सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIT जांच की मांग, मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप अदालत तक पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने 25 सितंबर 2026 को अदालत में याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के विरुद्ध जाकर मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए और नए मानदंड बिना किसी वैध कानूनी आधार के लागू किए गए। इसी सुनवाई के दौरान मुंबई के पवई स्थित एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की भी जानकारी सामने आई।
मतदाता सूची विवाद: क्या है मुख्य आरोप
अधिवक्ता त्रिपाठी के अनुसार, चुनाव आयोग ने अल्पमत के आधार पर निर्णय लिए, जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'किसी भी नए मानदंड का कानूनी आधार होना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं था।' उनके अनुसार, सीईसी ज्ञानेश कुमार ने निर्धारित सहमति और प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने तरीके से यह कदम उठाया।
त्रिपाठी ने विशेष रूप से फॉर्म में अलग से जोड़े गए आवेदन और नए मानदंडों का उल्लेख करते हुए कहा कि नामों को जोड़ने या हटाने का अधिकार पहले निचले स्तर पर था, परंतु इस प्रक्रिया को पूरी तरह केंद्रीकृत कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह केंद्रीकरण मतदाताओं को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया।
ECI NET पर भी उठाए सवाल
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने ईसीआई नेट (ECI NET) को भी चुनौती दी है, त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अपनाई गई प्रक्रिया कानून के अनुसार केंद्रीकृत नहीं थी। उनका तर्क है कि इस प्रणाली के माध्यम से मतदाता सूची प्रबंधन में जो बदलाव किए गए, वे जनप्रतिनिधित्व कानून के दायरे से बाहर हैं।
SIT गठन और मुकदमे की मांग
त्रिपाठी ने अदालत से विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की माँग की है। उनके अनुसार यह जांच यह तय करने के लिए ज़रूरी है कि क्या संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की भी माँग की है और उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह इस पर सुनवाई हो सकती है।
मुंबई पवई मस्जिद: सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
इसी सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वीर कंकारिया ने बताया कि मुंबई के पवई इलाके में स्थित करीब 75 साल पुराने ट्रस्ट से जुड़ी मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मामले में महाराष्ट्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
कंकारिया के अनुसार, एक पुनर्विकास परियोजना के तहत बिल्डर मस्जिद से जुड़े लोगों को 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करना चाहता था, परंतु मस्जिद पक्ष को शर्तें स्वीकार नहीं थीं। बॉम्बे उच्च न्यायालय से स्टे न मिलने के बाद उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा, जहाँ से ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक मिली है।
आगे क्या होगा
मतदाता सूची विवाद पर अगले सप्ताह सुनवाई अपेक्षित है, जबकि पवई मस्जिद मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद महाराष्ट्र सरकार का जवाब आना बाकी है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।