दिल्ली पुलिस ने टेलीग्राम जॉब स्कैम का भंडाफोड़ किया, राजस्थान से दो साइबर ठग गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने राजस्थान के जोधपुर से दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो टेलीग्राम-आधारित पार्ट-टाइम जॉब और फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कैम के ज़रिए लोगों को ठगने वाले गिरोह को 'म्यूल बैंक अकाउंट' उपलब्ध कराते थे। 6 अगस्त को सामने आई इस कार्रवाई की शुरुआत एक पीड़ित की शिकायत से हुई, जिससे ₹2,84,100 की ऑनलाइन ठगी की गई थी।
मामले का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, पीड़ित से 9 जून को 'पायल सिंह जाट' नामक एक टेलीग्राम उपयोगकर्ता ने संपर्क किया और उन्हें 'फूडपांडा' से जुड़े ऑनलाइन रिव्यू कार्य सौंपे। ये कार्य वास्तविक प्रतीत होते थे और पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए सुनियोजित तरीके से तैयार किए गए थे।
इसके बाद 2 जुलाई को पीड़ित को 'गौरिका ओजस' नामक एक अन्य टेलीग्राम यूजर से जोड़ा गया, जिसने भारी रिटर्न का लालच देकर उन्हें एक फर्जी ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कीम में पैसे लगाने के लिए राज़ी किया। भरोसे में आकर पीड़ित ने अपने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) खातों से यूपीआई और आईएमपीएस के माध्यम से कुल ₹2,84,100 आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए।
एफआईआर और जांच
पीड़ित की शिकायत के आधार पर 9 जुलाई को सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4) और 319 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जांच में पुलिस ने ठगी की रकम के लेन-देन का पता लगाया, जो सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केरल ग्रामीण बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कई खातों से होकर गुज़री थी।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से ₹1,00,000 जोधपुर के मरुधर इंडस्ट्रियल एरिया ब्रांच में दिनेश के नाम पर खुले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते में जमा किए गए थे। इस खाते से जोधपुर के एटीएम से ₹80,000 और अजमेर के HDFC बैंक एटीएम से ₹38,000 निकाले गए, जबकि एक पेट्रोल पंप पर ₹19,500 खर्च किए जाने के प्रमाण भी मिले।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पहाड़गंज के एसीपी सौरभ ए. नरेंद्र की देखरेख में साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ इंस्पेक्टर योगराज दलाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एएसआई पंकज, हेड कॉन्स्टेबल रवि कांत, अशोक और कॉन्स्टेबल नितिन शामिल थे। तकनीकी निगरानी और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के आधार पर टीम ने 31 जुलाई को जोधपुर में छापेमारी कर 21 वर्षीय दिनेश को गिरफ्तार किया।
दिनेश के बयान के आधार पर पुलिस ने उसके कथित साथी 20 वर्षीय विकास सियाग को भी जोधपुर से ही गिरफ्तार कर लिया। जांचकर्ताओं के अनुसार, दोनों ने साइबर ठगी के गिरोह को म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
व्यापक नेटवर्क की आशंका
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि इस मामले में इस्तेमाल किया गया बैंक खाता देश के अलग-अलग इलाकों में दर्ज साइबर अपराध की पाँच अन्य शिकायतों से भी जुड़ा हुआ है, जो यह दर्शाता है कि इस खाते का ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के लिए बार-बार उपयोग किया गया था। दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच अभी जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
आगे की कार्रवाई
जब्त उपकरणों की फोरेंसिक जांच से इस साइबर सिंडिकेट के और सदस्यों की पहचान होने की उम्मीद है। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर पार्ट-टाइम जॉब या निवेश के झाँसे में आने से पहले सतर्कता बरतना कितना ज़रूरी है।