सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर को करेगा सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर 5 अक्टूबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाओं में विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों और मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया गया है।
याचिकाओं में क्या माँगें हैं
याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने की माँग की है। इसके अलावा ईसीआईनेट और ईआरओनेट का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी अपील की गई है।
याचिकाओं में चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और बैठकों के कार्यवृत्त को अदालत के समक्ष तलब करने की माँग भी शामिल है। सीईसी ज्ञानेश कुमार से आयोग की सामूहिक शक्ति के इस्तेमाल का कानूनी आधार स्पष्ट करने को भी कहा गया है।
13 करोड़ नाम हटाने का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए। उनका तर्क है कि यदि यह निर्णय एकतरफा लिया गया और सॉफ्टवेयर में अनधिकृत बदलाव किए गए, तो यह भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद को कमज़ोर करता है।
गौरतलब है कि मतदाता सूची की शुद्धता का मुद्दा पिछले कई चुनावों से विवाद का केंद्र रहा है, और इस बार याचिकाकर्ताओं ने इसे सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने का निर्णय लिया है।
एसआईटी या न्यायिक जाँच की माँग
याचिकाओं में सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एसआईटी (विशेष जाँच दल) या न्यायिक जाँच कराने की अपील की गई है। साथ ही सीईसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी माँग की गई है।
सुनवाई तक सीईसी को रोकने की माँग
याचिकाओं में सबसे महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील माँग यह है कि जब तक इस पूरे मामले की सुनवाई पूरी न हो जाए, तब तक ज्ञानेश कुमार को सीईसी के पद पर कार्य करने से रोका जाए। यह माँग मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है।
यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर राजनीतिक हलकों में बहस तेज़ हो रही है। 5 अक्टूबर को सीजेआई की पीठ इस मामले में जो रुख अपनाती है, वह आगामी चुनावी प्रक्रियाओं पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।