टीएमसी ने बंगाल सीईओ की मतदाता नामांकन मुहिम पर उठाए सवाल: 'चुनाव से पहले सक्रियता कहाँ थी?'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 13 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय की उस घोषणा पर तीखे सवाल उठाए, जिसमें मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं तथा नए एवं पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों के नाम फिर से जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करने की बात कही गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने इस कदम के समय और मंशा दोनों पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
टीएमसी का आरोप: एसआईआर भाजपा की मदद के लिए था
मंगलवार दोपहर सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में टीएमसी गुट ने आरोप लगाया कि सीईओ कार्यालय की सोमवार की घोषणा दरअसल इस बात की 'अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति' है कि पूरा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान भारतीय जनता पार्टी (BJP) को ऐसी सीटें जिताने में मदद करने के मकसद से चलाया गया था, जिनके बारे में पार्टी ने कभी सोचा भी नहीं था।
पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के बाद चुनाव आयोग अब अचानक यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय अभियान शुरू करना चाहता है कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। चुनाव से पहले यह सक्रियता कहाँ थी? बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया इतनी जल्दबाजी और बिना योजना के क्यों कराई गई?'
पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग
टीएमसी ने आगे कहा कि इस अभियान को शुरू करने की घोषणा का समय पूरी प्रक्रिया की ईमानदारी, निष्पक्षता और तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी के बयान में कहा गया, 'भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को इन विसंगतियों की व्याख्या करनी चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए, न कि नागरिकों से बिना सवाल किए इस प्रक्रिया को स्वीकार करने की उम्मीद करनी चाहिए।'
बयान में यह भी कहा गया कि 'तार्किक विसंगतियों और खराब तरीके से किए गए एसआईआर के नाम पर ईसीआई ने लोगों का मतदान का अधिकार छीन लिया, ताकि एक अवैध सरकार को सत्ता में लाया जा सके।' पार्टी ने यह भी कहा, 'बंगाल में भाजपा की सरकार नहीं टिकेगी।' गौरतलब है कि ये तमाम आरोप टीएमसी की ओर से लगाए गए हैं; भाजपा और निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सीईओ कार्यालय की मूल घोषणा
सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जानकारी दी थी कि राज्य के सभी 24 जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं तथा नए नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए सक्रिय अभियान शुरू कर चुके हैं। इसके तहत पूरे राज्य में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।
सीईओ कार्यालय ने नागरिकों को सलाह दी कि यदि उन्हें कोई शिकायत है तो वे बूथ लेवल अधिकारी (BLO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) या संबंधित DEO-सह-DM से संपर्क कर सकते हैं।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव-पश्चात राजनीतिक तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि एसआईआर अभियान के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की जाँच होनी चाहिए। टीएमसी का यह भी तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे के बिना किसी भी सरकार की वैधता प्रश्नों के घेरे में रहती है।
आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों का जवाब किस तरह देता है और क्या सीईओ कार्यालय का यह अभियान राजनीतिक विवाद से परे जाकर व्यापक जनता तक पहुँच पाता है।