आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी से मिले राजदूत दोराईस्वामी, भारत-चीन रणनीतिक संवाद को मजबूत करने पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
चीन में भारत के राजदूत विक्रम के. दोराईस्वामी ने मंगलवार, 23 जून 2026 को नई दिल्ली में भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की। इस बैठक में बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य पर गहन विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने भारत-चीन द्विपक्षीय सहयोग के मौजूदा ढाँचों को और सुदृढ़ करने के उपायों पर भी चर्चा की।
बैठक का मुख्य एजेंडा
भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि 'चर्चा का केंद्र बदलता हुआ क्षेत्रीय और वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य रहा।' सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि 'दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहभागिता की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और सहयोग तथा संवाद के मौजूदा तंत्रों को और सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार किया।'
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत-चीन संबंध 2020 के गलवान संघर्ष के बाद धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राजनयिक और सैन्य दोनों स्तरों पर एक साथ हो रही बैठकें इस प्रक्रिया की गति को दर्शाती हैं।
डोभाल-वांग यी मुलाकात: ब्रिक्स मंच पर कूटनीतिक संवाद
इससे एक दिन पहले, सोमवार, 22 जून 2026 को, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य एवं चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि 'दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हालिया प्रगति की समीक्षा की और संबंधों के धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में हुई प्रगति पर चर्चा की।' मंत्रालय के अनुसार, एनएसए डोभाल ने रेखांकित किया कि 'स्थिर और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के बीच विश्वास और बेहतर समझ विकसित करने में सहायक होते हैं।'
कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियों का जायजा
इसी सप्ताह रविवार को राजदूत दोराईस्वामी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के श्रद्धालुओं के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने और भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने माउंट कैलाश की परिक्रमा मार्ग तथा यात्रा के सभी प्रवेश बिंदुओं का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया।
दूतावास की टीम ने तीर्थयात्रियों के ठहरने वाले होटलों, रसोईघरों, कमरों और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। दोराईस्वामी ने बताया कि चीनी सरकार के सहयोग से तैयारियाँ यथासंभव पूरी कर ली गई हैं।
गौरतलब है कि इस वर्ष चीनी और पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के अनुसार 12 वर्षों में एक बार आने वाला विशेष वर्ष है, जिसके कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा सुझाव
राजदूत ने श्रद्धालुओं को ऊँचाई से जुड़ी चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा, 'यह एक उच्च हिमालयी क्षेत्र है। सामान्यतः आप हर समय समुद्र तल से 3,500 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर रहेंगे। कैलाश कोरा (परिक्रमा) का सबसे ऊँचा बिंदु 5,605 मीटर, यानी लगभग 6,000 मीटर समुद्र तल से ऊपर तक पहुँचता है।'
भारत-चीन संबंधों के क्रमिक सामान्यीकरण की यह प्रक्रिया आने वाले महीनों में और ठोस रूप लेने की उम्मीद है, क्योंकि सैन्य, राजनयिक और जन-स्तरीय — तीनों मोर्चों पर एक साथ संवाद बहाल हो रहा है।