जापान में नौकरी के नाम पर ठगी: दिल्ली पुलिस ने साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया, दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की पूर्वी जिला साइबर थाना टीम ने 17 जून 2025 को जापान में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पीड़ित की शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने उससे ₹1.63 लाख की ठगी की थी। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के बरेली में की गई छापेमारी के बाद संभव हुई।
कैसे चलाते थे ठगी का जाल
आरोपी खुद को भर्ती सलाहकार और जापान की प्रतिष्ठित विदेशी कंपनियों के अधिकारी बताकर नौकरी तलाश रहे युवाओं से संपर्क करते थे। वे पीड़ितों को बताते थे कि उनका बायोडाटा शॉर्टलिस्ट हो चुका है और उन्हें आकर्षक वेतन पर विदेश में नौकरी मिल सकती है। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन, वीजा प्रोसेसिंग, एम्बेसी क्लीयरेंस, अटेस्टेशन रिपोर्ट और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम वसूली जाती थी।
मनी ट्रेल से हुआ खुलासा
वित्तीय जांच के दौरान पुलिस को कुश भटनागर नामक आरोपी के बैंक खाते में पीड़ित की ओर से भेजी गई रकम का बड़ा हिस्सा जमा मिला। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को कई खातों में बाँटा गया, जिनमें सह-आरोपी अमित का खाता भी शामिल था। अमित ने कथित तौर पर रकम निकालने और उसे आगे ट्रांसफर करने में भूमिका निभाई।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस टीम ने बरेली के सीबी गंज क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों आरोपियों — कुश भटनागर (22 वर्ष) और अमित (23 वर्ष) — को हिरासत में लिया। दोनों बरेली के सीबी गंज के निवासी हैं और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उनके विरुद्ध पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, भर्ती से संबंधित ईमेल अकाउंट, ऑनलाइन पोर्टल की जानकारी, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
बड़े नेटवर्क से जुड़े तार
पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों आरोपी एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा थे, जो देशभर में नौकरी तलाश रहे लोगों को निशाना बनाता था। गौरतलब है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं, जिनमें साइबर अपराधी फर्जी दस्तावेजों और पेशेवर वेबसाइटों का सहारा लेते हैं। पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी रखे हुए है।
आगे की जांच
पूर्वी जिला साइबर थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच जारी है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच से गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सकती है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात स्रोत से विदेशी नौकरी के प्रस्ताव मिलने पर पहले उसकी सत्यता जाँचें और पैसे ट्रांसफर करने से पहले सतर्क रहें।