क्या वाईएसआर कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू पर रायलसीमा के साथ 'विश्वासघात' का आरोप लगाया?

Click to start listening
क्या वाईएसआर कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू पर रायलसीमा के साथ 'विश्वासघात' का आरोप लगाया?

सारांश

वाईएसआर कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू पर रायलसीमा के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया है। इस विवाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री का भी नाम आया है। क्या यह मामला राजनीतिक लाभ के लिए खेला गया एक बड़ा खेल है? जानें इस मुद्दे की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • वाईएसआर कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • रेवंत रेड्डी का बयान इस विवाद को और गर्म कर सकता है।
  • जल संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
  • रायलसीमा के विकास के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए।
  • इस मामले का असर रायलसीमा के लोगों पर पड़ेगा।

अमरावती, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने रविवार को चंद्रबाबू नायडू पर निजी और राजनीतिक लाभ के लिए रायलसीमा को 'धोखा' देने का आरोप लगाया। इससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा था कि उनके आंध्र प्रदेश के समकक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू पर दबाव डालने के कारण उन्होंने रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर काम रोक दिया था।

विपक्षी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि चंद्रबाबू नायडू ने रायलसीमा प्रोजेक्ट को रोकने के लिए रेवंत रेड्डी के साथ साठगांठ की।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के नेताओं साके शैलजानाथ, पूर्व विधायक वी. विश्वेश्वर रेड्डी और एसवी मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू द्वारा रायलसीमा के साथ कथित 'धोखे' की कड़ी निंदा की।

तेलंगाना विधानसभा में रेवंत रेड्डी द्वारा दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए, वाईएसआरसीपी नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नायडू का 'रायलसीमा का मुखौटा' पूरी तरह उतर गया है।

उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी के खुले बयान और सर्वदलीय जांच के लिए उनकी तत्परता ने एक अपवित्र गठबंधन को उजागर किया, जिसके कारण रायलसीमा की पीने के पानी और सिंचाई की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट रुक गया।

इस कदम को रायलसीमा के लिए 'मौत का फरमान' बताते हुए, शैलजानाथ और विश्वेश्वर रेड्डी ने मांग की कि चंद्रबाबू नायडू बताएं कि किन निजी स्वार्थों ने उन्हें सूखे से प्रभावित क्षेत्र के भविष्य को गिरवी रखने के लिए मजबूर किया। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री ने तेलंगाना के ऊपरी इलाकों के प्रोजेक्ट्स और श्रीशैलम से बार-बार पानी मोड़ने पर चुप्पी क्यों साधी, और आंध्र प्रदेश वैधानिक मंचों के सामने अपने अधिकारों की रक्षा करने में विफल क्यों रहे।

नेताओं ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के तहत, रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई प्रोजेक्ट लगभग 3,850 करोड़ रुपए के बजट के साथ शुरू किया गया था ताकि मुख्य रूप से पीने के पानी के लिए पोथिरेड्डीपाडु हेड रेगुलेटर के माध्यम से आवंटित पानी का पूरी तरह से उपयोग किया जा सके।

पर्यावरण निकायों के सामने शुरुआती बाधाओं के बावजूद, प्रोजेक्ट को जनहित में आगे बढ़ाया गया, लेकिन बाद में गठबंधन सरकार ने इसे छोड़ दिया, जबकि तेलंगाना ने जुर्माने के बावजूद पालमुरु-रंगारेड्डी और दिंडी जैसे प्रोजेक्ट्स जारी रखे।

उन्होंने चेतावनी दी कि कर्नाटक द्वारा अल्माटी बांध की ऊंचाई फिर से बढ़ाने और आंध्र प्रदेश की निष्क्रियता के कारण, हांड्री-नीवा और गालेरू-नागरी जैसे प्रोजेक्ट्स पंगु हो जाएंगे, जिससे रायलसीमा और भी गहरे संकट में डूब जाएगा।

Point of View

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक महत्वपूर्ण है रायलसीमा के विकास और जल संसाधनों का संरक्षण। यह आवश्यक है कि सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर काम करें ताकि क्षेत्र के लोगों की जरूरतों का ध्यान रखा जा सके।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

वाईएसआर कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू पर क्या आरोप लगाया?
वाईएसआर कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू पर रायलसीमा के साथ धोखा देने का आरोप लगाया।
रेवंत रेड्डी का इस मामले में क्या कहना है?
रेवंत रेड्डी ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू के दबाव के कारण रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर काम रुका।
रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना का बजट कितना था?
इस परियोजना का बजट लगभग 3,850 करोड़ रुपए था।
क्या यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है?
कुछ नेताओं का मानना है कि यह राजनीतिक लाभ के लिए खेला गया एक बड़ा खेल है।
इस विवाद का प्रभाव रायलसीमा पर क्या होगा?
इस विवाद के कारण रायलसीमा की जल आपूर्ति और सिंचाई परियोजनाएँ संकट में पड़ सकती हैं।
Nation Press