13 अक्टूबर 2026
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टीएमसी ने बंगाल सीईओ की मतदाता नामांकन मुहिम पर उठाए सवाल: 'चुनाव से पहले सक्रियता कहाँ थी?'

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टीएमसी ने बंगाल सीईओ की मतदाता नामांकन मुहिम पर उठाए सवाल: 'चुनाव से पहले सक्रियता कहाँ थी?'

सारांश

टीएमसी ने बंगाल के सीईओ कार्यालय की मतदाता पुनर्नामांकन मुहिम को 'देर से जागरण' बताते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर अभियान जानबूझकर भाजपा की मदद के लिए चलाया गया। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से जवाबदेही माँगी और चेताया कि बंगाल में भाजपा सरकार नहीं टिकेगी।

मुख्य बातें

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 13 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय की मतदाता नामांकन घोषणा पर गंभीर सवाल उठाए।
टीएमसी गुट ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान भाजपा को फायदा पहुँचाने के मकसद से चलाया गया था।
पार्टी ने पूछा कि चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, अब अचानक नामांकन अभियान क्यों शुरू हुआ।
सीईओ कार्यालय ने राज्य के सभी 24 जिलों में विशेष शिविर लगाकर पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की बात कही।
टीएमसी ने निर्वाचन आयोग (ECI) से विसंगतियों की व्याख्या और जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 13 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय की उस घोषणा पर तीखे सवाल उठाए, जिसमें मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं तथा नए एवं पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों के नाम फिर से जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करने की बात कही गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने इस कदम के समय और मंशा दोनों पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।

टीएमसी का आरोप: एसआईआर भाजपा की मदद के लिए था

मंगलवार दोपहर सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में टीएमसी गुट ने आरोप लगाया कि सीईओ कार्यालय की सोमवार की घोषणा दरअसल इस बात की 'अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति' है कि पूरा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान भारतीय जनता पार्टी (BJP) को ऐसी सीटें जिताने में मदद करने के मकसद से चलाया गया था, जिनके बारे में पार्टी ने कभी सोचा भी नहीं था।

पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के बाद चुनाव आयोग अब अचानक यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय अभियान शुरू करना चाहता है कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। चुनाव से पहले यह सक्रियता कहाँ थी? बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया इतनी जल्दबाजी और बिना योजना के क्यों कराई गई?'

पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग

टीएमसी ने आगे कहा कि इस अभियान को शुरू करने की घोषणा का समय पूरी प्रक्रिया की ईमानदारी, निष्पक्षता और तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पार्टी के बयान में कहा गया, 'भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को इन विसंगतियों की व्याख्या करनी चाहिए और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए, न कि नागरिकों से बिना सवाल किए इस प्रक्रिया को स्वीकार करने की उम्मीद करनी चाहिए।'

बयान में यह भी कहा गया कि 'तार्किक विसंगतियों और खराब तरीके से किए गए एसआईआर के नाम पर ईसीआई ने लोगों का मतदान का अधिकार छीन लिया, ताकि एक अवैध सरकार को सत्ता में लाया जा सके।' पार्टी ने यह भी कहा, 'बंगाल में भाजपा की सरकार नहीं टिकेगी।' गौरतलब है कि ये तमाम आरोप टीएमसी की ओर से लगाए गए हैं; भाजपा और निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सीईओ कार्यालय की मूल घोषणा

सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जानकारी दी थी कि राज्य के सभी 24 जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) मतदाता सूची से हटाए गए पात्र मतदाताओं तथा नए नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए सक्रिय अभियान शुरू कर चुके हैं। इसके तहत पूरे राज्य में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।

सीईओ कार्यालय ने नागरिकों को सलाह दी कि यदि उन्हें कोई शिकायत है तो वे बूथ लेवल अधिकारी (BLO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) या संबंधित DEO-सह-DM से संपर्क कर सकते हैं।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव-पश्चात राजनीतिक तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि एसआईआर अभियान के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की जाँच होनी चाहिए। टीएमसी का यह भी तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे के बिना किसी भी सरकार की वैधता प्रश्नों के घेरे में रहती है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों का जवाब किस तरह देता है और क्या सीईओ कार्यालय का यह अभियान राजनीतिक विवाद से परे जाकर व्यापक जनता तक पहुँच पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका समय भी उतना ही राजनीतिक है — पार्टी विधानसभा में सत्ता खोने के बाद चुनावी वैधता को ही चुनौती दे रही है, जो लोकतंत्र में एक संवेदनशील रेखा है। असली सवाल यह है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट क्यों नहीं हुआ। निर्वाचन आयोग यदि सच में पारदर्शी है, तो उसे जिलावार आँकड़े सार्वजनिक करने चाहिए — कितने नाम हटे, किस आधार पर, और कितने बहाल हुए। बिना इस जवाबदेही के, देर से शुरू किया गया नामांकन अभियान राजनीतिक विवाद को और गहरा करेगा, सुलझाएगा नहीं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी ने बंगाल के सीईओ कार्यालय की घोषणा पर सवाल क्यों उठाए?
टीएमसी का आरोप है कि चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और अब चुनाव बाद अचानक नामांकन अभियान शुरू किया जा रहा है, जो प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। पार्टी इसे एसआईआर अभियान की विफलता की अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति मानती है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की जाती है — इसमें अपात्र या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं। टीएमसी का आरोप है कि बंगाल में यह प्रक्रिया जल्दबाजी में और पक्षपातपूर्ण तरीके से की गई।
पश्चिम बंगाल सीईओ कार्यालय का नया अभियान क्या है?
सोमवार को सीईओ कार्यालय ने घोषणा की कि राज्य के सभी 24 जिलों में विशेष शिविर लगाकर मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों और पहली बार मतदान करने वालों के नाम दोबारा जोड़े जाएंगे। शिकायत के लिए बीएलओ, एईआरओ, ईआरओ या डीईओ-सह-डीएम से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
इस विवाद में निर्वाचन आयोग की भूमिका क्या है?
टीएमसी ने निर्वाचन आयोग (ECI) से मांग की है कि वह एसआईआर के दौरान हुई विसंगतियों की व्याख्या करे और जवाबदेही सुनिश्चित करे। आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या टीएमसी के आरोपों पर भाजपा ने कोई प्रतिक्रिया दी है?
खबर लिखे जाने तक भाजपा की ओर से टीएमसी के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह विवाद पश्चिम बंगाल में चुनाव-पश्चात राजनीतिक तनाव का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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