क्या सेना प्रमुख का यूएई और श्रीलंका दौरा रक्षा सहयोग को नई मजबूती देगा?
सारांश
Key Takeaways
- यूएई और श्रीलंका के साथ रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली।
- जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने महत्वपूर्ण सैन्य नेतृत्व से संवाद किया।
- रक्षा शिक्षा और प्रशिक्षण में सहयोग को बढ़ावा दिया गया।
- श्रीलंका को सैन्य उपकरण प्रदान किए गए।
- भारत का एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में स्थान और मजबूत हुआ।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा की है। ये दौरे काफी महत्वपूर्ण और सफल रहे हैं। सेना प्रमुख 05 से 08 जनवरी तक यूएई और श्रीलंका की यात्रा पर थे।
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इन यात्राओं के माध्यम से भारत ने पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को और अधिक घनिष्ठता दी है। इसके अलावा, आर्मी टू आर्मी सहभागिता बढ़ाने पर चर्चा हुई। इन यात्राओं के माध्यम से रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ किया गया। यूएई प्रवास के दौरान जनरल द्विवेदी ने यूएई सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ व्यापक चर्चा की। इनमें यूएई थल सेना के कमांडर के साथ हुई बैठक प्रमुख रही।
इस द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को सशक्त करने, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने तथा संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। यहाँ यूएई में भारतीय सेना प्रमुख को यूएई थल सेना की संगठनात्मक संरचना, भूमिकाओं और परिचालन क्षमताओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने यूएई के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का दौरा किया और अधिकारियों एवं जवानों से संवाद किया। इन संवादों से सर्वोत्तम सैन्य प्रथाओं के आदान-प्रदान और सहयोग की संभावनाओं को तलाशने के अवसर मिले।
जनरल द्विवेदी ने यूएई नेशनल डिफेंस कॉलेज में अधिकारियों को संबोधित करते हुए रणनीतिक संवाद, नेतृत्व विकास और क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल से भी मुलाकात की, जहाँ रक्षा कूटनीति और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। 07 और 08 जनवरी को थल सेना प्रमुख श्रीलंका यात्रा पर रहे। यहाँ उन्होंने श्रीलंकाई सेना के कमांडर, उप रक्षा मंत्री और रक्षा सचिव से मुलाकात की।
जनरल द्विवेदी ने यहाँ वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व के अलावा नागरिक नेतृत्व के साथ भी सार्थक वार्ता की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन चर्चाओं का केंद्र ट्रेनिंग में सहयोग, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य रहा। जनरल द्विवेदी ने डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में अधिकारियों को भी संबोधित किया। उन्होंने आर्मी वॉर कॉलेज, बुट्टाला में अधिकारियों और प्रशिक्षुओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने आर्मी वॉर कॉलेज में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी और अधिकारियों को एंबुलेंस वैन सौंपी।
साथ ही, उन्होंने श्रीलंका सेना को 20 महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन और सिमुलेटर भी प्रदान किए। ये वाहन उनकी परिचालन क्षमता और प्रशिक्षण अवसंरचना को मजबूती प्रदान करेंगे। थल सेना प्रमुख ने श्रीलंका स्थित इंडियन पीस कीपिंग फोर्स मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने ऑपरेशन ‘पवन’ के दौरान शहीद हुए भारतीय सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस यात्रा ने यूएई और श्रीलंका दोनों के साथ रणनीतिक संवाद में वृद्धि, पेशेवर सैन्य शिक्षा के आदान-प्रदान का विस्तार और ठोस क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से रक्षा और सैन्य सहयोग को महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया है। इससे आपसी विश्वास मजबूत हुआ, इंटरऑपरेबिलिटी सुदृढ़ हुई और भारत की एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में भूमिका और स्पष्ट हुई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोगात्मक सुरक्षा को बढ़ावा देने के भारत के संकल्प को दोहराती है। साथ ही, मित्र राष्ट्रों के साथ लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और ऊंचाई प्रदान करती है।