30 अगस्त 2026
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वेलिगोंडा प्रोजेक्ट पर जगन का नायडू पर हमला: 'विजन और विकास वाईएसआर का, आप सिर्फ श्रेय चुरा रहे हैं'

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वेलिगोंडा प्रोजेक्ट पर जगन का नायडू पर हमला: 'विजन और विकास वाईएसआर का, आप सिर्फ श्रेय चुरा रहे हैं'

सारांश

वेलिगोंडा प्रोजेक्ट की श्रेय की लड़ाई आंध्र प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से भड़क उठी है। जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर विस्तृत आँकड़ों के साथ नायडू पर इतिहास बदलने का आरोप लगाया — और पूछा कि बिना किसी खास योगदान के पूरा श्रेय लेना क्या 'श्रेय हड़पने की राजनीति' नहीं है?

मुख्य बातें

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 30 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर CM चंद्रबाबू नायडू पर वेलिगोंडा प्रोजेक्ट का श्रेय हड़पने का आरोप लगाया।
जगन के अनुसार, 1996 में नायडू ने आधारशिला रखी और 8 साल सत्ता में रहते हुए केवल ₹10 लाख खर्च किए — वह भी समारोह पर।
37.587 किमी लंबी जुड़वां सुरंगों में से 20.333 किमी वाईएसआर काल में, 6.686 किमी नायडू के 2014-2019 कार्यकाल में और शेष 10.568 किमी जगन सरकार ने पूरा किया।
टनल-1 जनवरी 2021 और टनल-2 जनवरी 2024 में पूरी हुई; 6 मार्च 2024 को देश को समर्पित।
जगन ने विस्थापित परिवारों को पुनर्वास मुआवजा न मिलने और पेड्डाडोरनाला अस्पताल व मरकापुरम मेडिकल कॉलेज के काम रुकने पर भी नायडू सरकार को घेरा।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 30 अगस्त को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि नायडू वेलिगोंडा सिंचाई प्रोजेक्ट का श्रेय हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। जगन ने स्पष्ट कहा कि इस परियोजना का विजन और संपूर्ण विकास उनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) का था, और निर्णायक जुड़वां सुरंगों का निर्माण उनकी सरकार ने पूरा किया।

मुख्य आरोप और ऐतिहासिक विवाद

जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में नायडू को संबोधित करते हुए कहा, 'वेलिगोंडा का इतिहास बिल्कुल साफ है — सिर्फ आधारशिला आपने रखी थी। इस प्रोजेक्ट का विजन और इसका पूरा विकास वाईएसआर गारू का था।' उन्होंने आरोप लगाया कि 1996 में चुनावों से ठीक पहले नायडू ने जल्दबाजी में आधारशिला रखी और फिर परियोजना को छोड़ दिया।

जगन के अनुसार, नायडू 2004 तक आठ साल सत्ता में रहे, लेकिन इस दौरान प्रोजेक्ट पर केवल ₹10 लाख खर्च किए गए — और वह राशि भी केवल आधारशिला समारोह और जनसभा के इंतजामों पर।

जुड़वां सुरंगों का निर्माण: आँकड़ों का दावा

जगन ने विस्तृत आँकड़े पेश करते हुए कहा कि 37.587 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंगें इस प्रोजेक्ट की जीवन रेखा हैं। उनके दावे के अनुसार, 20.333 किलोमीटर का काम वाईएसआर के कार्यकाल में शुरू हुए निर्माण के दौरान पूरा हुआ, जबकि नायडू के 2014-2019 के कार्यकाल में केवल 6.686 किलोमीटर ही पूरा हो सका और एक भी सुरंग में 'ब्रेकथ्रू' हासिल नहीं हुआ।

जगन ने कहा कि कोरोना महामारी और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उनकी सरकार ने शेष 10.568 किलोमीटर का सबसे कठिन काम पूरा किया। टनल-1 जनवरी 2021 में और टनल-2 जनवरी 2024 में पूरी हुई, और 6 मार्च 2024 को दोनों सुरंगों को देश को समर्पित किया गया।

विस्थापित परिवारों का मुद्दा और स्वास्थ्य सेवाएँ

जगन ने नायडू सरकार पर विस्थापित परिवारों के पुनर्वास में विफलता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुरंगें 2024 में ही तैयार हो जाने के बावजूद नायडू सरकार 26 महीनों में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का काम पूरा नहीं कर पाई। उनके अनुसार, सैकड़ों परिवारों को पुनर्वास पैकेज का मुआवजा नहीं मिला है, फिर भी उन पर गाँव खाली करने का दबाव डाला जा रहा है और कथित तौर पर उनके गाँवों में बिजली व पेयजल आपूर्ति भी रोक दी गई है।

इसके साथ ही जगन ने पेड्डाडोरनाला में 131 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और मरकापुरम में सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण पर रोक लगाने को लेकर भी नायडू सरकार की आलोचना की।

नायडू को सीधी चुनौती

जगन ने अपनी पोस्ट में नायडू से सीधे कहा, 'दिखावे और प्रचार-प्रसार को छोड़िए। नल्लामाला सागर को भरिए। किसानों को सिंचाई के लिए पानी दीजिए। फ्लोराइड से प्रभावित इलाकों में पीने का साफ पानी पहुँचाइए।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नायडू और उनका 'येलो मीडिया' इस प्रोजेक्ट के इतिहास को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आंध्र प्रदेश में वेलिगोंडा प्रोजेक्ट को लेकर सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच श्रेय की राजनीति तेज हो गई है। गौरतलब है कि वेलिगोंडा परियोजना प्रकाशम जिले के सूखाग्रस्त और फ्लोरोसिस-प्रभावित क्षेत्रों के लाखों परिवारों के लिए सिंचाई और पेयजल का प्रमुख स्रोत बनने वाली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली जवाबदेही का सवाल — कि सुरंगें बन जाने के बाद भी पानी लोगों तक क्यों नहीं पहुँचा — अनुत्तरित है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेलिगोंडा प्रोजेक्ट क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
वेलिगोंडा प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश की एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है जो कृष्णा नदी के पानी को प्रकाशम जिले के सूखाग्रस्त और फ्लोरोसिस-प्रभावित इलाकों तक पहुँचाती है। इसकी 37.587 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंगें लाखों किसानों और पेयजल-वंचित परिवारों के लिए जीवन रेखा मानी जाती हैं।
जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू पर क्या आरोप लगाए?
जगन ने आरोप लगाया कि नायडू 1996 में केवल आधारशिला रखकर आठ साल सत्ता में रहे और प्रोजेक्ट पर महज ₹10 लाख खर्च किए। उनका कहना है कि परियोजना का असली विजन वाईएसआर का था और जुड़वां सुरंगों का निर्माण उनकी (जगन की) सरकार ने पूरा किया, इसलिए नायडू का पूरा श्रेय लेना 'इतिहास बदलने की कोशिश' है।
वेलिगोंडा की जुड़वां सुरंगें कब पूरी हुईं?
जगन के दावे के अनुसार, टनल-1 जनवरी 2021 में और टनल-2 जनवरी 2024 में पूरी हुई। 6 मार्च 2024 को दोनों सुरंगों को औपचारिक रूप से देश को समर्पित किया गया।
विस्थापित परिवारों को लेकर क्या शिकायतें हैं?
जगन के अनुसार, सैकड़ों विस्थापित परिवारों को पुनर्वास और पुनर्स्थापना पैकेज का पूरा मुआवजा नहीं मिला है, फिर भी उन पर गाँव खाली करने का दबाव डाला जा रहा है। कथित तौर पर उनके गाँवों में बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं और पेयजल आपूर्ति भी रोक दी गई है।
इस राजनीतिक विवाद का आम जनता पर क्या असर है?
यह विवाद ऐसे समय में है जब नल्लामाला सागर तक पानी अभी भी पूरी तरह नहीं पहुँचा है और फ्लोरोसिस-प्रभावित इलाकों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। श्रेय की राजनीति के बीच असली सवाल यह है कि परियोजना का लाभ लोगों तक कब और कैसे पहुँचेगा।
राष्ट्र प्रेस
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