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वेलिगोंडा परियोजना पर श्रेय विवाद: वाईएसआरसीपी का नायडू पर इतिहास बदलने का आरोप

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वेलिगोंडा परियोजना पर श्रेय विवाद: वाईएसआरसीपी का नायडू पर इतिहास बदलने का आरोप

सारांश

वाईएसआरसीपी ने आँकड़ों के साथ दावा किया कि वेलिगोंडा परियोजना की 82.2% सुरंग खुदाई वाईएसआर और जगन के कार्यकाल में हुई, जबकि नायडू की 2014-19 सरकार का हिस्सा महज 17.8% रहा। 6 मार्च 2024 को जगन ने दोनों सुरंगें राष्ट्र को समर्पित कीं — अब श्रेय की यह लड़ाई आंध्र की राजनीति में नई बहस छेड़ रही है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने 29 अगस्त को मार्कपुरम में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर पुला सुब्बैया वेलिगोंडा परियोजना का श्रेय लेने का आरोप लगाया।
परियोजना का लक्ष्य 4.47 लाख एकड़ सिंचाई और 30 मंडलों में 15.25 लाख लोगों को पेयजल।
कुल 37.587 किमी सुरंग में से 30.901 किमी (82.2%) वाईएसआर व जगन कार्यकाल में पूरी हुई; नायडू की 2014-19 सरकार में केवल 6.686 किमी (17.8%) ।
जगन मोहन रेड्डी ने 6 मार्च 2024 को दोनों सुरंगें राष्ट्र को समर्पित कीं।
वाईएसआरसीपी ने उद्घाटन से पहले टीगलेरू नहर पूरी करने और विस्थापितों के पुनर्वास की माँग रखी।

वाईएस राजशेखर रेड्डी और वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में पूरी हुई पुला सुब्बैया वेलिगोंडा परियोजना का श्रेय लेने को लेकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 29 अगस्त को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने मार्कपुरम में पत्रकारों के सामने आँकड़ों के साथ दावा किया कि नायडू सरकार इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रही है।

परियोजना का इतिहास और निर्माण चरण

वाईएसआरसीपी के अभियान विंग के प्रदेश अध्यक्ष काकुमानु राजशेखर ने पूर्व और वर्तमान विधायकों के साथ बताया कि नायडू ने 1996 में इस परियोजना की आधारशिला तो रखी, लेकिन अपने बाद के कार्यकालों में इसे सार्थक रूप से आगे बढ़ाने में विफल रहे। पार्टी के अनुसार, वाईएस राजशेखर रेड्डी ने अपने जलायज्ञम कार्यक्रम के तहत इस परियोजना को नया स्वरूप दिया, जिसमें दो सुरंगें, नल्लामाला सागर, तीन बांध, सहायक नहरें और प्रमुख नहरें शामिल थीं।

इस परियोजना का उद्देश्य 4.47 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई और 30 मंडलों में 15.25 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना है।

सुरंग खुदाई के आँकड़े — किसने कितना किया

वाईएसआरसीपी नेताओं ने विस्तृत आँकड़े प्रस्तुत किए। उनके अनुसार, वाईएसआर के कार्यकाल में शुरू हुए निर्माण चरण के दौरान 20.33 किलोमीटर सुरंग की खुदाई पूरी हो चुकी थी। इसके विपरीत, नायडू के 2014-19 के कार्यकाल में बार-बार समय सीमाएँ तय किए जाने के बावजूद केवल 6.686 किलोमीटर सुरंग की खुदाई हो पाई।

शेष 10.568 किलोमीटर की खुदाई जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में — कोविड-19 महामारी, तकनीकी चुनौतियों और टनल बोरिंग मशीनों से जुड़ी समस्याओं के बावजूद — पूरी की गई। सुरंग-1 में 2021 में और सुरंग-2 में 2024 में सफलता मिली। इसके बाद जगन मोहन रेड्डी ने 6 मार्च 2024 को दोनों सुरंगों को राष्ट्र को समर्पित किया।

वाईएसआरसीपी का प्रतिशत दावा

पार्टी के दावे के अनुसार, कुल 37.587 किलोमीटर सुरंग खुदाई में से 30.901 किलोमीटर यानी 82.2 प्रतिशत कार्य वाईएसआर द्वारा शुरू किए गए चरण और जगन के कार्यकाल के दौरान पूरा हुआ। नायडू की 2014-19 सरकार की हिस्सेदारी कथित तौर पर केवल 17.8 प्रतिशत रही।

माँगें और आगे की चुनौतियाँ

वाईएसआरसीपी नेताओं ने फीडर नहर की लाइनिंग और फिनिशिंग के कामों को इस तरह पेश करने पर आपत्ति जताई, जैसे पूरी परियोजना नए सिरे से शुरू की गई हो। उन्होंने उद्घाटन से पहले टीगलेरू नहर को पूरा करने और विस्थापित परिवारों के पूर्ण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की माँग भी रखी। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं को लेकर राजनीतिक श्रेय की लड़ाई तेज़ होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि नायडू के 1996 के शिलान्यास के बाद परियोजना में वास्तविक वित्तीय प्रतिबद्धता किसने और कब की। गौरतलब है कि टीगलेरू नहर अधूरी है और विस्थापित परिवारों का पुनर्वास लंबित है — ये दोनों मुद्दे किसी भी सरकार के लिए असुविधाजनक सवाल हैं।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुला सुब्बैया वेलिगोंडा परियोजना क्या है?
पुला सुब्बैया वेलिगोंडा परियोजना आंध्र प्रदेश की एक प्रमुख सिंचाई योजना है, जिसका उद्देश्य 4.47 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई और 30 मंडलों में 15.25 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना है। इसमें दो सुरंगें, नल्लामाला सागर, तीन बांध और प्रमुख नहरें शामिल हैं।
वाईएसआरसीपी ने नायडू पर क्या आरोप लगाए हैं?
वाईएसआरसीपी का आरोप है कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू वेलिगोंडा परियोजना का श्रेय ले रहे हैं, जबकि 82.2% सुरंग खुदाई वाईएसआर और जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में हुई। नायडू की 2014-19 सरकार में केवल 17.8% यानी 6.686 किलोमीटर खुदाई हुई।
वेलिगोंडा परियोजना की सुरंगें कब पूरी हुईं?
सुरंग-1 में 2021 में और सुरंग-2 में 2024 में सफलता मिली, दोनों जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में। इसके बाद 6 मार्च 2024 को जगन ने दोनों सुरंगों को राष्ट्र को समर्पित किया।
वाईएसआरसीपी की मौजूदा माँगें क्या हैं?
वाईएसआरसीपी ने उद्घाटन से पहले टीगलेरू नहर को पूरा करने और विस्थापित परिवारों के पूर्ण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की माँग की है। पार्टी का कहना है कि केवल फीडर नहर की लाइनिंग और फिनिशिंग को पूरी परियोजना की तरह पेश करना भ्रामक है।
जलायज्ञम कार्यक्रम का वेलिगोंडा परियोजना से क्या संबंध है?
वाईएसआरसीपी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी ने अपने जलायज्ञम कार्यक्रम के तहत वेलिगोंडा परियोजना को पुनर्रचित किया और निर्माण को नई गति दी। इसी चरण में 20.33 किलोमीटर सुरंग की खुदाई पूरी हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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