नेपाल में बालेन शाह की ऐतिहासिक जीत: क्या कलाकार संभालेंगे कूटनीतिक संबंध?
सारांश
Key Takeaways
- बालेन शाह ने ५ मार्च को नेपाल में आम चुनाव में जीत हासिल की।
- उनकी पार्टी ने भी ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की।
- बालेन शाह की राजनीतिक छवि पर चर्चा हो रही है।
- सोशल मीडिया का उपयोग करके उन्होंने लोगों के साथ जुड़ा।
- भारत और चीन जैसे देशों के साथ संबंधों को संभालने की चुनौती।
नई दिल्ली, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में ५ मार्च को सम्पन्न आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह ने अद्वितीय जीत हासिल की है। इस जीत के साथ उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने भी ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। बालेन शाह की इस जीत के पश्चात उनकी नागरिकता, कलाकार, रैपर से लेकर राजनीतिक छवि पर भी चर्चा का माहौल बन गया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बालेन शाह के उपनाम को लेकर बहस तेज हो गई है। पहले, बालेन शाह की नागरिकता को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। २००६ तक उनके मूल नागरिकता प्रमाण पत्र में सरनेम 'साह' दर्ज था, जिसे बाद में 'शाह' में बदला गया।
इसके बाद गृह मंत्रालय में बालेन शाह के खिलाफ आरोप लगाया गया कि उन्होंने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना अपना सरनेम बदला, जो नागरिकता अधिनियम, २०६३ की धारा १२ और १७(२) के तहत एक अपराध हो सकता है।
बालेन शाह की इस जीत के साथ नेपाल की पारंपरिक राजनीति के अंत की चर्चा भी हो रही है। बालेन शाह एक रैपर रहे हैं और फिर उन्होंने राजनीति में कदम रखा। ऐसे में उनकी बहुआयामी प्रतिभा को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। एक ओर, अधिकांश लोग उन्हें एक प्रसिद्ध रैपर के रूप में जानते हैं, जबकि उनके समर्थक उनकी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की डिग्री और काठमांडू के मेयर के रूप में उनके डेटा-संचालित कार्यशैली को उनकी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं।
पारंपरिक राजनीतिक रास्ते को छोड़कर उन्होंने लोगों के साथ जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्हें जेन-जी के नेता कहा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने फेसबुक समेत अन्य सामाजिक प्लेटफार्मों पर लोगों से जुड़ना शुरू किया।
हालांकि उनके आलोचक उन्हें अहंकारी बताते हैं। मेयर रहते हुए, अवैध अतिक्रमण हटाने और रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई को मानवाधिकार समूहों ने आलोचना की है।
चुनाव में उनकी जीत के बाद यह भी चर्चा उठ रही है कि एक कलाकार, जिसके पास पारंपरिक कूटनीतिक अनुभव की कमी है, वह भारत और चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसियों के साथ नेपाल के संबंधों को कैसे संभालेंगे। उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स, जिनमें उन्होंने विदेशी शक्तियों की आलोचना की थी, अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।