शहरी बेरोजगारी दर मई 2026 में घटकर 6.4%, महिलाओं की दर 8.2% पर आई: NSO डेटा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा 16 जून 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत के शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर मई 2026 में घटकर 6.4 प्रतिशत पर आ गई — जो मई 2025 में 6.9 प्रतिशत थी। इसी अवधि में शहरी महिलाओं की बेरोजगारी दर भी घटकर 8.2 प्रतिशत के निचले स्तर पर पहुँच गई।
मुख्य आँकड़े एक नज़र में
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के मासिक बुलेटिन के अनुसार, शहरी बेरोजगारी दर में यह गिरावट एक क्रमिक सुधार की कड़ी है। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में यह दर 6.6 प्रतिशत रही थी, जबकि उससे पिछली तिमाही में 6.7 प्रतिशत थी — यानी हर तिमाही में मामूली लेकिन निरंतर सुधार दर्ज हो रहा है।
वहीं, ग्रामीण बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही और समग्र राष्ट्रीय बेरोजगारी दर में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आया।
श्रम बल भागीदारी और कामगार दर
कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) मई 2026 में 54.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जो मई 2025 में 54.8 प्रतिशत थी — इसमें मामूली गिरावट आई है। इसी प्रकार, कामगार भागीदारी दर (WPR) मई 2026 में 51.4 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष इसी माह में यह 51.7 प्रतिशत थी।
गौरतलब है कि LFPR और WPR दोनों में मामूली गिरावट यह संकेत देती है कि श्रम बाज़ार में सक्रिय भागीदारी का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम हुआ है, भले ही बेरोजगारी दर में सुधार आया हो।
ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार परिदृश्य
सांख्यिकी मंत्रालय के बयान के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान ग्रामीण रोजगार में द्वितीयक (विनिर्माण) और तृतीयक (सेवा) दोनों क्षेत्रों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गैर-कृषि रोजगार की ओर मोड़ने की कोशिश में है।
PLFS सर्वेक्षण पद्धति में बदलाव
NSO ने जनवरी 2025 से PLFS की कार्यप्रणाली में संशोधन किया है, जिससे अब श्रम बल संकेतकों के मासिक और तिमाही अनुमान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले केवल वार्षिक और तिमाही डेटा ही जारी होता था। PLFS बुलेटिन में 'करंट वीकली स्टेटस' (CWS) पद्धति के आधार पर LFPR, WPR और बेरोजगारी दर के राष्ट्रीय अनुमान शामिल होते हैं।
आँकड़ों के अनुसार, शहरी बेरोजगारी में यह सुधार सकारात्मक है, लेकिन श्रम बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि LFPR में मामूली गिरावट पर भी नज़र रखना ज़रूरी है। आने वाले महीनों के आँकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि यह सुधार टिकाऊ है या मौसमी।