रंगभरी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग: भद्रा व राहुकाल की जानकारी

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रंगभरी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग: भद्रा व राहुकाल की जानकारी

सारांश

रंगभरी एकादशी, जो 27 फरवरी को है, इस दिन विशेष योग और मुहूर्त प्रकट होते हैं। जानिए इस दिन के महत्व और पूजा विधियों के बारे में।

Key Takeaways

  • रंगभरी एकादशी का व्रत भक्ति भाव से करें।
  • आंवले की पूजा फलदायी होती है।
  • सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का लाभ उठाएं।
  • अशुभ समय का ध्यान रखें।
  • भक्तों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को है। इस एकादशी को आमलकी या रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। नारायण के साथ ही महादेव से भी इस दिन का विशेष संबंध है।

मान्यता है कि आमलकी एकादशी का व्रत भक्ति भाव से करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आंवले के वृक्ष में नारायण का निवास होता है, इसलिए इस दिन आंवले की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं। शिवनगरी काशी सहित देश के कई हिस्सों में रंगभरी एकादशी के अवसर पर होली का उत्सव प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ पहली बार काशी की यात्रा की थी। माता पार्वती का गौना भी इसी दिन हुआ था।

दृक पंचांग के अनुसार, 27 फरवरी को एकादशी तिथि रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी प्रारंभ होगी। आर्द्रा नक्षत्र सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा। योग आयुष्मान शाम 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। करण वणिज सुबह 11 बजकर 31 मिनट तक और उसके बाद विष्टि करण रहेगा।

इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिनमें सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10 बजकर 48 मिनट से अगले दिन 27 फरवरी की सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक, और रवि योग सुबह 6 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। शुक्रवार को सूर्योदय 6 बजकर 48 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 20 मिनट पर होगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 9 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 15 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 17 मिनट से 6 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को राहुकाल सुबह 11 बजकर 8 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक, यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 27 मिनट से 4 बजकर 53 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 8 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 41 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 9 बजकर 7 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही भद्रा दोपहर 11 बजकर 31 मिनट से रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी।

Point of View

जो भक्तों को आस्था और श्रद्धा के साथ जोड़ता है। इस दिन के विशेष योग और शुभ मुहूर्त भक्तों को अपने जीवन में सकारात्मकता लाने का अवसर प्रदान करते हैं।
NationPress
26/02/2026

Frequently Asked Questions

रंगभरी एकादशी का महत्व क्या है?
रंगभरी एकादशी का व्रत भक्ति भाव से करने से सभी पाप समाप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है।
इस दिन कौन-कौन से योग बनते हैं?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बनते हैं, जो पूजा के लिए अत्यंत शुभ होते हैं।
राहुकाल का समय क्या है?
राहुकाल शुक्रवार को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
भद्रा का समय क्या है?
भद्रा दोपहर 11 बजकर 31 मिनट से रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी।
रंगभरी एकादशी पर क्या करना चाहिए?
इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
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