जनरल उपेंद्र द्विवेदी का पेंटागन दौरा: भारत-अमेरिका सैन्य साझेदारी को मिली नई दिशा
सारांश
Key Takeaways
- जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 20 से 23 अप्रैल 2025 तक अमेरिका का आधिकारिक दौरा किया।
- 23 अप्रैल को पेंटागन में सेना सचिव डेनियल पी. ड्रिस्कॉल और कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव से उच्चस्तरीय बैठकें हुईं।
- अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी और नेशनल गार्ड ब्यूरो प्रमुख जनरल स्टीवन एस. नॉर्डहॉस से रक्षा नीति व रणनीतिक समन्वय पर चर्चा हुई।
- दोनों देशों ने इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त सैन्य अभ्यास को मज़बूत करने पर सहमति जताई।
- जनरल द्विवेदी ने अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में अमेरिकी शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की।
- अमेरिका में बसे भारतीय वेटरन्स को दोनों देशों के बीच पीपुल-टू-पीपुल संबंधों का सेतु बताया गया।
भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 20 अप्रैल से 23 अप्रैल 2025 तक अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर रहते हुए पेंटागन में कई उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लिया, जिनमें दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा हुई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तेज़ी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य — विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक दबाव — के बीच यह यात्रा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पेंटागन में मुख्य बैठकें
23 अप्रैल को जनरल द्विवेदी ने पेंटागन में अमेरिका के सेना सचिव डेनियल पी. ड्रिस्कॉल के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बातचीत में रक्षा सहयोग के विस्तार, सैन्य साझेदारी को सुदृढ़ करने और नई संभावनाओं की तलाश पर विशेष ज़ोर दिया गया। इसके अतिरिक्त जनरल द्विवेदी ने अमेरिकी सेना के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव से भी मुलाकात की, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आधुनिक सैन्य क्षमताओं के विकास पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
रक्षा नीति अधिकारियों से रणनीतिक संवाद
जनरल द्विवेदी ने अंडर सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर पॉलिसी एल्ब्रिज कोल्बी और नेशनल गार्ड ब्यूरो के प्रमुख जनरल स्टीवन एस. नॉर्डहॉस से भी बैठकें कीं। इन चर्चाओं में रक्षा नीति, रणनीतिक समन्वय और संस्थागत सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन हुआ। साथ ही भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग के नए आयामों की भी पहचान की गई।
इंटरऑपरेबिलिटी पर सहमति
बैठकों में इस बात पर खास ज़ोर दिया गया कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और समन्वय अनिवार्य है। दोनों पक्षों ने इंटरऑपरेबिलिटी — यानी एक-दूसरे के साथ मिलकर प्रभावी तरीके से काम करने की क्षमता — को और मज़बूत बनाने पर सहमति जताई। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना दोनों देशों की प्राथमिकता बन चुकी है।
वेटरन्स से मुलाकात और अर्लिंग्टन में श्रद्धांजलि
जनरल द्विवेदी ने दौरे के दौरान अमेरिका में बसे भारतीय सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों (वेटरन्स) से भी मुलाकात की और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने पूर्व सैनिकों को राष्ट्र और सशस्त्र बलों की 'मजबूत आधारशिला' बताते हुए कहा कि उनका समर्पण और सेवा भावना समय के साथ और भी प्रेरणादायक बनती जा रही है। जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि अमेरिका में बसे भारतीय पूर्व सैनिक दोनों देशों के बीच पीपुल-टू-पीपुल संबंधों को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में जाकर अमेरिकी शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की — जो दोनों देशों के बीच सम्मान और कृतज्ञता के गहरे बंधन का प्रतीक रही।
आगे की राह
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जनरल उपेंद्र द्विवेदी की यह यात्रा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुई है। इस दौरे के ज़रिए दोनों देशों ने न केवल आपसी विश्वास को और गहरा किया, बल्कि भविष्य के संयुक्त अभियानों और रक्षा-तकनीकी सहयोग के लिए एक मज़बूत ढाँचा तैयार करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।