नीरज चोपड़ा एशियन गेम्स 2026 से बाहर, टखने की चोट से सीजन खत्म; रोहित यादव पर टिकीं भारत की उम्मीदें
सारांश
मुख्य बातें
जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा टखने की चोट के कारण शेष सीजन से बाहर हो गए हैं, जिससे 20वें एशियन गेम्स 2026 में भारत को बड़ा झटका लगा है। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ से पहले दो बार के ओलंपिक पदक विजेता की अनुपस्थिति ने भारतीय एथलेटिक्स शिविर को हिलाकर रख दिया है। अब भारत की जैवलिन पदक उम्मीदें रोहित यादव के कंधों पर आ टिकी हैं।
चोट का सिलसिला और सीजन की चुनौतियाँ
2026 का सीजन चोपड़ा के लिए शुरू से ही संघर्षपूर्ण रहा। पिछले साल सितंबर से पीठ के निचले हिस्से की चोट ने उनकी वापसी को जून 2026 तक टाल दिया था। इसके बावजूद उन्होंने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 85.83 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता और लुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर की दूरी तय करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।
अब टखने की ताज़ा चोट ने उनके बाकी सीजन पर पूर्णविराम लगा दिया है। इसके चलते वह 5 सितंबर को ब्रुसेल्स में होने वाले डायमंड लीग फाइनल, 11 से 13 सितंबर के बीच होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप और एशियन गेम्स — तीनों बड़े आयोजनों से चूक जाएंगे।
रोहित यादव: भारत की नई उम्मीद
नीरज की अनुपस्थिति में पुरुष जैवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद उत्तर प्रदेश के जौनपुर के अदारी-डभिया गाँव के रोहित यादव पर टिकी है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 81.56 मीटर के थ्रो के साथ वह सातवें स्थान पर रहे, लेकिन उनका असली दमखम भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स सिल्वर लेवल कॉन्टिनेंटल टूर इवेंट में दिखा, जहाँ उन्होंने 87.68 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता।
गौरतलब है कि रोहित 87 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंक चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जैवलिन में नीरज के बाद दूसरी पंक्ति को मज़बूत करने की ज़रूरत महसूस की जा रही थी।
दबाव और अपेक्षाओं का संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि रोहित पर नीरज चोपड़ा की जगह भरने का दबाव डालना उचित नहीं होगा। नीरज का स्तर और उनकी उपलब्धियाँ अपनी श्रेणी में हैं — दो ओलंपिक पदक और लगातार 88+ मीटर के थ्रो उनकी विशिष्टता को रेखांकित करते हैं। रोहित के लिए यह आयोजन अपनी पहचान स्वतंत्र रूप से स्थापित करने का अवसर है।
रोहित की सबसे बड़ी ताकत बड़े मंच पर उनका अनुभव और मानसिक दृढ़ता है। क्वालिफिकेशन के बाद फाइनल में अपनी लय बनाए रखना उनके लिए निर्णायक साबित होगा। यदि वह अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 87.68 मीटर के आसपास या उससे बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो एशियन गेम्स की पदक दौड़ में उनकी दावेदारी पुख्ता मानी जाएगी।
भारतीय जैवलिन का भविष्य
नीरज की चोट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि भारतीय एथलेटिक्स में गहराई कितनी है। रोहित यादव के पास आइची-नागोया में न केवल पदक जीतने, बल्कि भारतीय जैवलिन में अपनी स्थायी जगह पक्की करने का सुनहरा मौका है। एशियन गेम्स 2026 उनके करियर का एक निर्णायक पड़ाव बन सकता है।