भारत में जनवरी-मार्च 2026: शहरी बेरोज़गारी दर 6.6% पर, ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार बढ़ा
सारांश
मुख्य बातें
सांख्यिकी मंत्रालय ने 11 मई 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में शहरी बेरोज़गारी दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह गई, जो पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में 6.7 प्रतिशत थी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में द्वितीयक (सेकेंडरी) और सेवा (टर्शियरी) क्षेत्र में रोज़गार की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्य आँकड़े एक नज़र में
15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए शहरी क्षेत्रों में समग्र बेरोज़गारी दर में मामूली लेकिन सकारात्मक गिरावट आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित वेतन और सैलरी पाने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी बढ़कर 15.5 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 14.8 प्रतिशत थी। यह वृद्धि संकेत देती है कि ग्रामीण श्रम बाज़ार में औपचारिक रोज़गार धीरे-धीरे पैर पसार रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार का बदलता ढाँचा
ग्रामीण इलाकों में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की हिस्सेदारी जनवरी-मार्च 2026 में घटकर 55.8 प्रतिशत रह गई, जो पिछली तिमाही में 58.5 प्रतिशत थी। यह गिरावट दर्शाती है कि ग्रामीण कार्यबल धीरे-धीरे गैर-कृषि क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
ग्रामीण सेवा क्षेत्र में रोज़गार हिस्सेदारी अक्टूबर-दिसंबर 2025 के 20.6 प्रतिशत से बढ़कर जनवरी-मार्च 2026 में 21.7 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा, सेकेंडरी सेक्टर — जिसमें खनन (माइनिंग) और क्वॉरिंग भी शामिल हैं — में रोज़गार हिस्सेदारी 20.9 प्रतिशत से बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गई।
शहरी क्षेत्रों में स्थिरता
शहरी क्षेत्रों में विभिन्न सेक्टरों के बीच रोज़गार का वितरण इस तिमाही में लगभग स्थिर बना रहा। मंत्रालय के अनुसार, शहरी रोज़गार का बड़ा हिस्सा अब भी सेवा क्षेत्र में केंद्रित है, जबकि ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक क्षेत्र — यानी कृषि और उससे जुड़े कार्य — अभी भी प्रमुख नियोक्ता बने हुए हैं।
कुल रोज़गार और सर्वे का आधार
जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में देश में औसतन 57.4 करोड़ लोग रोज़गार में थे। इनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएँ शामिल थीं। सांख्यिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये आँकड़े 5,61,822 लोगों के सर्वेक्षण पर आधारित हैं, जो इसे सांख्यिकीय रूप से व्यापक और प्रतिनिधि बनाता है।
आगे क्या संकेत मिलते हैं
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि से इतर क्षेत्रों में रोज़गार की बढ़ती हिस्सेदारी एक सकारात्मक दीर्घकालिक संकेत है, हालाँकि यह बदलाव अभी भी क्रमिक गति से हो रहा है। शहरी बेरोज़गारी में मामूली गिरावट स्वागत योग्य है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रवृत्ति को टिकाऊ बनाने के लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता बनी रहेगी।