29 अगस्त 2026
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बलिया बाढ़: योगी सरकार दे रही 50 किलो राहत किट, सीएम बोले — सपा राज में 500 ग्राम भी नहीं पहुँचती थी

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बलिया बाढ़: योगी सरकार दे रही 50 किलो राहत किट, सीएम बोले — सपा राज में 500 ग्राम भी नहीं पहुँचती थी

सारांश

बलिया में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुँचे सीएम योगी ने 50 किलो राहत किट बाँटी और सपा पर तीखा निशाना साधा। 26 जनपद, 1.71 लाख लोग प्रभावित — लेकिन सरकार का दावा है कि जनहानि न्यूनतम रही। घाघरा ड्रेजिंग से स्थायी समाधान का वादा भी किया।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त को बलिया में 1,500 बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री और चिकित्सकीय किट वितरित की।
प्रत्येक परिवार को करीब 50 किलो राहत सामग्री — आटा, चावल, दाल, आलू, तेल, टॉर्च, छतरी सहित — दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के 26 जनपद बाढ़ से प्रभावित; 1.71 लाख से अधिक लोग और 251 गाँव प्रभावित, 1,000 से अधिक लोग शरणालयों में।
सर्पदंश से मृत्यु पर ₹4 लाख और मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत किसान की मृत्यु पर ₹5 लाख की सहायता।
सपा सरकार में जेपीएआईसी पर ₹200 करोड़ की जगह ₹864 करोड़ खर्च हुए — योगी ने अखिलेश से माफी माँगने की माँग की।
घाघरा नदी की ड्रेजिंग और बोल्डर ठोकर से बलिया में बाढ़ के स्थायी समाधान का निर्देश जल शक्ति मंत्री को दिया गया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त को बलिया में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुँचकर घोषणा की कि राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार को करीब 50 किलो राहत सामग्री का पैकेट उपलब्ध करा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के कार्यकाल में 500 ग्राम राहत सामग्री भी जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच पाती थी, क्योंकि पार्टी से जुड़े लोग गरीबों का हक हड़प लेते थे।

बाढ़ का व्यापक असर

अतिवृष्टि के कारण पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश के 26 जनपद बाढ़ की चपेट में आए हैं। 1.71 लाख से अधिक लोग और 251 गाँव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित शरणालयों में पहुँचाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले बारिश के मौसम में 36 से 40 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनती थी, जबकि इस बार प्रभावित जनपदों की संख्या 26 रही और जनहानि लगभग न के बराबर रही।

राहत किट में क्या-क्या शामिल

मुख्यमंत्री ने राहत सामग्री का विस्तृत ब्यौरा दिया। प्रत्येक परिवार को दी जा रही किट में 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 2 किलो अरहर दाल, 2 किलो चना, 2 किलो भुना चना, 1 किलो चीनी, 10 किलो आलू, 1 किलो रिफाइंड तेल, 1 किलो नमक और अन्य मसाले शामिल हैं। इसके अलावा माचिस, मोमबत्ती, साबुन, सैनिटरी पैड, तौलिया, डेटॉल, डिस्पोजल बैग, ढाई किलो लाई, एक बाल्टी, एक मग, एक टॉर्च और एक छतरी भी प्रदान की जा रही है।

स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अलग से मेडिसिन किट दी जा रही है, जिसमें ओआरएस पाउडर, आवश्यक दवाएँ और क्लोरीन की गोलियाँ शामिल हैं। बाढ़ के दौरान सर्पदंश व रेबीज के बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और जिला अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम और एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

हवाई निरीक्षण और पीड़ितों से सीधा संवाद

मुख्यमंत्री ने शनिवार को बांसडीह, बलिया और बैरिया विधानसभा क्षेत्रों के बाढ़ प्रभावित गाँवों का हवाई निरीक्षण किया। इसके बाद वे 1,500 बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री और चिकित्सकीय किट वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने पीड़ितों से सीधे बातचीत कर उनका दुख साझा किया और आश्वस्त किया कि सरकार हर प्रभावित व्यक्ति के साथ खड़ी है।

आर्थिक सहायता और बीमा कवच

मुख्यमंत्री ने बताया कि सर्पदंश से मृत्यु पर ₹4 लाख की तत्काल सहायता दी जाती है — यह व्यवस्था 2017 से पहले उपलब्ध नहीं थी। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत किसान या बटाईदार की बाढ़ अथवा आकाशीय बिजली से मृत्यु पर ₹5 लाख की सहायता का प्रावधान है। बाढ़ में मकान या झोपड़ी नष्ट होने पर जमीन का पट्टा और प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास स्वीकृत किया जाता है। सभी मामलों में 24 घंटे के भीतर सहायता देने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

सपा पर निशाना और जेपीएआईसी विवाद

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सपा सरकार में राहत सामग्री पार्टी से जुड़े लोगों की जेब में चली जाती थी। उन्होंने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (JPAIC) का उदाहरण देते हुए कहा कि इस केंद्र की मूल लागत ₹200 करोड़ थी, लेकिन सपा सरकार ने उस पर ₹864 करोड़ खर्च किए और तब भी यह अधूरा रहा। उन्होंने कहा कि इस केंद्र की संचालन समिति में अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव और राजेंद्र चौधरी को शामिल कर इसे व्यक्तिगत संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। योगी ने अखिलेश यादव से जनता से माफी माँगने की माँग की।

बलिया में बाढ़ के स्थायी समाधान का वादा

मुख्यमंत्री ने घाघरा नदी को ड्रेजिंग के माध्यम से चैनलाइज करने की आवश्यकता बताई और कहा कि जल शक्ति मंत्री को स्थायी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ड्रेजिंग से निकलने वाली सिल्ट का उपयोग तटबंध सुदृढ़ीकरण में और जरूरी स्थानों पर बोल्डर से ठोकर निर्माण में किया जाएगा, ताकि नदी के कटान को रोका जा सके। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का चिह्नीकरण कर उनके लिए विशेष राहत और देखभाल की व्यवस्था भी की जा रही है। साथ ही पशुधन की सुरक्षा के लिए पशु टीकाकरण और चारे की व्यवस्था की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि यह सामग्री अंतिम छोर तक पहुँची या नहीं — इसका स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है। जेपीएआईसी और सपा पर हमला राहत कार्यक्रम की खबर को राजनीतिक मंच में बदल देता है, जो पीड़ितों की तात्कालिक जरूरतों से ध्यान भटका सकता है। घाघरा ड्रेजिंग का वादा नया नहीं है — बलिया दशकों से इसी समस्या से जूझ रहा है; बिना समयसीमा और बजट के यह घोषणा पिछले वादों की कतार में जुड़ने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार बाढ़ पीड़ितों को कितनी और कैसी राहत सामग्री दे रही है?
सरकार प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को करीब 50 किलो की राहत किट दे रही है, जिसमें आटा, चावल, दाल, चना, आलू, तेल, नमक, मसाले, साबुन, सैनिटरी पैड, टॉर्च और छतरी शामिल हैं। इसके अलावा ओआरएस पाउडर, दवाएँ और क्लोरीन गोलियों की अलग मेडिसिन किट भी दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में इस बार बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
अतिवृष्टि के कारण उत्तर प्रदेश के 26 जनपद बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें 1.71 लाख से अधिक लोग और 251 गाँव शामिल हैं। 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित शरणालयों में पहुँचाया गया है।
बाढ़ में मृत्यु या नुकसान पर सरकार क्या आर्थिक सहायता देती है?
सर्पदंश से मृत्यु पर ₹4 लाख की तत्काल सहायता दी जाती है, जो 2017 से पहले उपलब्ध नहीं थी। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत किसान या बटाईदार की बाढ़ या आकाशीय बिजली से मृत्यु पर ₹5 लाख की सहायता मिलती है। बाढ़ में मकान नष्ट होने पर जमीन का पट्टा और प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास स्वीकृत किया जाता है।
जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (JPAIC) विवाद क्या है?
सीएम योगी के अनुसार लखनऊ स्थित जेपीएआईसी की मूल लागत ₹200 करोड़ थी, लेकिन सपा सरकार ने उस पर ₹864 करोड़ खर्च किए और केंद्र फिर भी अधूरा रहा। योगी ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव, डिंपल यादव और अन्य सपा नेताओं को संचालन समिति में रखकर इसे व्यक्तिगत संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश हुई।
बलिया में बाढ़ की स्थायी समस्या के लिए सरकार क्या करने वाली है?
सीएम योगी ने जल शक्ति मंत्री को घाघरा नदी की ड्रेजिंग और बोल्डर ठोकर निर्माण के जरिए नदी कटान रोकने के निर्देश दिए हैं। ड्रेजिंग से निकली सिल्ट का उपयोग तटबंध मजबूत करने में किया जाएगा। हालाँकि इस योजना की समयसीमा और बजट का विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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