15 सितंबर 2026
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गांधीनगर में 'वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026' शुरू, 65 देशों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल

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गांधीनगर में 'वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026' शुरू, 65 देशों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल

सारांश

दक्षिण एशिया में पहली बार गांधीनगर में 'वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026' की शुरुआत हुई। 65 देशों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधि, 125+ एक्जिबिटर और 80 एक्सेलेरेटर सत्र — भारत इस वैश्विक मंच पर अपनी सर्कुलर इकोनॉमी नेतृत्व की छाप छोड़ने को तैयार है।

मुख्य बातें

15 सितंबर 2026 से गांधीनगर में तीन दिवसीय 'वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026' (WCEF) की शुरुआत हुई — दक्षिण एशिया में पहली बार।
फोरम का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया।
65 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक हितधारक भाग ले रहे हैं, जिनमें नीति-निर्माता, व्यापार जगत, शोधकर्ता और युवा नेता शामिल हैं।
15-16 सितंबर को 4 मुख्य सत्र और 16 समानांतर सत्र ; 125+ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक एक्सपो में हिस्सा लेंगे।
17-18 सितंबर को 80 एक्सेलेरेटर सत्र ऑनलाइन व प्रत्यक्ष रूप में आयोजित होंगे।
भारत ने हाल ही में 10YFP बोर्ड के को-चेयर की भूमिका संभाली, जो सतत खपत और उत्पादन पर वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है।

गांधीनगर में 15 सितंबर 2026 से तीन दिवसीय 'वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026' (WCEF) की शुरुआत हो गई है, जिसमें 65 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक हितधारक भाग ले रहे हैं। यह पहली बार है कि दक्षिण एशिया में इस फोरम की मेजबानी की जा रही है, जो भारत की सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।

उद्घाटन और आयोजन

फोरम का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन सत्र में गुजरात के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री अर्जुनभाई मोधवाडिया और फिनलैंड के राजदूत मिक्को किविकोस्की के साथ केंद्र और गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

इस आयोजन की थीम है — 'सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए बदलाव'। इसका संयुक्त आयोजन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), फिनिश इनोवेशन फंड सित्रा, फिनलैंड सरकार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, गुजरात सरकार और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) द्वारा किया जा रहा है।

मुख्य सत्र और विषय

15 और 16 सितंबर को फोरम में चार मुख्य सत्र और 16 समानांतर विषयगत सत्र आयोजित होंगे। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग, रोजगार की संभावनाओं, ऊर्जा उत्पादन, वित्त, गवर्नेंस, टिकाऊ उत्पाद, औद्योगिक समाधान, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और युवा नेतृत्व जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी।

इसके साथ ही एक एक्सपो का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 125 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक भाग लेंगे। ये प्रदर्शक स्टार्ट-अप्स द्वारा तैयार व्यावहारिक सर्कुलर समाधान और निवेश के लिए तैयार नवाचारों को सामने रखेंगे।

भारत की वैश्विक भूमिका

अधिकारियों के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पर्यावरण नीति में बड़े बदलाव की अगुवाई कर रहा है और एक आधुनिक सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में 'सस्टेनेबल कंजम्पशन एंड प्रोडक्शन पैटर्न्स पर 10-ईयर फ्रेमवर्क ऑफ प्रोग्राम्स' (10YFP) बोर्ड के को-चेयर की भूमिका संभाली है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर रिसोर्स दक्षता और कचरे को कम करने की माँग तेज़ हो रही है। WCEF को दक्षिण एशिया में लाना ग्लोबल साउथ के साथ भारत के जुड़ाव की रणनीति का हिस्सा है।

एक्सेलेरेटर सत्र और आगे का कार्यक्रम

17 और 18 सितंबर को वैश्विक सहयोगी गांधीनगर और दुनिया की अन्य जगहों पर 80 एक्सेलेरेटर सत्र ऑनलाइन, हाइब्रिड और प्रत्यक्ष रूप में आयोजित करेंगे। साथ ही, 15 सितंबर को 10YFP बोर्ड की इन-पर्सन बैठक भी गांधीनगर में होगी।

यह फोरम ग्लोबल साउथ के साथ सहयोग, सर्कुलर फाइनेंस, निजी क्षेत्र के निवेश, नीति संवाद और अंतर-क्षेत्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। आने वाले दिनों में इसके परिणाम और घोषणाएँ भारत की सर्कुलर इकोनॉमी नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि गांधीनगर के सत्रों से निकलने वाली नीतिगत सिफारिशें ज़मीन पर कितनी उतरती हैं। भारत का सर्कुलर इकोनॉमी एजेंडा अभी मुख्यतः घोषणाओं और फोरम-स्तरीय संवाद तक सीमित रहा है, जबकि कचरा प्रबंधन और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) जैसे क्षेत्रों में क्रियान्वयन की गति धीमी रही है। 10YFP बोर्ड की को-चेयर की भूमिका अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा तो बढ़ाती है, परंतु घरेलू स्तर पर मापने योग्य सर्कुलेरिटी लक्ष्यों और उनकी स्वतंत्र निगरानी के बिना यह नेतृत्व अधूरा ही रहेगा।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 क्या है?
यह एक अंतरराष्ट्रीय फोरम है जो सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने, नवाचार साझा करने और नीतिगत सहयोग को मजबूत करने के लिए आयोजित किया जाता है। इस बार 15-18 सितंबर 2026 को गांधीनगर, गुजरात में आयोजित हो रहा है और दक्षिण एशिया में इसकी यह पहली मेजबानी है।
WCEF 2026 का आयोजन कहाँ और कब हो रहा है?
WCEF 2026 का आयोजन 15 से 18 सितंबर 2026 तक गुजरात के गांधीनगर में हो रहा है। 15-16 सितंबर को मुख्य सत्र और एक्सपो, तथा 17-18 सितंबर को 80 एक्सेलेरेटर सत्र निर्धारित हैं।
WCEF 2026 में कौन-कौन भाग ले रहे हैं?
फोरम में 65 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक हितधारक भाग ले रहे हैं, जिनमें व्यापार जगत के नेता, उद्यमी, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और शिक्षाविद शामिल हैं। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और फिनलैंड के राजदूत मिक्को किविकोस्की भी उपस्थित रहे।
सर्कुलर इकोनॉमी का अर्थ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
सर्कुलर इकोनॉमी में मौजूदा सामग्री और उत्पादों को दोबारा उपयोग, मरम्मत और पुनर्चक्रण के ज़रिए अर्थव्यवस्था में वापस लाया जाता है, बजाय उन्हें कचरे में फेंकने के। यह संसाधनों की बर्बादी रोकने, प्रदूषण घटाने और दीर्घकालिक समृद्धि के लिए एक वैश्विक आर्थिक मॉडल है।
WCEF 2026 में भारत की क्या भूमिका है?
भारत इस बार फोरम का मेज़बान देश है और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) तथा पर्यावरण मंत्रालय इसके सह-आयोजक हैं। इसके अलावा भारत ने हाल ही में 10YFP बोर्ड के को-चेयर की जिम्मेदारी भी संभाली है, जो सतत उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा देने वाला एक वैश्विक ढाँचा है।
राष्ट्र प्रेस
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