'एक देश, एक शिक्षा' की मांग: लखनऊ में अपनी जनता पार्टी का परिवर्तन चौक पर प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के परिवर्तन चौक पर मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को अपनी जनता पार्टी (एजेपी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की 2026 नियमावली को प्रभावी रूप से लागू करने और आरक्षण संबंधी मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँग 'एक देश, एक शिक्षा' व्यवस्था लागू करने की रही, जिसमें कक्षा 12 तक समान पाठ्यक्रम और सभी बच्चों को समान शिक्षा के अवसर सुनिश्चित करने की बात कही गई।
मुख्य माँगें और प्रदर्शन का स्वरूप
प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि देश में शिक्षा व्यवस्था आर्थिक और सामाजिक आधार पर विभिन्न स्तरों में बँटी हुई है। उनकी माँग है कि कम से कम कक्षा 12 तक पूरे देश में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाए, ताकि किसी भी परिवार के बच्चे को शिक्षा के मामले में असमानता का सामना न करना पड़े।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि 'जब देश में वन नेशन, वन इलेक्शन की चर्चा हो सकती है, तो वन नेशन, वन एजुकेशन पर गंभीरता से विचार क्यों नहीं किया जा सकता।' उन्होंने आगे कहा कि यदि एक आईएएस अधिकारी या कारोबारी का बच्चा सरकारी विद्यालय में पढ़ सकता है, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे को भी उसी गुणवत्ता के सरकारी स्कूल में पढ़ने का अधिकार मिलना चाहिए।
यूजीसी नियमावली और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकार
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने यूजीसी की 2026 नियमावली को उच्च शिक्षा संस्थानों में तत्काल और प्रभावी ढंग से लागू करने की भी माँग रखी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
एक वक्ता ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक मजबूत और प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी छात्र को भेदभाव या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव के मामले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं।
आरक्षण पर सरकार को घेरा
प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की दया पर आधारित 'भीख' नहीं है, बल्कि यह संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े तथा वंचित वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की संवैधानिक व्यवस्था है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता इसका जवाब देगी और अपनी जनता पार्टी (एजेपी) की सरकार बनाने का भी दावा किया गया।
लोकतांत्रिक अधिकार और सरकारी कार्रवाई पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब उनका संगठन और समर्थक इन माँगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं, तो सरकार की ओर से बल प्रयोग, गिरफ्तारी और मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी माँग रखने वाले लोगों को अभिव्यक्ति का अधिकार मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि शिक्षा में समानता और आरक्षण संरक्षण की माँगें देश के कई राज्यों में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के एजेंडे पर रही हैं। एजेपी का यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी के बीच हुआ है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है।