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मार्च 2026 में भारत की श्रम बल सहभागिता दर में हल्की गिरावट: मंत्रालय

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मार्च 2026 में भारत की श्रम बल सहभागिता दर में हल्की गिरावट: मंत्रालय

सारांश

भारत में 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की श्रम बल सहभागिता दर मार्च 2026 में स्थिर रही, हल्की गिरावट के साथ। जानें क्या हैं इसके पीछे के कारण और आंकड़े।

मुख्य बातें

मार्च 2026 में एलएफपीआर 55.4 प्रतिशत रहा।
डब्ल्यूपीआर 52.6 प्रतिशत पर स्थिर रहा।
शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 46.8 प्रतिशत था।
ग्रामीण क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर 55.5 प्रतिशत रहा।
यह सर्वेक्षण NSO द्वारा किया जाता है।

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर), जो रोजगार की स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, मार्च 2026 में लगभग स्थिर बनी रही। यह फरवरी के 55.9 प्रतिशत के मुकाबले हल्का घटकर 55.4 प्रतिशत पर आ गई।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), जो रोजगार स्तर को दर्शाता है, मार्च में कुल मिलाकर स्थिर बना रहा। मार्च में कुल डब्ल्यूपीआर 52.6 प्रतिशत रहा।

बयान में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में डब्ल्यूपीआर मार्च में 46.8 प्रतिशत रहा, जो फरवरी में 47.0 प्रतिशत था। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा फरवरी के 56.3 प्रतिशत से घटकर मार्च में 55.5 प्रतिशत हो गया।

पिछले महीने जारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में शहरी रोजगार बाजार में अच्छी रिकवरी देखी गई थी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि हुई और बेरोजगारी दर में कमी आई थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा किए गए पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) से रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। यह सर्वे देश में रोजगार की स्थिति को समझने का मुख्य स्रोत है।

जनवरी 2025 से इस सर्वे की पद्धति में बदलाव किया गया है, ताकि हर महीने और तिमाही के आधार पर रोजगार से जुड़े आंकड़े जारी किए जा सकें।

पीएलएफएस के मासिक नतीजे बुलेटिन के रूप में प्रकाशित किए जाते हैं, जिनमें एलएफपीआर, डब्ल्यूपीआर और बेरोजगारी दर (यूआर) जैसे प्रमुख संकेतकों की जानकारी दी जाती है।

अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक के बुलेटिन पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जबकि मार्च 2026 का यह बुलेटिन इस श्रृंखला का 12वां हिस्सा है।

देशभर के स्तर पर यह आंकड़े कुल 3,74,879 लोगों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं, जिनमें से 2,13,679 लोग ग्रामीण क्षेत्रों से और 1,61,200 लोग शहरी क्षेत्रों से हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में सुधार हो रहा है। सरकार को इस दिशा में और प्रयास करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रम बल सहभागिता दर क्या है?
श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर) उस प्रतिशत को दर्शाती है जिसमें कार्य करने के लिए सक्षम और इच्छुक व्यक्तियों की संख्या कुल जनसंख्या की तुलना में है।
डब्ल्यूपीआर क्या दर्शाता है?
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) रोजगार स्तर को दर्शाता है और यह बताता है कि श्रमिक जनसंख्या का कितना प्रतिशत रोजगार में है।
यह सर्वेक्षण कौन करता है?
यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा किया जाता है, जो रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े एकत्रित करता है।
क्या पिछले महीने रोजगार में सुधार हुआ था?
हाँ, फरवरी 2026 में शहरी रोजगार बाजार में सुधार देखा गया था, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ी और बेरोजगारी दर में कमी आई।
आंकड़े किस आधार पर एकत्र किए जाते हैं?
आंकड़े कुल 3,74,879 लोगों से एकत्र किए जाते हैं, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से डेटा शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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