क्या सीईसी दिल्ली से निर्देश देने के बजाय बंगाल में आकर जमीनी हालात देखेंगे?: देबजीत सरकार
सारांश
Key Takeaways
- मुख्य चुनाव आयुक्त को जमीनी हालात देखने का सुझाव दिया गया है।
- भाजपा विधायक ने टीएमसी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- पश्चिम बंगाल में हिंसा की स्थिति चिंताजनक है।
कोलकाता, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच, भाजपा विधायक देबजीत सरकार ने शनिवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से बंगाल आकर जमीनी हकीकत देखने का आग्रह किया।
भाजपा विधायक ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पश्चिम बंगाल में आना चाहिए। प्रदेश में हिंसा के जो हालात हैं, उन्हें वहां जाकर देखना चाहिए। दिल्ली से केवल निर्देश जारी करने से कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि पश्चिम बंगाल में स्थिति बेकाबू हो चुकी है। यहाँ कानून व्यवस्था का कोई अवशेष नहीं है।"
उन्होंने टीएमसी सरकार पर हमला करते हुए कहा, "जब किसी प्राइवेट एजेंसी पर ईडी की कार्रवाई चल रही थी, तो उस समय मुख्यमंत्री के आदेश पर ईडी की फाइल और लैपटॉप को छीनकर ले जाया गया। जहां पर सत्ताधारी पार्टी का विधायक और राज्य का कैबिनेट मंत्री खुलेआम हिंदुओं के खिलाफ विद्रोह करने का आदेश दे रहे हैं, वहां क्या देखना बाकी रह गया है? ऐसे में ज्ञानेश कुमार और सुप्रीम कोर्ट का कोई प्रतिनिधि यहाँ आकर देखे।"
भाजपा विधायक ने टीएमसी महासचिव एवं लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की वर्चुअल मीटिंग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "उन्हें वर्चुअली मीटिंग बुलाने दीजिए। वे और भी ज्यादा वर्चुअली मीटिंग करें, क्योंकि जहां पर जो समस्या देखने को मिल रही है, टीएमसी के सदस्य खुद उन्हें चोर-चोर कहकर पुकारते हैं।"
उन्होंने टीएमसी में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ उठ रही आवाजों का दावा करते हुए कहा, "टीएमसी के लोग खुद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ हैं, जिसके कारण उन्हें वर्चुअली ही मीटिंग करनी पड़ रही है। वे शारीरिक रूप से मीटिंग में जाने के लायक नहीं हैं। इस विधानसभा चुनाव में बंगाल की जनता वास्तव में टीएमसी को हराएगी और भाजपा सरकार को सत्ता में लाएगी।"