29 अगस्त 2026
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राष्ट्रीय खेल दिवस: राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शिमला में अनुभवी खिलाड़ियों से की पहली बैठक, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर मांगे सुझाव

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राष्ट्रीय खेल दिवस: राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शिमला में अनुभवी खिलाड़ियों से की पहली बैठक, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर मांगे सुझाव

सारांश

राष्ट्रीय खेल दिवस पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने शिमला में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ पहली सीधी बातचीत की — खेल मैदानों की कमी, ऊँचाई वाले प्रशिक्षण केंद्रों के अधूरे उपयोग और युवाओं को नशे से दूर रखने जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। खेल सामग्री के लिए ₹1 लाख की घोषणा भी हुई।

मुख्य बातें

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने 29 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय खेल दिवस पर शिमला के लोक भवन में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ पहली बार बातचीत की।
खिलाड़ियों ने शिमला सहित राज्य में खेल मैदानों और सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया; स्कूल समय के बाद मैदान उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
अधिक ऊँचाई वाले प्रशिक्षण केंद्रों का पूरा उपयोग न होने पर चिंता; राज्यपाल ने सुझावों पर गंभीर विचार का आश्वासन दिया।
राज्यपाल ने युवाओं को नशे और निष्क्रिय जीवनशैली से दूर रखने में खेल की भूमिका पर बल दिया।
खेल गतिविधियों के प्रोत्साहन के लिए ₹1 लाख की खेल सामग्री देने की घोषणा की गई।
अनुभवी खिलाड़ियों से खेल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए सुझावों का पूरा सेट सौंपने का आग्रह।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने 29 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर शिमला के लोक भवन में राज्य के अनुभवी खिलाड़ियों के साथ पहली बार सीधी बातचीत की। इस संवाद में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के खेल इकोसिस्टम की चुनौतियों को समझना और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने के लिए ठोस सुझाव जुटाना था।

बैठक में उठे मुख्य मुद्दे

अनुभवी खिलाड़ियों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में खेल के मैदानों और सुविधाओं की कमी को प्रमुख समस्या बताया। उन्होंने विशेष रूप से शिमला में भौगोलिक कारणों से खेल मैदानों की कमी का उल्लेख किया और सुझाव दिया कि स्कूल समय के बाद बच्चों के लिए स्कूल के मैदान उपलब्ध कराए जाएं। इसके अलावा, हॉकी, एथलेटिक्स और वॉलीबॉल जैसे पारंपरिक खेलों को और मजबूत करने की माँग भी रखी गई।

ऊँचाई वाले प्रशिक्षण केंद्रों का पूरा उपयोग नहीं

खिलाड़ियों ने अधिक ऊँचाई वाले इलाकों में स्थित प्रशिक्षण सुविधाओं का पूरी तरह उपयोग न होने पर चिंता जताई। उन्होंने तर्क दिया कि ये केंद्र एथलीटों के लिए विशेष लाभकारी हो सकते हैं और इन्हें पूरी क्षमता से चालू किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

युवाओं को नशे से दूर रखने में खेल की भूमिका

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने युवाओं में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और निष्क्रिय जीवनशैली के बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को शारीरिक रूप से सक्रिय और मानसिक रूप से अनुशासित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। साथ ही उन्होंने युवाओं में नशीली दवाओं के बढ़ते उपयोग को गंभीर चुनौती बताते हुए खेल को इससे बचाव का सशक्त जरिया करार दिया।

महिला खिलाड़ियों की भागीदारी पर जोर

राज्यपाल ने खेलों में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मैरी कॉम, पीवी सिंधु और सानिया मिर्जा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने पूरे देश को प्रेरित किया है। हिमाचल प्रदेश की सुषमा वर्मा, हरलीन देओल और रेणुका सिंह ठाकुर को राज्य की बेटियों के लिए प्रेरणादायक मिसाल बताया। उन्होंने कहा, 'हमें यह पक्का करना होगा कि हमारी लड़कियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए बराबर मौके, प्रोत्साहन और सहयोग मिले।'

खेल सामग्री के लिए ₹1 लाख की घोषणा और आगे की राह

बैठक के समापन पर राज्यपाल ने खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए खेल सामग्री हेतु ₹1 लाख देने की घोषणा की। उन्होंने अनुभवी खिलाड़ियों से खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण सुविधाओं और जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने के लिए सुझावों का पूरा सेट सौंपने का आग्रह किया। राज्यपाल ने 'चांसलर की इंटर-यूनिवर्सिटी विकसित भारत-2047 टास्क फोर्स' की अपनी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल, शिक्षा और युवाओं की भागीदारी को साथ-साथ आगे बढ़ाना एक मजबूत भारत के निर्माण के लिए अनिवार्य है। उन्होंने अनुभवी खिलाड़ियों से मेंटर की भूमिका निभाने और युवा प्रतिभाओं का मार्गदर्शन करने का आह्वान किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि सुझावों का क्रियान्वयन कब और कैसे होगा। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक विशिष्टता — जो एक ओर उच्च-ऊँचाई प्रशिक्षण का लाभ देती है, दूसरी ओर मैदानों की कमी की समस्या खड़ी करती है — के लिए महज परामर्श बैठकें पर्याप्त नहीं हैं। ₹1 लाख की खेल सामग्री की घोषणा प्रतीकात्मक है; जमीनी बदलाव के लिए बजटीय प्रतिबद्धता और जवाबदेही तंत्र की जरूरत है। खेल को युवाओं की नशे से मुक्ति का माध्यम बताना सही दिशा है, लेकिन इसके लिए ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक ठोस बुनियादी ढाँचा पहुँचाना अनिवार्य शर्त है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय खेल दिवस पर शिमला में आयोजित बैठक का उद्देश्य क्या था?
29 अगस्त 2026 को शिमला के लोक भवन में राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ पहली बार बातचीत की, जिसका उद्देश्य राज्य के खेल इकोसिस्टम की चुनौतियाँ समझना और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए सुझाव जुटाना था।
हिमाचल प्रदेश में खेल सुविधाओं को लेकर खिलाड़ियों ने क्या मुद्दे उठाए?
अनुभवी खिलाड़ियों ने शिमला सहित राज्य के कई हिस्सों में खेल मैदानों की कमी, ऊँचाई वाले प्रशिक्षण केंद्रों का पूरा उपयोग न होना और हॉकी, एथलेटिक्स व वॉलीबॉल जैसे पारंपरिक खेलों को और संसाधन देने की माँग उठाई।
राज्यपाल ने खेल सामग्री के लिए कितनी राशि की घोषणा की?
राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बैठक में खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए खेल सामग्री हेतु ₹1 लाख देने की घोषणा की।
हिमाचल प्रदेश की किन महिला खिलाड़ियों का राज्यपाल ने उल्लेख किया?
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश की सुषमा वर्मा, हरलीन देओल और रेणुका सिंह ठाकुर को राज्य की बेटियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बताया और महिला खिलाड़ियों को बराबर मौके देने पर जोर दिया।
चांसलर की इंटर-यूनिवर्सिटी विकसित भारत-2047 टास्क फोर्स क्या है?
यह राज्यपाल कविंदर गुप्ता की एक हालिया पहल है, जिसके तहत राज्य के विश्वविद्यालयों के युवाओं को राष्ट्र-निर्माण के व्यापक विजन में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्यपाल ने इसे खेल, शिक्षा और इनोवेशन के साथ जोड़कर देखने की बात कही।
राष्ट्र प्रेस
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