WCEF 2026 गांधीनगर में शुरू: 62 देशों के 3,600 प्रतिनिधि, सर्कुलर इकोनॉमी पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 15 सितंबर 2026 को गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया। दक्षिण एशिया में पहली बार आयोजित हो रहा यह फोरम आर्थिक विकास को संसाधन कुशल और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के व्यावहारिक रास्तों की तलाश में 62 देशों के 3,600 से अधिक हितधारकों को एक मंच पर लाया है।
फोरम का स्वरूप और थीम
यह चार दिवसीय आयोजन 15 से 18 सितंबर 2026 तक 'सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए बदलाव' थीम के तहत चल रहा है। फोरम में कारोबारी नेता, उद्यमी, नवाचारकर्ता, शोधकर्ता, नीति निर्माता और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं। एक विशेष प्रदर्शनी में 135 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं।
गौरतलब है कि WCEF का यह संस्करण न केवल भारत में पहली बार बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में आयोजित होने वाला पहला WCEF है — जो इस क्षेत्र में हरित अर्थव्यवस्था की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है।
मुख्यमंत्री पटेल का संबोधन
उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि दक्षिण एशिया में WCEF की मेजबानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा, "इस फोरम को दुनिया के लिए व्यावहारिक सर्कुलर इकोनॉमी समाधान विकसित करके 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना को साकार करना चाहिए।"
पटेल ने गुजरात के अनुभव को रेखांकित करते हुए बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, जल प्रबंधन और संसाधन दक्षता के क्षेत्र में राज्य की पहलें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय मॉडल बन सकती हैं।
केंद्रीय मंत्री यादव: सहयोग और EPR ढाँचा
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोर दिया कि सर्कुलर इकोनॉमी के लक्ष्य किसी एक देश, कंपनी या समुदाय के अकेले प्रयासों से हासिल नहीं किए जा सकते — इसके लिए देशों और क्षेत्रों के बीच सक्रिय सहयोग अनिवार्य है।
यादव ने भारत की नीतिगत प्रगति के आँकड़े साझा करते हुए बताया कि अगस्त 2026 तक विभिन्न एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) फ्रेमवर्क के अंतर्गत 83,000 से अधिक उत्पादक और 4,802 रिसाइक्लर पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "विनियमित कचरे की विभिन्न श्रेणियों के तहत करीब 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।"
आयोजन के सहयोगी और व्यापक संदर्भ
इस फोरम का संयुक्त आयोजन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), फिनिश इनोवेशन फंड सित्रा, फिनलैंड सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, गुजरात सरकार और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किया जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक जलवायु वार्ताओं में अपनी उपस्थिति को अधिक ठोस बनाने की कोशिश कर रहा है। सर्कुलर इकोनॉमी को अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि एक आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है जो आयात निर्भरता घटाने और घरेलू संसाधन क्षमता बढ़ाने में सहायक है।
आगे की दिशा
18 सितंबर तक चलने वाले इस फोरम से नीतिगत सिफारिशें और सहयोग के नए फ्रेमवर्क उभरने की उम्मीद है। भागीदार देशों और संगठनों के बीच संभावित समझौतों पर चर्चा अगले तीन दिनों में जारी रहेगी।