का ढाँचा क्या होगा — बिना इसके, यह पहल केवल एक फोटो-अवसर बनकर रह सकती है। मध्य एशिया में भारत की बढ़ती उपस्थिति के संदर्भ में, उज्बेकिस्तान के साथ यह हरित साझेदारी व्यापार और निवेश वार्ताओं को नरम ज़मीन देने का काम कर सकती है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय 35,000 पेड़ क्यों लगाएगा?
यह संकल्प भारत और उज्बेकिस्तान के बीच अगले वर्ष पूरे होने वाले 35 वर्षीय राजनयिक संबंधों की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में लिया गया है। पेड़ों की संख्या — 35,000 — सीधे 35 वर्षों के रिश्ते का प्रतीक है।
'एक पेड़ मां के नाम' और 'याशिल माकोन' अभियान क्या हैं?
'एक पेड़ मां के नाम' भारत सरकार की एक राष्ट्रीय वृक्षारोपण पहल है, जबकि 'याशिल माकोन' उज्बेकिस्तान का हरित क्षेत्र विस्तार अभियान है। दोनों अभियानों को ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के संयुक्त पौधरोपण के ज़रिए जोड़ा गया।
प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा में और क्या हुआ?
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जिसमें व्यापार, निवेश और उद्योग में द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, NSA अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी इस बैठक में शामिल रहे।
इस पहल की घोषणा किसने और कहाँ की?
यह घोषणा ताशकंद में उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत द्वारा भारतीय समुदाय के सदस्यों को मोदी की यात्रा के परिणामों की जानकारी देने के दौरान की गई। भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी एक्स पर साझा की।
भारत-उज्बेकिस्तान के राजनयिक संबंध कब से हैं?
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध अगले वर्ष 35 वर्ष पूरे करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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