वेलिगोंडा परियोजना विवाद: वाईएसआरसीपी का नायडू पर श्रेय हड़पने का आरोप, 85% काम YSR-जगन ने किया
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 28 अगस्त 2026 को अमरावती में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पूला सुब्बैया वेलिगोंडा परियोजना का श्रेय हड़पने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इस परियोजना का 85 प्रतिशत से अधिक कार्य वाईएस राजशेखर रेड्डी और वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में पूरा हुआ। पार्टी ने दावा किया कि नायडू का इस परियोजना में योगदान नगण्य रहा है।
मुख्य आरोप और ऐतिहासिक तथ्य
वाईएसआरसीपी एससी सेल के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक टीजेआर सुधाकर बाबू ने ताडेपल्ली स्थित वाईएसआरसीपी केंद्रीय कार्यालय में कहा कि नायडू ने 5 मार्च 1996 को परियोजना की आधारशिला तो रखी, परंतु 2004 तक व्यावहारिक रूप से कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वाईएसआर ने अपने जलायज्ञम अभियान के तहत परियोजना को पुनर्जीवित किया — दूसरी सुरंग का निर्माण शुरू किया, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराई और नल्लामाला सागर बांध सहित प्रमुख घटकों का विकास किया।
सुधाकर बाबू के अनुसार, 2004 से 2014 के बीच 20.33 किमी की सुरंग निर्माण पूरा हुआ — जिसमें सुरंग-1 की 11.58 किमी और सुरंग-2 की 8.74 किमी शामिल हैं। इसके विपरीत, चंद्रबाबू के 2014-19 कार्यकाल में केवल लगभग 6.6 किमी की खुदाई हो सकी।
सुरंग निर्माण की गति: आँकड़े क्या कहते हैं
वाईएसआरसीपी ने निर्माण गति के आँकड़े प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में सुरंग-1 की प्रगति 4.12 मीटर प्रति दिन रही, जबकि नायडू के कार्यकाल में यह केवल 2.41 मीटर प्रति दिन थी। सुरंग-2 में यह अंतर और अधिक स्पष्ट रहा — जगन काल में 7.27 मीटर प्रति दिन बनाम नायडू काल में 1.31 मीटर प्रति दिन। पार्टी के अनुसार, जगन मोहन रेड्डी ने 6 मार्च 2024 को दोनों सुरंगों को राष्ट्र को समर्पित किया था।
परियोजना का महत्व और विस्थापितों का मुद्दा
वेलिगोंडा परियोजना का उद्देश्य प्रकाशम, नेल्लोर और वाईएसआर कडप्पा जिलों के 30 मंडलों में 4.47 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई करना और 15.25 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना है। सुधाकर बाबू ने माँग की कि 758 पात्र विस्थापित परिवारों को तत्काल ₹112 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने नायडू को चुनौती दी कि वे येर्रागोंडापलेम, मार्कपुरम, गिद्दालूर, कनिगिरी और दरसी क्षेत्रों में वेलिगोंडा को एकमात्र जनमत संग्रह का मुद्दा बनाएं।
गठबंधन सरकार पर कर्ज और भ्रष्टाचार के आरोप
एक अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाईएसआरसीपी प्रवक्ता करुमुरी वेंकट रेड्डी ने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार के 26 महीनों में कल्याण और विकास कार्य ठप्प पड़ गए हैं। उनके अनुसार, सरकार ने जनता पर ₹3.86 लाख करोड़ का कर्ज लाद दिया है — जो औसतन ₹14,859 करोड़ प्रति माह, ₹495 करोड़ प्रति दिन और ₹20.68 करोड़ प्रति घंटे के बराबर है।
वेंकट रेड्डी ने कहा कि गठबंधन सरकार ने बजट में लगभग ₹2.18 लाख करोड़ का कर्ज लिया है — जिसमें ₹1.20 लाख करोड़ निगमों के माध्यम से और ₹47,000 करोड़ अमरावती परियोजना के नाम पर शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि यह राशि पिछली पाँच वर्षीय वाईएसआरसीपी सरकार के ₹3.31 लाख करोड़ के कुल कर्ज को मात्र दो वर्षों में ही पार कर गई है। इसके बावजूद आदाबिद्दा निधि, बेरोजगारी भत्ता और अन्य घोषित योजनाओं के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं है, यह आरोप भी लगाया गया।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब आंध्र प्रदेश में वेलिगोंडा परियोजना के पुनः उद्घाटन की तैयारियाँ चल रही हैं। वाईएसआरसीपी का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि सिंचाई परियोजनाओं का राजनीतिक श्रेय आगामी चुनावी बहस का केंद्र बन सकता है। विस्थापित परिवारों के मुआवजे और परियोजना के वास्तविक लाभार्थियों का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है।