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टेलीग्राम जॉब स्कैम का पर्दाफाश: दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से दो म्यूल अकाउंट ऑपरेटर दबोचे

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टेलीग्राम जॉब स्कैम का पर्दाफाश: दिल्ली पुलिस ने राजस्थान से दो म्यूल अकाउंट ऑपरेटर दबोचे

सारांश

टेलीग्राम पर फर्जी जॉब और निवेश का झाँसा देकर ₹2,84,100 ठगने वाले गिरोह के दो सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने जोधपुर से दबोचा। आरोपी म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को लॉन्ड्र करते थे — और एक ही खाता पाँच अलग साइबर शिकायतों से जुड़ा निकला।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने 31 जुलाई को जोधपुर, राजस्थान से दिनेश (21 वर्ष) और विकास सियाग (20 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
पीड़ित से टेलीग्राम के माध्यम से फर्जी फूडपांडा रिव्यू और ऑनलाइन निवेश योजना का झाँसा देकर ₹2,84,100 ठगे गए।
आरोपियों ने साइबर ठग गिरोहों को म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराकर धोखाधड़ी की रकम की मनी लॉन्ड्रिंग में मदद की।
मामले में इस्तेमाल बैंक खाता देशभर में दर्ज पाँच अन्य साइबर अपराध शिकायतों से भी जुड़ा पाया गया।
आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड जब्त; फोरेंसिक जाँच जारी।
मामला BNS धाराओं 318(4) और 319 के तहत दर्ज; दोनों के आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच चल रही है।

दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने टेलीग्राम-आधारित पार्ट-टाइम जॉब और फर्जी निवेश घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान के जोधपुर से दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर आरोप है कि वे साइबर ठग गिरोहों को 'म्यूल बैंक अकाउंट' उपलब्ध कराते थे, जिनके जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी से अर्जित रकम को ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।

मामला कैसे सामने आया

पुलिस के अनुसार, यह प्रकरण 9 जुलाई को दर्ज एक शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें पीड़ित ने बताया कि टेलीग्राम के माध्यम से उनके साथ ₹2,84,100 की ठगी की गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि 9 जून को 'पायल सिंह जाट' नाम के एक टेलीग्राम उपयोगकर्ता ने उनसे संपर्क साधा और 'फूडपांडा' के नाम पर ऑनलाइन रिव्यू का काम सौंपा। ये काम सुनियोजित तरीके से इस प्रकार तैयार किए गए थे कि पीड़ित को असली प्रतीत हों और उनका विश्वास जीता जा सके।

इसके बाद 2 जुलाई को पीड़ित को 'गौरिका ओजस' नाम के एक अन्य टेलीग्राम उपयोगकर्ता से जोड़ा गया, जिसने भारी रिटर्न का प्रलोभन देकर उन्हें एक फर्जी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसे लगाने के लिए राजी किया। ठगों के झाँसे में आकर पीड़ित ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के खातों से UPI और IMPS के जरिए कुल ₹2,84,100 आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए।

एफआईआर और जाँच का दायरा

शिकायत के आधार पर 9 जुलाई को सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4) और 319 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। जाँच के दौरान पुलिस ने ठगी की रकम के वित्तीय प्रवाह को ट्रेस किया। यह रकम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केरल ग्रामीण बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कई लाभार्थी खातों के माध्यम से स्थानांतरित की गई थी।

विस्तृत वित्तीय विश्लेषण से पता चला कि ठगी की रकम में से ₹1,00,000 जोधपुर के मरुधर इंडस्ट्रियल एरिया ब्रांच में दिनेश के नाम से खुले सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खाते में जमा हुए थे। इसी खाते से जोधपुर के एटीएम से ₹80,000 और अजमेर के HDFC बैंक एटीएम से ₹38,000 निकाले गए, जबकि एक पेट्रोल पंप पर ₹19,500 खर्च किए जाने के भी सबूत मिले।

गिरफ्तारी और बरामदगी

पहाड़गंज के एसीपी सौरभ ए. नरेंद्र की देखरेख में, साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ इंस्पेक्टर योगराज दलाल के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस दल गठित किया गया — जिसमें एएसआई पंकज, हेड कॉन्स्टेबल रवि कांतअशोक, और कॉन्स्टेबल नितिन शामिल थे। तकनीकी निगरानी और बैंक रिकॉर्ड के विश्लेषण के आधार पर टीम ने 31 जुलाई को जोधपुर में छापेमारी कर 21 वर्षीय दिनेश को हिरासत में लिया।

दिनेश के बयान पर पुलिस ने उसके कथित सहयोगी 20 वर्षीय विकास सियाग को भी जोधपुर से गिरफ्तार किया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, दोनों ने म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था कर उन्हें साइबर ठग गिरोहों को उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड जब्त किए हैं, जिन्हें फोरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है।

व्यापक साइबर नेटवर्क की आशंका

जाँच में यह भी सामने आया कि इस मामले में इस्तेमाल किया गया बैंक खाता देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज पाँच अन्य साइबर अपराध शिकायतों से भी जुड़ा हुआ था, जो इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है। दोनों आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जाँच अभी जारी है। फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें बेरोजगार युवाओं को बैंक खाते किराये पर देने के लिए उकसाया जाता है। चिंताजनक यह है कि एक ही खाता पाँच अलग-अलग साइबर शिकायतों से जुड़ा निकला, जो दर्शाता है कि ये खाते सुनियोजित तरीके से बार-बार इस्तेमाल होते हैं। असली सवाल यह है कि जब तक ऊपरी स्तर के आयोजकों — जो टेलीग्राम चैनल संचालित करते हैं और भुगतान निर्देशित करते हैं — तक जाँच नहीं पहुँचती, तब तक ऐसी गिरफ्तारियाँ नेटवर्क को कितना नुकसान पहुँचाती हैं? फोरेंसिक जाँच के नतीजे इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टेलीग्राम पार्ट-टाइम जॉब स्कैम क्या होता है?
इस तरह के स्कैम में ठग टेलीग्राम पर फर्जी पहचान बनाकर पीड़ितों को 'आसान ऑनलाइन काम' का लालच देते हैं — जैसे किसी ऐप पर रिव्यू लिखना — और फिर उन्हें निवेश योजना में पैसे लगाने के लिए फँसाते हैं। इस मामले में पीड़ित से ₹2,84,100 की ठगी हुई।
म्यूल बैंक अकाउंट क्या होता है और यह साइबर फ्रॉड से कैसे जुड़ा है?
म्यूल बैंक अकाउंट वे खाते होते हैं जो असली व्यक्तियों के नाम पर खुले होते हैं, लेकिन साइबर ठग गिरोहों को धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किराये पर या धोखे से दिए जाते हैं। इस मामले में दिनेश और विकास सियाग पर ऐसे खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?
पुलिस ने ठगी की रकम के वित्तीय प्रवाह को ट्रेस किया और पाया कि ₹1,00,000 जोधपुर में दिनेश के खाते में गए। तकनीकी निगरानी और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर 31 जुलाई को जोधपुर में छापेमारी कर दिनेश को गिरफ्तार किया गया, जिसके बयान पर विकास सियाग को भी दबोचा गया।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4) और 319 के तहत दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच अभी जारी है।
क्या इस गिरोह के और सदस्य हैं?
जाँच में सामने आया है कि इस मामले में इस्तेमाल बैंक खाता देशभर में दर्ज पाँच अन्य साइबर अपराध शिकायतों से जुड़ा है, जो एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। जब्त मोबाइल फोन और सिम कार्ड की फोरेंसिक जाँच के आधार पर सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान की कोशिश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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