नीरज चोपड़ा का 79.61 मीटर थ्रो, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 जैवलिन फाइनल में तीनों भारतीय
सारांश
मुख्य बातें
नीरज चोपड़ा ने 30 जुलाई 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष जैवलिन थ्रो स्पर्धा के क्वालीफाइंग राउंड में 79.61 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंककर फाइनल में प्रवेश किया। उनके साथ रोहित यादव (78.37 मीटर) और यशवीर सिंह (78.36 मीटर) ने भी ग्रुप-ए में शीर्ष-10 में जगह बनाते हुए 31 जुलाई के मेडल इवेंट का टिकट हासिल किया।
मुश्किल हालात में क्वालीफिकेशन
ग्लासगो में गुरुवार को ठंड और तेज़ पार्श्व हवाओं ने जैवलिन थ्रोअर्स की मुश्किलें बढ़ा दीं। चोपड़ा ने बताया कि हवा का रुख अनिश्चित था — कभी सामने से, कभी साइड से — जिससे रिलीज का सटीक अंदाज़ा लगाना लगभग असंभव हो गया। नतीजतन, क्वालीफाइंग राउंड में कोई भी प्रतियोगी ऑटोमैटिक क्वालिफाइंग स्टैंडर्ड तक नहीं पहुँच सका।
चोपड़ा ने कहा, "वहाँ सच में बहुत ठंड थी और हवा भी चल रही थी, लेकिन 79 मीटर का थ्रो ठीक-ठाक था। मेरा मकसद फाइनल में पहुँचना और वहाँ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था, इसलिए मैं इस थ्रो से खुश हूँ।"
तीनों भारतीयों का फाइनल में पहुँचना
क्वालीफाइंग राउंड में पाँचवें स्थान पर रहे चोपड़ा ने माना कि परिस्थितियाँ सभी के लिए कठिन थीं। उन्होंने कहा, "हालात मुश्किल थे, लेकिन हमें खुशी है कि तीनों भारतीय फाइनल में हैं।" तीनों जैवलिन थ्रोअर्स के एक साथ फाइनल में पहुँचने से 31 जुलाई के मेडल मुकाबले में भारत के लिए एकाधिक पदक की उम्मीदें प्रबल हो गई हैं।
फाइनल की चुनौती और प्रतिस्पर्धा
चोपड़ा ने फाइनल को 'जबरदस्त मुकाबला' बताते हुए कहा कि इसमें दुनिया के कई बेहतरीन एथलीट और पेरिस ओलंपिक के साथी मेडलिस्ट शामिल हैं। उन्होंने कहा, "यह जैवलिन थ्रो जैसे इवेंट के लिए सच में एक बहुत अच्छा फाइनल होगा। उम्मीद है कि कल हालात ठीक रहेंगे। सभी अच्छी फॉर्म में दिख रहे हैं।"
चोपड़ा ने श्रीलंका के उभरते जैवलिन स्टार रुमेश की भी सराहना की और कहा कि यह युवा खिलाड़ी दक्षिण एशिया में इस खेल के बढ़ते स्तर का प्रमाण है। उन्होंने कहा, "वह इस खेल में नए हैं, लेकिन बहुत अच्छा थ्रो करते हैं। यह अच्छी बात है कि हमारे आस-पास के देशों में जैवलिन का खेल बढ़ रहा है।"
साउथ एशिया में जैवलिन की बढ़ती लोकप्रियता
ओलंपिक चैंपियन चोपड़ा का मानना है कि बेहतर कोचिंग संसाधन, इंटरनेट के ज़रिये जानकारी तक आसान पहुँच और बढ़ती जागरूकता ने दक्षिण एशिया में जैवलिन को नई ऊँचाई दी है। उन्होंने कहा, "अब साउथ एशिया में जैवलिन काफी लोकप्रिय हो गया है। बहुत सारे एथलीट जैवलिन की ट्रेनिंग कर रहे हैं।"
चोपड़ा ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक 2020 में उनके ऐतिहासिक स्वर्ण पदक ने इस खेल में रुचि की एक नई लहर पैदा की। उन्होंने कहा, "टोक्यो ओलंपिक में मेरे गोल्ड मेडल के बाद जैवलिन को बहुत बढ़ावा मिला। मुझे लगता है कि अब हमारे पास लगभग 20 ऐसे थ्रोअर हैं जो 80 मीटर से ज़्यादा दूर तक थ्रो कर सकते हैं — यह भारत के लिए बहुत अच्छी बात है।"
आगे क्या
31 जुलाई को होने वाले जैवलिन थ्रो फाइनल में नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह तीनों भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। चोपड़ा बेहतर मौसम की उम्मीद में हैं और उनका लक्ष्य फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना है।