गिरिजापति शिव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव: राज्यपाल केटी परनाइक ने की पूजा-अर्चना
सारांश
Key Takeaways
- गिरिजापति शिव मंदिर में 3 दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव।
- राज्यपाल केटी परनाइक ने पूजा अर्चना की।
- 25 फरवरी को नगर परिक्रमा का आयोजन।
- 28 फरवरी को लोकार्पण कार्यक्रम होगा।
- संस्कृति की सुरक्षा के लिए स्टडी एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना।
ईटानगर, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में स्थित गिरिजापति शिव मंदिर में तीन दिवसीय मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हो रहा है। मंगलवार को पहले दिन पुष्प अधिवेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (रिटायर्ड) और उनकी पत्नी अनघा परनाइक कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने यहां पूजा अर्चना की।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने बताया कि आज पहले दिन पुष्प अधिवेशन का कार्यक्रम था। आगामी 25 फरवरी को नगर परिक्रमा का आयोजन होगा, जिसमें मूर्तियों को जोड़ते हुए परिक्रमा निकाली जाएगी। इसके बाद तीसरे दिन, 26 फरवरी को मुख्य प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित होगा।
गुरुवार को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम दोपहर तीन बजे से शुरू होगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी शामिल होंगे। तत्पश्चात 28 तारीख को लोकार्पण कार्यक्रम होगा, जिसमें सभी लोग मूर्तियों के दर्शन कर सकेंगे। मुख्यमंत्री मूर्तियों का लोकार्पण करेंगे और इस अवसर पर कई अन्य मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। इंटरनेशनल विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
अध्यक्ष ने बताया कि गिरिजापति शिव मंदिर की स्थापना 2002 में हुई थी। इसके बाद 2022 में एक ट्रस्ट का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य हमारी संस्कृति को संरक्षित करना है।
संस्कृति की सुरक्षा के लिए हम यहां एक स्टडी एंड रिसर्च सेंटर भी स्थापित करेंगे, विशेष रूप से हमारे पुजारियों के लिए। हमारा धर्म और पुजारी सुरक्षित रहेंगे तभी हमारी संस्कृति सुरक्षित होगी।
उन्होंने बताया कि हमारे क्षेत्र में शिक्षा की कमी और जागरूकता की कमी के कारण लोग भटक रहे हैं। उन्हें सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां पुजारी अधिक शिक्षित नहीं होते हैं, लेकिन वे अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहते हैं। वे अपने बच्चों को बाहर पढ़ने के लिए भेज देते हैं, लेकिन वही बच्चे बाहर पढ़ाई के बाद भटक जाते हैं और दूसरे संस्कृतियों में फंस जाते हैं। ऐसे में उन पुजारियों की स्थिति बहुत खराब हो जाती है, जिन्होंने अपना जीवन पुजारी के रूप में बिताया और अंत में किसी और धर्म को अपनाना नहीं चाहते। हम उन पुजारियों के लिए ही यह व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि वे यहां रहकर अपनी संस्कृति में जीवन बिता सकें। हम उनकी सभी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए इसको तैयार कर रहे हैं।