25 सितंबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIT जांच की मांग, मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप अदालत तक पहुँचा

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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIT जांच की मांग, मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप अदालत तक पहुँचा

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूची में मनमाने बदलाव का आरोप अदालत तक पहुँच गया है। वकील ने SIT जांच और मुकदमे की माँग की है, जबकि मुंबई के पवई की 75 साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है।

मुख्य बातें

अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने 25 सितंबर 2026 को अदालत में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर की।
आरोप: मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए, नए मानदंड बिना कानूनी आधार के लागू किए गए।
ECI NET प्रणाली को भी चुनौती दी गई; प्रक्रिया के अवैध केंद्रीकरण का आरोप।
SIT गठन और मुकदमा दर्ज करने की माँग; अगले सप्ताह सुनवाई अपेक्षित।
मुंबई के पवई की करीब 75 साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई; महाराष्ट्र सरकार से जवाब माँगा।

अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने 25 सितंबर 2026 को अदालत में याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के विरुद्ध जाकर मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए और नए मानदंड बिना किसी वैध कानूनी आधार के लागू किए गए। इसी सुनवाई के दौरान मुंबई के पवई स्थित एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की भी जानकारी सामने आई।

मतदाता सूची विवाद: क्या है मुख्य आरोप

अधिवक्ता त्रिपाठी के अनुसार, चुनाव आयोग ने अल्पमत के आधार पर निर्णय लिए, जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'किसी भी नए मानदंड का कानूनी आधार होना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं था।' उनके अनुसार, सीईसी ज्ञानेश कुमार ने निर्धारित सहमति और प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने तरीके से यह कदम उठाया।

त्रिपाठी ने विशेष रूप से फॉर्म में अलग से जोड़े गए आवेदन और नए मानदंडों का उल्लेख करते हुए कहा कि नामों को जोड़ने या हटाने का अधिकार पहले निचले स्तर पर था, परंतु इस प्रक्रिया को पूरी तरह केंद्रीकृत कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह केंद्रीकरण मतदाताओं को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया।

ECI NET पर भी उठाए सवाल

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने ईसीआई नेट (ECI NET) को भी चुनौती दी है, त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अपनाई गई प्रक्रिया कानून के अनुसार केंद्रीकृत नहीं थी। उनका तर्क है कि इस प्रणाली के माध्यम से मतदाता सूची प्रबंधन में जो बदलाव किए गए, वे जनप्रतिनिधित्व कानून के दायरे से बाहर हैं।

SIT गठन और मुकदमे की मांग

त्रिपाठी ने अदालत से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की माँग की है। उनके अनुसार यह जांच यह तय करने के लिए ज़रूरी है कि क्या संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की भी माँग की है और उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह इस पर सुनवाई हो सकती है।

मुंबई पवई मस्जिद: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

इसी सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वीर कंकारिया ने बताया कि मुंबई के पवई इलाके में स्थित करीब 75 साल पुराने ट्रस्ट से जुड़ी मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मामले में महाराष्ट्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

कंकारिया के अनुसार, एक पुनर्विकास परियोजना के तहत बिल्डर मस्जिद से जुड़े लोगों को 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करना चाहता था, परंतु मस्जिद पक्ष को शर्तें स्वीकार नहीं थीं। बॉम्बे उच्च न्यायालय से स्टे न मिलने के बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा, जहाँ से ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक मिली है।

आगे क्या होगा

मतदाता सूची विवाद पर अगले सप्ताह सुनवाई अपेक्षित है, जबकि पवई मस्जिद मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार का जवाब आना बाकी है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह लोकतांत्रिक भागीदारी के मूल अधिकार पर गंभीर सवाल उठाएगा। अदालत का रुख और SIT की माँग दर्शाती है कि मामला संस्थागत जवाबदेही की परीक्षा बनने की ओर बढ़ रहा है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अदालत में क्या आरोप लगाए गए हैं?
अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिना निर्धारित सहमति और प्रक्रिया का पालन किए मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए और नए मानदंड लागू किए। उनका कहना है कि यह कार्रवाई संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के विरुद्ध है।
मतदाता सूची विवाद में SIT जांच की मांग क्यों की जा रही है?
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि कानून के दायरे से बाहर जाकर मतदाता सूची में बदलाव किए गए हैं, तो इसकी स्वतंत्र जांच ज़रूरी है। SIT के माध्यम से यह तय किया जाना चाहिए कि क्या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हुआ और यदि हुआ तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाए।
ECI NET को कानूनी चुनौती क्यों दी गई है?
अधिवक्ता त्रिपाठी ने ECI NET को भी चुनौती दी है, यह आरोप लगाते हुए कि इस प्रणाली के ज़रिए मतदाता सूची प्रबंधन की प्रक्रिया को अवैध रूप से केंद्रीकृत किया गया। उनके अनुसार जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार निचले स्तर के अधिकारियों के पास होना चाहिए था।
मुंबई के पवई की मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई के पवई इलाके में स्थित करीब 75 साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही महाराष्ट्र सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पवई मस्जिद विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
एक पुनर्विकास परियोजना के तहत बिल्डर मस्जिद पक्ष को 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करना चाहता था, जो मस्जिद ट्रस्ट को स्वीकार नहीं था। बॉम्बे उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद अधिवक्ता वीर कंकारिया ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जहाँ से अंतरिम स्टे मिला।
राष्ट्र प्रेस
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