26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पेंटागन दौरा: भारत-अमेरिका सैन्य साझेदारी को मिली नई दिशा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पेंटागन दौरा: भारत-अमेरिका सैन्य साझेदारी को मिली नई दिशा

सारांश

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पेंटागन दौरा महज़ शिष्टाचार यात्रा नहीं था — यह इंडो-पैसिफिक में बढ़ते रणनीतिक दबाव के बीच भारत-अमेरिका सैन्य साझेदारी को ठोस ज़मीन देने की कोशिश थी। सेना सचिव ड्रिस्कॉल से लेकर नीति उप-सचिव कोल्बी तक — बैठकों की फेहरिस्त बताती है कि यह सहयोग अब सिर्फ़ शब्दों तक सीमित नहीं रहेगा।

मुख्य बातें

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 20 से 23 अप्रैल 2025 तक अमेरिका का आधिकारिक दौरा किया।
23 अप्रैल को पेंटागन में सेना सचिव डेनियल पी.
ड्रिस्कॉल और कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव से उच्चस्तरीय बैठकें हुईं।
अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी और नेशनल गार्ड ब्यूरो प्रमुख जनरल स्टीवन एस.
नॉर्डहॉस से रक्षा नीति व रणनीतिक समन्वय पर चर्चा हुई।
दोनों देशों ने इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त सैन्य अभ्यास को मज़बूत करने पर सहमति जताई।
जनरल द्विवेदी ने अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में अमेरिकी शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की।
अमेरिका में बसे भारतीय वेटरन्स को दोनों देशों के बीच पीपुल-टू-पीपुल संबंधों का सेतु बताया गया।

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 20 अप्रैल से 23 अप्रैल 2025 तक अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर रहते हुए पेंटागन में कई उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लिया, जिनमें दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा हुई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तेज़ी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य — विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक दबाव — के बीच यह यात्रा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पेंटागन में मुख्य बैठकें

23 अप्रैल को जनरल द्विवेदी ने पेंटागन में अमेरिका के सेना सचिव डेनियल पी. ड्रिस्कॉल के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बातचीत में रक्षा सहयोग के विस्तार, सैन्य साझेदारी को सुदृढ़ करने और नई संभावनाओं की तलाश पर विशेष ज़ोर दिया गया। इसके अतिरिक्त जनरल द्विवेदी ने अमेरिकी सेना के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव से भी मुलाकात की, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आधुनिक सैन्य क्षमताओं के विकास पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

रक्षा नीति अधिकारियों से रणनीतिक संवाद

जनरल द्विवेदी ने अंडर सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर पॉलिसी एल्ब्रिज कोल्बी और नेशनल गार्ड ब्यूरो के प्रमुख जनरल स्टीवन एस. नॉर्डहॉस से भी बैठकें कीं। इन चर्चाओं में रक्षा नीति, रणनीतिक समन्वय और संस्थागत सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन हुआ। साथ ही भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए आयामों की भी पहचान की गई।

इंटरऑपरेबिलिटी पर सहमति

बैठकों में इस बात पर खास ज़ोर दिया गया कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और समन्वय अनिवार्य है। दोनों पक्षों ने इंटरऑपरेबिलिटी — यानी एक-दूसरे के साथ मिलकर प्रभावी तरीके से काम करने की क्षमता — को और मज़बूत बनाने पर सहमति जताई। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना दोनों देशों की प्राथमिकता बन चुकी है।

वेटरन्स से मुलाकात और अर्लिंग्टन में श्रद्धांजलि

जनरल द्विवेदी ने दौरे के दौरान अमेरिका में बसे भारतीय सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों (वेटरन्स) से भी मुलाकात की और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने पूर्व सैनिकों को राष्ट्र और सशस्त्र बलों की 'मजबूत आधारशिला' बताते हुए कहा कि उनका समर्पण और सेवा भावना समय के साथ और भी प्रेरणादायक बनती जा रही है। जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि अमेरिका में बसे भारतीय पूर्व सैनिक दोनों देशों के बीच पीपुल-टू-पीपुल संबंधों को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में जाकर अमेरिकी शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की — जो दोनों देशों के बीच सम्मान और कृतज्ञता के गहरे बंधन का प्रतीक रही।

आगे की राह

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जनरल उपेंद्र द्विवेदी की यह यात्रा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुई है। इस दौरे के ज़रिए दोनों देशों ने न केवल आपसी विश्वास को और गहरा किया, बल्कि भविष्य के संयुक्त अभियानों और रक्षा-तकनीकी सहयोग के लिए एक मज़बूत ढाँचा तैयार करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि वे चीन-केंद्रित रणनीति के मुखर समर्थक रहे हैं — जो भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति के साथ हमेशा सहज नहीं बैठती। इंटरऑपरेबिलिटी पर सहमति तब तक कागज़ी रहेगी जब तक संयुक्त अभ्यासों की आवृत्ति और दायरा दोनों नहीं बढ़ते।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पेंटागन दौरा कब और क्यों हुआ?
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 20 से 23 अप्रैल 2025 तक अमेरिका का आधिकारिक दौरा किया, जिसमें 23 अप्रैल को पेंटागन में उच्चस्तरीय बैठकें हुईं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग को गहरा करना और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक समन्वय बढ़ाना था।
पेंटागन में जनरल द्विवेदी ने किन अधिकारियों से मुलाकात की?
जनरल द्विवेदी ने अमेरिकी सेना सचिव डेनियल पी. ड्रिस्कॉल, कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव, अंडर सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर पॉलिसी एल्ब्रिज कोल्बी और नेशनल गार्ड ब्यूरो प्रमुख जनरल स्टीवन एस. नॉर्डहॉस से मुलाकात की। इन बैठकों में रक्षा नीति, संयुक्त अभ्यास और इंटरऑपरेबिलिटी पर चर्चा हुई।
भारत-अमेरिका इंटरऑपरेबिलिटी का क्या मतलब है?
इंटरऑपरेबिलिटी का अर्थ है कि दोनों देशों की सेनाएँ संयुक्त अभियानों में एक-दूसरे के साथ प्रभावी तरीके से काम कर सकें — जिसमें संचार प्रणाली, हथियार मंच और सामरिक प्रक्रियाएँ शामिल हैं। इस दौरे में दोनों पक्षों ने इसे और मज़बूत बनाने पर सहमति जताई।
जनरल द्विवेदी ने अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में क्या किया?
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में जाकर अमेरिकी शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की। यह क्षण दोनों देशों के बीच सैनिक सम्मान और आपसी कृतज्ञता के गहरे बंधन का प्रतीक रहा।
अमेरिका में बसे भारतीय वेटरन्स की क्या भूमिका बताई गई?
जनरल द्विवेदी ने कहा कि अमेरिका में बसे भारतीय पूर्व सैनिक भारत और अमेरिका के बीच पीपुल-टू-पीपुल संबंधों को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इन वेटरन्स को राष्ट्र और सशस्त्र बलों की 'मजबूत आधारशिला' बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले