TMC और डेमोक्रेटिक TMC ने चुनाव आयोग, SIR और जमुई मामले पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उससे अलग हुई डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने 24 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और बिहार के जमुई छेड़छाड़ मामले को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सामने रखीं। दोनों दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका, राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति और संवैधानिक प्रक्रिया पर तीखे सवाल उठाए।
डेमोक्रेटिक TMC का रुख: न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा
डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कोलकाता में पार्टी के चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट चुनाव आयोग से बात करेगा और पार्टी फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पार्टी के लिए किसी एक विधायक के नाम पर कोई निर्धारित चुनाव चिह्न नहीं होता — संबंधित चुनाव चिह्न 'फ्री सिंबल' की श्रेणी में था।
रिजु दत्ता के अनुसार, उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग से तीन चुनाव चिह्नों का विकल्प माँगा था, जिनमें से आयोग ने लिफाफे वाला चिह्न आवंटित किया। उन्होंने न्यायिक और चुनावी प्रक्रिया का पालन किए जाने की बात पर जोर दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे विवाद पर रिजु दत्ता ने कहा कि न भारत और न ही पश्चिम बंगाल किसी एक व्यक्ति की इच्छा के अनुसार चलता है — सभी निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होते हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के उस बयान का उल्लेख भी किया जिसमें ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की माँग की गई थी, और कहा कि वोट चोरी का दावा साबित करने में समय लगेगा।
महुआ मोइत्रा के गंभीर आरोप
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने जमुई छेड़छाड़ मामले को बिहार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बिहार में लगातार सामने आ रही हैं और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर मोइत्रा ने गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पहले ही पेश किया जा चुका है और उस समय आवश्यक 50 हस्ताक्षरों के मुकाबले 70 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर थे। उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्ताव अभी भी लंबित है।
मोइत्रा ने ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को क्षति पहुँचाने का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने की माँग की। उन्होंने 2023 में केंद्र सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून पारित किए जाने का भी उल्लेख किया।
डोला सेन का SIR पर सवाल
कोलकाता से TMC सांसद डोला सेन ने मतदाता सूची के SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पहले ही इस मुद्दे पर अपनी चिंता जता चुकी है।
डोला सेन ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से 92 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने और उनके मामलों के निपटारे को लेकर कई बार सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक SIR की आड़ में चुनाव आयोग का व्यवहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक 'फ्रंटल संगठन' जैसा प्रतीत हो रहा है — यह एक गंभीर आरोप है जो सत्यापन का विषय है।
डोला सेन ने कहा कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दल भी इसी तरह की चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने इसका स्वागत करते हुए कहा, 'देर आए, दुरुस्त आए।'
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल एकजुट होकर SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि TMC और डेमोक्रेटिक TMC के बीच चुनाव चिह्न का विवाद अभी अदालत में विचाराधीन है, जो दोनों गुटों के बीच चल रहे संगठनात्मक संघर्ष को दर्शाता है।
आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और महाभियोग प्रस्ताव पर संसद और अदालत दोनों स्तरों पर घटनाक्रम और तेज होने की संभावना है।