क्या सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर रवाना हुए?
सारांश
Key Takeaways
- यूएई दौरा भारत-यूएई रक्षा संबंधों को मजबूत करेगा।
- जनरल द्विवेदी यूएई के सैन्य अधिकारियों से मिलेंगे।
- सैन्य-स्तरीय संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण पर चर्चा होगी।
- यह यात्रा क्षमता निर्माण में सहायक होगी।
- सामरिक संबंधों को और गहरा करेगी।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय थलसेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रविवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के आधिकारिक दौरे के लिए प्रस्थान किया है। यह यात्रा भारत और यूएई के बीच बढ़ते सामरिक एवं रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ करेगी।
यह यात्रा दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूती देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। थलसेना प्रमुख का यह दौरा आपसी समझ को गहरा करने, साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को विस्तारित करने पर केंद्रित है। यात्रा के दौरान जनरल द्विवेदी यूएई के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और रक्षा नेतृत्व से मुलाकात करेंगे, जिससे सैन्य-स्तरीय संवाद, संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की संभावना है।
भारतीय सेना के अनुसार, जनरल उपेंद्र द्विवेदी रविवार को यूएई के लिए रवाना हो गए हैं। वह 5 और 6 जनवरी को यूएई के सैन्य नेतृत्व और विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे। उल्लेखनीय है कि भारत और यूएई के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों की सेनाएं कई संयुक्त सैन्य अभ्यासों, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-निरोधक और सूचना साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर काम कर रही हैं। माना जा रहा है कि थलसेना प्रमुख की यह यात्रा इस साझेदारी को नई गति और दिशा प्रदान करेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह दौरा भारत-यूएई के बीच बढ़ते सामरिक संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है। सेनाध्यक्ष की यह यात्रा आने वाले समय में रक्षा सहयोग को और गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ध्यान देने योग्य है कि हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात की थलसेना के कमांडर मेजर जनरल यूसुफ मयूफ सईद अल हल्लामी ने भारत दौरा किया था। उनकी यह आधिकारिक यात्रा दोनों सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूती देने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई थी।
अपनी भारत यात्रा के दौरान मेजर जनरल अल हल्लामी ने भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की थी। तब दोनों सेनाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करने और नई संभावनाओं की खोज पर चर्चा हुई थी। बैठक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में विस्तृत जानकारी भी साझा की गई थी। साथ ही, उन्हें भारतीय सेना की डिजिटल क्षमता से भी अवगत कराया गया था।
इसके अलावा, हाल ही में करीब एक सप्ताह पूर्व भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास डेजर्ट साइक्लोन–2 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। यह सैन्य अभ्यास अबू धाबी स्थित अल-हमरा ट्रेनिंग सिटी में संपन्न हुआ। यूएई में प्रशिक्षण के दौरान दोनों सेनाओं ने शहरी युद्धक तकनीकों पर काम किया। इमारतों की मार्किंग और क्लीयरेंस, आईईडी अवेयरनेस और घायलों की निकासी का अभ्यास किया गया। इसके साथ ही, युद्ध में प्राथमिक उपचार देने और मिशन योजना पर भी गहन अभ्यास किया गया है।
दोनों देशों के सैनिकों ने संयुक्त अभ्यास के दौरान रूम इंटरवेंशन, बिल्डिंग क्लीयरेंस, हेलिबोर्न ऑपरेशंस और एयर असॉल्ट जैसी संयुक्त आक्रमण ड्रिल्स का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास 18 दिसंबर को अबू धाबी स्थित अल-हमरा में शुरू हुआ था। इस संयुक्त अभ्यास में कक्षा-आधारित प्रशिक्षण और मैदानी अभियानों का संतुलित मिश्रण शामिल था। अभ्यास का उद्देश्य शहरी परिस्थितियों में संचालन क्षमता, आपसी विश्वास, समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना था।
अभ्यास के अंतिम चरण में दोनों देशों के सैनिकों ने समेकित आक्रामक और रक्षात्मक शहरी अभियानों का प्रदर्शन किया। भारतीय सेना के अनुसार, ये अभियान दोनों सेनाओं की तालमेल युक्त कार्रवाई और संयुक्त परिचालन तत्परता को दर्शाते हैं।