CWG 2026 जैवलिन थ्रो: नीरज चोपड़ा ने जीता सिल्वर (85.83 मी), यशवीर सिंह को ब्रॉन्ज — भारत का दोहरा तमगा
सारांश
मुख्य बातें
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 1 अगस्त की देर रात ग्लासगो में मेंस जैवलिन थ्रो इवेंट ने भारत को एक साथ दो पदक दिलाए — नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि यशवीर सिंह ने अपने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट थ्रो कर कांस्य पदक हासिल किया। स्वर्ण पदक श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज के नाम रहा, जिन्होंने 89.75 मीटर की दूरी तय कर शीर्ष स्थान पक्का किया।
नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन
ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने पहले प्रयास में 80.97 मीटर से आगाज़ किया। दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर का थ्रो किया, जो इस सीज़न का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। तीसरे प्रयास में 81.29 मीटर और चौथे में 80.73 मीटर की दूरी के साथ उन्होंने रजत पदक की स्थिति बनाए रखी। हालाँकि पथिराज के 89.75 मीटर के थ्रो तक पहुँचना उनके लिए संभव नहीं हुआ।
यशवीर सिंह का गेम-चेंजिंग अंतिम थ्रो
यशवीर सिंह का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर, तीसरे में 81.33 मीटर और पाँचवें में 76.95 मीटर के बाद, उनके छठे और अंतिम प्रयास का 85.41 मीटर का थ्रो निर्णायक साबित हुआ। यह उनका पर्सनल बेस्ट भी था, जिसने उन्हें कांस्य पदक की पंक्ति में ला खड़ा किया।
रोहित यादव का प्रदर्शन
तीसरे भारतीय प्रतिभागी रोहित यादव 81.56 मीटर की सर्वश्रेष्ठ दूरी के साथ सातवें स्थान पर रहे। उन्होंने पहले प्रयास में 77.50 मीटर, दूसरे में 81.56 मीटर, चौथे में 73.70 मीटर और छठे में 79.55 मीटर का थ्रो किया।
भारत की मेडल टैली और स्थिति
इस दोहरी सफलता के साथ भारत के कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 23 पदक हो गए हैं — 5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य। एथलेटिक्स व पैरा एथलेटिक्स में 11 पदक, जूडो में 3 पदक (जिनमें 2 स्वर्ण), वेटलिफ्टिंग में 8 पदक और पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 कांस्य शामिल है। भारत फिलहाल मेडल टैली में 10वें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया 128 पदकों (55 स्वर्ण, 30 रजत, 43 कांस्य) के साथ शीर्ष पर है, इंग्लैंड 80 पदकों के साथ दूसरे और कनाडा 53 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जैवलिन थ्रो ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मज़बूत की है। यशवीर सिंह का पर्सनल बेस्ट यह दर्शाता है कि नीरज के बाद भी भारतीय भाला फेंक का भविष्य उज्जवल है।