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अगस्त 2026 में भारत का LFPR बढ़कर 55.6%, ग्रामीण बेरोज़गारी जनवरी के बाद सबसे कम

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अगस्त 2026 में भारत का LFPR बढ़कर 55.6%, ग्रामीण बेरोज़गारी जनवरी के बाद सबसे कम

सारांश

NSO के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में भारत का LFPR 55.6% पर पहुँचा — सालाना 0.6 अंक की बढ़त। ग्रामीण बेरोज़गारी जनवरी के बाद सबसे कम 4.1% और महिला LFPR 34.8% तक सुधरा। WPR मार्च 2026 के बाद का उच्चतम।

मुख्य बातें

NSO के 15 सितंबर 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार भारत की कुल LFPR अगस्त 2026 में 55.6% हो गई, जो अगस्त 2025 में 55% थी।
कुल WPR बढ़कर 52.8% पर पहुँचा — मार्च 2026 के बाद का सर्वोच्च स्तर।
ग्रामीण बेरोज़गारी दर घटकर 4.1% हुई — जनवरी 2026 के बाद का निम्नतम स्तर।
कुल महिला LFPR जुलाई 2026 के 34.4% से बढ़कर 34.8% पर आई; ग्रामीण महिला LFPR 39.4% तक पहुँची।
समग्र बेरोज़गारी दर (UR) 5.0% पर स्थिर; शहरी LFPR 50.4% पर अपरिवर्तित।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत की कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) अगस्त 2026 में सालाना आधार पर बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त 2025 में 55 प्रतिशत थी। इसके साथ ही श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) भी बढ़कर 52.8 प्रतिशत पर पहुँच गया — जो मार्च 2026 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। ये आँकड़े देश में रोज़गार के अवसरों में क्रमिक सुधार का संकेत देते हैं।

मुख्य आँकड़े: क्या कहती है रिपोर्ट

NSO के आँकड़ों के अनुसार कुल LFPR जुलाई 2026 के 55.4 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त 2026 में 55.6 प्रतिशत हो गया। यह मासिक और वार्षिक — दोनों आधारों पर वृद्धि को दर्शाता है। WPR का 52.8 प्रतिशत पर पहुँचना यह दिखाता है कि श्रमबल में शामिल लोगों का एक बड़ा हिस्सा वास्तव में रोज़गारयुक्त है।

ग्रामीण क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार

15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए ग्रामीण LFPR जुलाई 2026 के 58.0 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त 2026 में 58.2 प्रतिशत हो गया। यह आँकड़ा अगस्त 2025 की तुलना में 1.2 प्रतिशत अंक अधिक है। ग्रामीण WPR भी सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.8 प्रतिशत पर पहुँच गया। गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्र में बेरोज़गारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई — जो जनवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

शहरी क्षेत्र: LFPR स्थिर

शहरी इलाकों में LFPR जुलाई 2026 के समान ही 50.4 प्रतिशत पर स्थिर रहा। आँकड़ों के अनुसार इस स्थिरता को प्रतिगमन नहीं माना जा रहा, बल्कि यह शहरी श्रमबाज़ार में एक ठहराव का दौर है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वर्गों के लिए समग्र बेरोज़गारी दर (UR) 5.0 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही।

महिला श्रमबल भागीदारी में बढ़त

अगस्त 2026 में कुल महिला LFPR जुलाई 2026 के 34.4 प्रतिशत से बढ़कर 34.8 प्रतिशत हो गई — जो अगस्त 2025 के मुक़ाबले 1.1 प्रतिशत अंक अधिक है। इस वृद्धि का मुख्य कारण ग्रामीण महिला LFPR में सुधार रहा, जो 38.8 प्रतिशत से बढ़कर 39.4 प्रतिशत पर आ गई। दूसरी ओर, शहरी महिला LFPR जुलाई 2026 के 25.3 प्रतिशत से मामूली बढ़कर 25.4 प्रतिशत पर रही। यह ऐसे समय में आया है जब महिला श्रमबल भागीदारी को लेकर नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों में व्यापक चर्चा जारी है।

आगे क्या संकेत देते हैं ये आँकड़े

विश्लेषकों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में WPR और LFPR दोनों का एक साथ बढ़ना श्रमबाज़ार की मज़बूती का सकारात्मक संकेत है। हालाँकि शहरी स्थिरता और 5.0 प्रतिशत की समग्र बेरोज़गारी दर यह भी दर्शाती है कि औपचारिक शहरी क्षेत्र में रोज़गार सृजन की गति अभी भी सीमित है। आगामी महीनों के आँकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि यह सुधार टिकाऊ है या मौसमी कारकों से प्रेरित।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहरे सवाल बाकी हैं — LFPR में वृद्धि आंशिक रूप से ग्रामीण और अनौपचारिक रोज़गार से प्रेरित हो सकती है, जो अक्सर कम वेतन और कम सुरक्षा वाले होते हैं। शहरी LFPR का 50.4% पर स्थिर रहना और समग्र बेरोज़गारी दर का 5.0% बने रहना यह संकेत देते हैं कि औपचारिक क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण रोज़गार सृजन अभी भी चुनौती है। महिला LFPR में सुधार स्वागतयोग्य है, पर 34.8% का आँकड़ा वैश्विक औसत से काफी नीचे है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह सुधार मौसमी कारकों से परे टिकाऊ संरचनात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की LFPR अगस्त 2026 में कितनी रही?
NSO के आँकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में भारत की कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 55.6 प्रतिशत रही, जो अगस्त 2025 के 55 प्रतिशत और जुलाई 2026 के 55.4 प्रतिशत से अधिक है।
LFPR और WPR में क्या अंतर है?
LFPR यानी श्रम बल भागीदारी दर वह प्रतिशत है जो दर्शाती है कि कुल जनसंख्या में से कितने लोग काम कर रहे हैं या काम खोज रहे हैं। WPR यानी श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल उन्हें गिनता है जो वास्तव में रोज़गारयुक्त हैं — अगस्त 2026 में यह 52.8% रहा।
ग्रामीण क्षेत्र में बेरोज़गारी दर का क्या हाल है?
NSO के अनुसार अगस्त 2026 में ग्रामीण बेरोज़गारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह ग्रामीण श्रमबाज़ार में सुधार का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
महिला श्रम बल भागीदारी दर में कितना सुधार हुआ?
अगस्त 2026 में कुल महिला LFPR 34.8 प्रतिशत रही — जुलाई 2026 के 34.4 प्रतिशत और अगस्त 2025 के मुक़ाबले 1.1 प्रतिशत अंक की बढ़त। ग्रामीण महिला LFPR 39.4 प्रतिशत पर पहुँची, जबकि शहरी महिला LFPR 25.4 प्रतिशत पर लगभग स्थिर रही।
ये आँकड़े किसने जारी किए और इनका महत्व क्या है?
ये आँकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 15 सितंबर 2026 को जारी किए। ये आँकड़े भारत के श्रमबाज़ार की स्थिति को मापने का सरकारी मानक हैं और नीति-निर्माण, बजट योजना तथा रोज़गार नीतियों के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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