वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह की यूएई यात्रा: अल शम्सी से मुलाकात, रक्षा सहयोग को नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने 4 सितंबर 2026 को अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के वायुसेना एवं एयर डिफेंस कमांडर मेजर जनरल राशिद मोहम्मद अल शम्सी से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग को गहरा करने के ठोस उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह यात्रा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैठक में क्या हुआ
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। सैन्य एवं रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने की संभावनाओं का भी पता लगाया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयासों पर विशेष बल दिया।
पिछले कुछ महीनों का घटनाक्रम
यह बैठक एक व्यापक द्विपक्षीय सैन्य संवाद की कड़ी में नवीनतम है। इससे पहले जून 2026 में यूएई थल सेना के उप कमांडर ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ मोहम्मद खमीस मोहम्मद अल-हसानी ने नई दिल्ली में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की थी। उस बैठक में पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाने और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान पर चर्चा हुई थी।
भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (एडीजीपीआई) के अनुसार, उस बैठक में दोनों देशों ने संस्थागत संबंधों को मजबूत करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
राजनयिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यापक वार्ता की थी। दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख स्तंभ बताया था। संयुक्त बयान में सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुखों के आदान-प्रदान, द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों की सफलता और रणनीतिक रक्षा साझेदारी हेतु लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया था।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक हलचल के बीच भारत अपनी रक्षा साझेदारियों को विविध और सुदृढ़ करने की रणनीति पर काम कर रहा है। वायुसेना प्रमुख की यह यात्रा संकेत देती है कि दोनों देश सैन्य सहयोग को केवल कागज़ी प्रतिबद्धताओं से आगे ले जाकर व्यावहारिक धरातल पर उतारने के इच्छुक हैं।