30 अगस्त 2026
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भारत-उज्बेकिस्तान के बीच 11 MoU और 5 बड़ी घोषणाएँ, संबंध बने व्यापक रणनीतिक साझेदारी

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भारत-उज्बेकिस्तान के बीच 11 MoU और 5 बड़ी घोषणाएँ, संबंध बने व्यापक रणनीतिक साझेदारी

सारांश

PM मोदी के ताशकंद दौरे में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच 11 MoU और 5 बड़ी घोषणाएँ हुईं। सबसे बड़ी बात — दोनों देशों की साझेदारी अब 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में तब्दील हो गई है। अरल सागर वनरोपण से लेकर संस्कृत चेयर तक, यह दौरा मध्य एशिया में भारत की बहुआयामी कूटनीति का ताज़ा प्रमाण है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी के ताशकंद दौरे में 30 अगस्त 2026 को भारत-उज्बेकिस्तान के बीच 11 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए।
दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया गया।
अरल सागर क्षेत्र में वनरोपण के लिए भारत ने 10 लाख अमेरिकी डॉलर के अनुदान की घोषणा की।
लाल बहादुर शास्त्री हिंदी भाषा छात्रवृत्ति के तहत 100 छात्रवृत्तियाँ और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में आईसीसीआर संस्कृत चेयर की घोषणा हुई।
गुजरात राज्य और समरकंद क्षेत्र के बीच राज्य-स्तरीय साझेदारी समझौते पर मुहर लगी।
सांस्कृतिक, शैक्षिक, पर्यावरण, खनिज, पर्यटन और वित्त सहित 8 से अधिक क्षेत्रों में सहयोग के समझौते हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताशकंद दौरे के दौरान 30 अगस्त 2026 को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच 11 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए और 5 प्रमुख योजनाओं की घोषणा की गई। इस दो दिवसीय दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दोनों देशों के बीच मौजूदा रणनीतिक साझेदारी को अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी में तब्दील कर दिया गया है।

मुख्य समझौते और क्षेत्र

विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों देशों की सरकारों के बीच 2026-30 के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम के आदान-प्रदान पर सहमति बनी। उज्बेकिस्तान के टर्मेज में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थलों — फयाज टेपा और कारा टेपा — के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए भारत के विदेश मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत एजेंसी के बीच समझौता हुआ।

भारत के संस्कृति मंत्रालय व राष्ट्रीय अभिलेखागार और उज्बेकिस्तान के न्याय मंत्रालय की एजेंसी उजआर्काइव के बीच अभिलेखीय सहयोग पर MoU का आदान-प्रदान हुआ। इसके अतिरिक्त, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा, भूविज्ञान व खनिज संसाधन, तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में भी दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों के बीच समझौते संपन्न हुए।

शिक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था में सहयोग

भारत के विदेश मंत्रालय के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और उज्बेकिस्तान के विश्व अर्थव्यवस्था और कूटनीति विश्वविद्यालय की डिप्लोमैटिक अकादमी के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। आर्थिक और वित्तीय संवाद को संस्थागत रूप देने के लिए भारत के वित्त मंत्रालय और उज्बेकिस्तान के अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्रालय के बीच भी समझौता ज्ञापन हुआ।

उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग पर दोनों सरकारों के बीच MoU हुआ। पर्यटन क्षेत्र में 2026-28 के लिए भारत के पर्यटन मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की पर्यटन समिति के बीच साझेदारी कार्यक्रम पर सहमति बनी। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश पर्यटन क्षेत्र में अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयाँ देना चाहते हैं।

राज्य स्तरीय साझेदारी और 5 प्रमुख घोषणाएँ

भारत के गुजरात राज्य और उज्बेकिस्तान के समरकंद क्षेत्र के बीच साझेदारी संबंधों की स्थापना के लिए सहयोग समझौते पर मुहर लगी — यह राज्य-स्तरीय जुड़ाव का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।

पाँच प्रमुख घोषणाओं में शामिल हैं: भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत करना; अरल सागर क्षेत्र में वनरोपण के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर का अनुदान; लाल बहादुर शास्त्री हिंदी भाषा छात्रवृत्ति के तहत 100 छात्रवृत्तियाँ; और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में आईसीसीआर संस्कृत चेयर की स्थापना।

रणनीतिक महत्व

गौरतलब है कि मध्य एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के संदर्भ में यह दौरा विशेष महत्व रखता है। उज्बेकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सदस्य है और भारत के लिए मध्य एशियाई कनेक्टिविटी का एक प्रमुख द्वार है। सांस्कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक क्षेत्रों में एक साथ इतने समझौते यह दर्शाते हैं कि दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित न रखते हुए बहुआयामी बनाना चाहते हैं।

आगे की राह

व्यापक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के बाद अब दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद का एक नया ढाँचा तैयार होने की उम्मीद है। अरल सागर वनरोपण अनुदान और संस्कृत चेयर जैसी पहलें न केवल सांस्कृतिक निकटता को मज़बूत करेंगी, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति को भी नई दिशा देंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। मध्य एशिया में भारत ने पहले भी ऐसे समझौते किए हैं जो कागज़ों से ज़मीन तक आते-आते धीमे पड़ गए। अरल सागर अनुदान और संस्कृत चेयर जैसी सॉफ्ट पावर पहलें सराहनीय हैं, परंतु आर्थिक और वित्तीय संवाद के MoU तब तक अधूरे हैं जब तक व्यापार के ठोस लक्ष्य और समयसीमा सार्वजनिक न हों। गुजरात-समरकंद राज्य-स्तरीय जुड़ाव एक नई और स्वागतयोग्य प्रवृत्ति है — यदि इसे अन्य राज्यों तक विस्तारित किया जाए तो मध्य एशिया कनेक्टिविटी को नई गति मिल सकती है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी के ताशकंद दौरे में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच कितने और कौन-से समझौते हुए?
30 अगस्त 2026 को ताशकंद में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच 11 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बौद्ध विरासत संरक्षण, आयुर्वेद, भूविज्ञान, पर्यटन, उच्च शिक्षा, पर्यावरण, कूटनीतिक प्रशिक्षण और वित्तीय संवाद जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा रणनीतिक साझेदारी को एक उच्चतर स्तर पर ले जाया गया है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग सभी शामिल होते हैं। यह कदम मध्य एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक उपस्थिति को दर्शाता है।
अरल सागर वनरोपण के लिए भारत ने कितना अनुदान दिया?
भारत ने अरल सागर क्षेत्र में वनरोपण परियोजना के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर के अनुदान की घोषणा की है। यह पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत-उज्बेकिस्तान सहयोग का एक ठोस कदम है।
लाल बहादुर शास्त्री हिंदी भाषा छात्रवृत्ति क्या है और इससे कितने छात्रों को लाभ मिलेगा?
यह उज्बेकिस्तान के छात्रों के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित छात्रवृत्ति कार्यक्रम है जिसके तहत 100 छात्रवृत्तियाँ दी जाएंगी। इसका उद्देश्य हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति उज्बेकिस्तान में रुचि बढ़ाना है।
ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में आईसीसीआर संस्कृत चेयर क्यों महत्वपूर्ण है?
ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में आईसीसीआर (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) संस्कृत चेयर की स्थापना भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का हिस्सा है। यह मध्य एशिया में भारत की प्राचीन भाषा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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