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जापान में नौकरी के नाम पर ठगी: दिल्ली पुलिस ने साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया, दो गिरफ्तार

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जापान में नौकरी के नाम पर ठगी: दिल्ली पुलिस ने साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया, दो गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने जापान में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। बरेली से गिरफ्तार दोनों आरोपी — कुश भटनागर (22) और अमित (23) — एक बड़े राष्ट्रव्यापी साइबर नेटवर्क से जुड़े थे। पीड़ित से ₹1.63 लाख की ठगी की गई थी।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की पूर्वी जिला साइबर थाना टीम ने 17 जून 2025 को जापान में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया।
पीड़ित से ₹1.63 लाख की ठगी की गई थी; ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।
गिरफ्तार आरोपी — कुश भटनागर (22) और अमित (23) — दोनों बरेली के सीबी गंज क्षेत्र के निवासी हैं।
आरोपी खुद को भर्ती सलाहकार बताकर वीजा, एम्बेसी क्लीयरेंस और अटेस्टेशन के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम वसूलते थे।
पुलिस ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड, व्हाट्सएप चैट और फर्जी भर्ती पोर्टल से जुड़े डिजिटल साक्ष्य बरामद किए।
दोनों आरोपी एक राष्ट्रव्यापी साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े थे; आगे की जांच जारी है।

दिल्ली पुलिस की पूर्वी जिला साइबर थाना टीम ने 17 जून 2025 को जापान में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पीड़ित की शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने उससे ₹1.63 लाख की ठगी की थी। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के बरेली में की गई छापेमारी के बाद संभव हुई।

कैसे चलाते थे ठगी का जाल

आरोपी खुद को भर्ती सलाहकार और जापान की प्रतिष्ठित विदेशी कंपनियों के अधिकारी बताकर नौकरी तलाश रहे युवाओं से संपर्क करते थे। वे पीड़ितों को बताते थे कि उनका बायोडाटा शॉर्टलिस्ट हो चुका है और उन्हें आकर्षक वेतन पर विदेश में नौकरी मिल सकती है। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन, वीजा प्रोसेसिंग, एम्बेसी क्लीयरेंस, अटेस्टेशन रिपोर्ट और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम वसूली जाती थी।

मनी ट्रेल से हुआ खुलासा

वित्तीय जांच के दौरान पुलिस को कुश भटनागर नामक आरोपी के बैंक खाते में पीड़ित की ओर से भेजी गई रकम का बड़ा हिस्सा जमा मिला। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को कई खातों में बाँटा गया, जिनमें सह-आरोपी अमित का खाता भी शामिल था। अमित ने कथित तौर पर रकम निकालने और उसे आगे ट्रांसफर करने में भूमिका निभाई।

गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस टीम ने बरेली के सीबी गंज क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों आरोपियों — कुश भटनागर (22 वर्ष) और अमित (23 वर्ष) — को हिरासत में लिया। दोनों बरेली के सीबी गंज के निवासी हैं और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उनके विरुद्ध पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, भर्ती से संबंधित ईमेल अकाउंट, ऑनलाइन पोर्टल की जानकारी, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।

बड़े नेटवर्क से जुड़े तार

पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों आरोपी एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा थे, जो देशभर में नौकरी तलाश रहे लोगों को निशाना बनाता था। गौरतलब है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं, जिनमें साइबर अपराधी फर्जी दस्तावेजों और पेशेवर वेबसाइटों का सहारा लेते हैं। पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी रखे हुए है।

आगे की जांच

पूर्वी जिला साइबर थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच जारी है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच से गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सकती है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात स्रोत से विदेशी नौकरी के प्रस्ताव मिलने पर पहले उसकी सत्यता जाँचें और पैसे ट्रांसफर करने से पहले सतर्क रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो धोखे को विश्वसनीय बनाती है। ₹1.63 लाख की रकम छोटी लग सकती है, लेकिन मनी ट्रेल से यह स्पष्ट है कि यह गिरोह एकाधिक पीड़ितों को एक साथ निशाना बनाता था। असली सवाल यह है कि इतने छोटे नेटवर्क तक पहुँचने में इतना समय क्यों लगा — और बड़े ऑपरेटर अभी भी बाहर हैं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने किस साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया?
दिल्ली पुलिस की पूर्वी जिला साइबर थाना टीम ने एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया जो जापान की कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करता था। आरोपी वीजा, एम्बेसी क्लीयरेंस और दस्तावेज सत्यापन के नाम पर अलग-अलग किश्तों में पैसे वसूलते थे।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन्हें कहाँ से पकड़ा गया?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुश भटनागर (22 वर्ष) और अमित (23 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों उत्तर प्रदेश के बरेली के सीबी गंज क्षेत्र के निवासी हैं और पुलिस की छापेमारी में वहीं से गिरफ्तार किए गए।
पीड़ित से कितनी रकम की ठगी हुई थी?
शिकायत के अनुसार पीड़ित से ₹1.63 लाख की ठगी की गई थी। मनी ट्रेल जांच में यह रकम कुश भटनागर के बैंक खाते में मिली और बाद में कई खातों में बाँटी गई।
इस ठगी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
किसी भी अज्ञात व्यक्ति या एजेंसी द्वारा दिए गए विदेशी नौकरी के प्रस्ताव की पहले स्वतंत्र रूप से सत्यता जाँचें। वीजा, एम्बेसी क्लीयरेंस या दस्तावेज के नाम पर माँगी जाने वाली रकम ट्रांसफर करने से पहले संबंधित दूतावास या सरकारी पोर्टल से पुष्टि करें।
क्या इस गिरोह के और सदस्य भी हैं?
डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पाया कि दोनों आरोपी एक बड़े राष्ट्रव्यापी साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े थे। इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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