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महिला श्रम भागीदारी दर 7 वर्षों में 23.3% से बढ़कर 40% हुई: मांडविया का बड़ा ऐलान

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महिला श्रम भागीदारी दर 7 वर्षों में 23.3% से बढ़कर 40% हुई: मांडविया का बड़ा ऐलान

सारांश

सात वर्षों में भारत की महिला श्रम भागीदारी दर लगभग दोगुनी हो गई — 23.3% से 40% तक। मांडविया के ये आँकड़े बताते हैं कि महिला बेरोजगारी दर भी 5.6% से घटकर 3.1% पर आ गई है और सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19% से बढ़कर 64.3% हो गया है।

मुख्य बातें

भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 के 23.3% से बढ़कर 2025 में 40% हो गई।
महिला वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (FWPR) 22% से बढ़कर लगभग 39% हुआ।
महिला बेरोजगारी दर (FUR) 5.6% से घटकर 3.1% पर आई।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% — लगभग तीन गुना।
चार लेबर कोड्स में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी पहचान और सामाजिक सुरक्षा।
लेबर कोड्स में समान वेतन , वर्क-फ्रॉम-होम , मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल क्रेच की सुविधाएँ शामिल।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 28 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में बताया कि भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 के 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है — यानी सात वर्षों में लगभग दोगुनी वृद्धि। यह आँकड़ा देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय बदलाव का संकेत देता है।

कार्यक्रम और संदर्भ

मंत्री फूड डिलीवरी स्टार्टअप स्विगी द्वारा आयोजित 'स्विगस्ट्री: सेलिब्रेटिंग वुमेन ऑन द मूव' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्यबल में महिलाओं की बराबर भागीदारी सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अनिवार्य है और विकसित भारत के निर्माण में इसका निर्णायक योगदान है।

मांडविया ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस आँकड़े की गहराई में जाना ज़रूरी है — क्योंकि PLFS (Periodic Labour Force Survey) के आँकड़ों में ग्रामीण कृषि कार्य और अनौपचारिक क्षेत्र की बड़ी भूमिका होती है, जो हमेशा 'सशक्तिकरण' का पर्याय नहीं होती। सामाजिक सुरक्षा कवरेज का 64.3% तक पहुँचना उत्साहजनक है, लेकिन गिग वर्कर्स की कानूनी पहचान और वास्तविक लाभ वितरण के बीच की खाई अभी भी चुनौती बनी हुई है। असली कसौटी यह होगी कि चार लेबर कोड्स के क्रियान्वयन के बाद महिला श्रमिकों की औसत मज़दूरी और नौकरी की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में महिला श्रम भागीदारी दर 2025 में कितनी है?
केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के अनुसार, 2025 में भारत की महिला श्रम भागीदारी दर 40 प्रतिशत है, जो 2017-18 में 23.3 प्रतिशत थी। यह सात वर्षों में लगभग दोगुनी वृद्धि है।
महिला बेरोजगारी दर में क्या बदलाव आया है?
महिला बेरोजगारी दर (FUR) 5.6 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है, जो दर्शाता है कि अब अधिक महिलाएँ रोजगार पा रही हैं। यह आँकड़ा मांडविया ने 28 अप्रैल 2026 को स्विगी के कार्यक्रम में साझा किया।
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज कितना बढ़ा है?
पिछले 10 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गया है — लगभग तीन गुना वृद्धि। यह श्रम कानून सुधार, डिजिटल समावेशन और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम बताया गया है।
चार लेबर कोड्स में महिलाओं के लिए क्या प्रावधान हैं?
चार लेबर कोड्स में समान काम के लिए समान वेतन, वर्क-फ्रॉम-होम, मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल पर क्रेच की सुविधाएँ शामिल हैं। इसके अलावा, सोशल सिक्योरिटी कोड में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी पहचान दी गई है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ हैं।
गिग वर्कर्स को लेबर कोड से क्या फायदा होगा?
सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी पहचान और सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे। यह उन महिला डिलीवरी और सेवा कर्मियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो अब तक किसी भी सुरक्षा ढाँचे से बाहर थीं।
राष्ट्र प्रेस
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