आगरा में वकील चला रहा था मैट्रिमोनियल साइबर ठगी का कॉल सेंटर, 9 गिरफ्तार; पुलिस ने किया पर्दाफाश
सारांश
मुख्य बातें
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने आगरा में संचालित एक पैन-इंडिया मैट्रिमोनियल साइबर फ्रॉड रैकेट का 15 सितंबर 2026 को भंडाफोड़ किया, जिसमें वकील अमित कुमार समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह 'शादीपार्टनर डॉट कॉम' नाम की फर्जी वेबसाइट के ज़रिए शादी के इच्छुक पुरुषों को निशाना बना रहा था और प्रत्येक पीड़ित से ₹15,000 तक की ठगी करता था।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
यह कार्रवाई नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज एक शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे 'शादीपार्टनर डॉट कॉम' पर रिश्ते के नाम पर ₹15,000 की ठगी की गई। जाँच के बाद साइबर सेंट्रल थाने में बीएनएस की धारा 318(4)/317(5)/61(2)/3(5) के तहत एफआईआर नंबर 78/2025 दर्ज की गई।
जाँच में पता चला कि ठगी की रकम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक करंट अकाउंट में जा रही थी, जो 'मेसर्स शादी पार्टनर' के नाम पर था। इस अकाउंट की मालिक जया शाक्य उर्फ शशि थी। NCRP डेटा खंगालने पर इसी अकाउंट से देशभर में छह शिकायतें जुड़ी मिलीं।
छापेमारी और गिरफ्तारियाँ
4 सितंबर 2026 को पुलिस ने आगरा के सिकंदरा स्थित रामाजी धाम अपार्टमेंट में छापा मारा, जहाँ एक अवैध टेली-कॉलिंग कॉल सेंटर चल रहा था। मौके से मैनेजर जया शाक्य और आठ महिला टेलीकॉलर्स को पकड़ा गया।
छापेमारी की भनक लगते ही मास्टरमाइंड अमित कुमार ने अपना मोबाइल बंद कर लिया और अंडरग्राउंड हो गया। तकनीकी निगरानी के ज़रिए 8 सितंबर 2026 को उसे आगरा के काला कुंज इलाके में पकड़ा गया। उस वक्त वह 'एडवोकेट' स्टिकर लगी काली कार में सवार था। उसने बार काउंसिल के कागजात दिखाकर छूट माँगी, लेकिन डिजिटल साक्ष्यों के सामने उसकी पोल खुल गई।
मास्टरमाइंड की कानूनी चालबाज़ी
पुलिस के अनुसार, 29 वर्षीय मास्टरमाइंड अमित कुमार बीए एलएलबी है और उसने अपनी कानूनी समझ का इस्तेमाल कर पूरा जाल बुना था। उसने जया शाक्य के नाम पर प्रोपराइटरशिप फर्म 'मेसर्स शादी पार्टनर' बनाई, MSME और UP लेबर डिपार्टमेंट में पंजीकरण कराया और अपनी कंपनी नेटनेक्सिस सॉल्यूशंस (OPC) प्राइवेट लिमिटेड के साथ फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट किया।
सभी बैंक अकाउंट और सिम कार्ड महिला मैनेजर के नाम पर थे, जबकि वह स्वयं को केवल 'लीगल एडवाइजर' बताता था। यह ऐसे समय में आया है जब ऑनलाइन मैट्रिमोनियल फ्रॉड के मामले पूरे देश में बढ़ रहे हैं।
ठगी का तरीका
गिरोह की रणनीति 'छोटा धोखा, बहुतों के साथ' थी — वे एक पीड़ित से ₹15,000 से अधिक नहीं लेते थे ताकि पीड़ित पुलिस में शिकायत करने से बचे। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अपनी वेबसाइट से शादी के इच्छुक पुरुषों के नंबर जुटाए जाते थे, फिर महिला कॉलर्स फर्जी तस्वीरें व्हाट्सएप पर भेजती थीं। भरोसा जीतने के लिए दूसरी महिला स्टाफ 'होने वाली दुल्हन' बनकर कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात भी करती थी।
इसके बाद रजिस्ट्रेशन चार्ज, प्रोफाइल एक्टिवेशन और कॉन्टैक्ट अनलॉक जैसे नामों पर ₹2,500 से ₹15,000 तक वसूले जाते थे। कुछ दिन बाद मांगलिक दोष या परिवार की असहमति जैसे बहानों से रिश्ता तोड़ दिया जाता था। वर्कइंडिया और अपना ऐप से भर्ती की जाती थी और टेलीकॉलर्स को ₹6,000–₹7,000 मासिक वेतन के साथ ठगी की रकम पर 10 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। हर कॉलर को महीने में कम से कम ₹15,000 ठगने का लक्ष्य दिया गया था।
बरामदगी और जाँच टीम
पुलिस ने मौके से एक कार, ₹50,000 नकद, सात डेस्कटॉप सीपीयू और 47 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह ऑपरेशन सब इंस्पेक्टर गौरव सिंह, हेड कांस्टेबल भरत और कांस्टेबल धर्मेंद्र की टीम ने एसएचओ साइबर सेंट्रल की देखरेख में अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार हज़ारों लोग इस ठगी का शिकार हो चुके हैं और उन्हें पता भी नहीं कि उनके साथ धोखा हुआ है। आगे की जाँच जारी है और पीड़ितों की वास्तविक संख्या सामने आने की संभावना है।