भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से यूएई के डिप्टी आर्मी कमांडर की मुलाकात, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 27 जून 2025 को नई दिल्ली में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की थल सेना के डिप्टी कमांडर ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ मोहम्मद खमीस मोहम्मद अल-हसानी से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और गहरा करने, पेशेवर आदान-प्रदान बढ़ाने तथा क्षेत्रीय सुरक्षा के साझा लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुआ
भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इन्फॉर्मेशन (ADGPI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि बैठक में भारत-यूएई रक्षा संबंधों की लगातार बढ़ती मजबूती पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने सैन्य सहयोग बढ़ाने, पेशेवर स्तर पर आपसी आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने और दोनों सेनाओं के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशने पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, संस्थागत संबंधों को मजबूत करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता के साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
राजनयिक पृष्ठभूमि और रणनीतिक साझेदारी
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत के आधिकारिक दौरे पर आए थे, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की। दोनों नेताओं ने माना कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) का एक अहम स्तंभ है। उस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों की सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुखों के हालिया दौरों तथा सफल संयुक्त सैन्य अभ्यासों की सराहना की गई थी। इसके अलावा, स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप की दिशा में 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर होने का भी स्वागत किया गया था।
जनरल द्विवेदी का यूएई दौरा और उसका महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्वयं जनवरी 2025 में आधिकारिक तौर पर यूएई का दौरा किया था। उस दौरे में उन्होंने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और यूएई की सेना की संरचना, जिम्मेदारियों तथा क्षमताओं के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कई प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया और वहाँ तैनात अधिकारियों व जवानों से सीधे संवाद किया। यह दौरा भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग और सेनाओं के बीच संबंधों को संस्थागत रूप देना है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर साझा दृष्टिकोण
भारत और यूएई दोनों ही खाड़ी क्षेत्र और हिंद महासागर में स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय सैन्य बैठकें केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि ये दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास की गहराई को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-यूएई रक्षा संबंधों की यह गति आने वाले वर्षों में संयुक्त क्षमता निर्माण और इंटरऑपरेबिलिटी की दिशा में और मजबूत होगी।
आगे की राह
दोनों देशों के बीच इस तरह की नियमित उच्चस्तरीय सैन्य बातचीत यह संकेत देती है कि भारत-यूएई रक्षा साझेदारी अब केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक परिपक्व रणनीतिक गठजोड़ का रूप ले रही है। आने वाले महीनों में और संयुक्त सैन्य अभ्यासों तथा उच्चस्तरीय आदान-प्रदान की उम्मीद जताई जा रही है।