जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार की माँग, प्रदर्शनकारी बोले — गरीबी जाति नहीं देखती, आर्थिक आधार पर मिले हक
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त 2026 को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए, जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में सुधार और यूजीसी के नियमों के विरोध में आवाज़ उठाने आए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण का लाभ जाति या धर्म के बजाय आर्थिक स्थिति और गरीबी के आधार पर मिलना चाहिए। प्रदर्शन स्थल पर टेंट और मंच लगाने की अनुमति न मिलने पर भी प्रदर्शनकारियों ने तीखा विरोध जताया।
मुख्य माँगें और प्रदर्शन का स्वरूप
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग आरक्षण समाप्त करने की नहीं, बल्कि उसे वास्तविक जरूरतमंदों तक सीमित करने की है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारी माँग है कि आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किए जाएँ। इसका राजनीतिकरण बंद होना चाहिए। जिसे जरूरत है, उसे मदद मिले।' उन्होंने यह भी कहा कि गाँव के गरीब छात्रों को अच्छी शिक्षा मिले, ताकि वे अच्छे डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें और देश का भविष्य उज्ज्वल हो।
प्रतिभा दमन पर गहरी चिंता
प्रदर्शन में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने तर्क दिया कि मेधावी छात्रों की अनदेखी और कम अंक लाने वाले छात्रों को प्राथमिकता देने की नीति 'विकसित भारत' के लक्ष्य के साथ विरोधाभासी है। उनके शब्दों में, 'हम लगातार प्रतिभाओं का दमन कर रहे हैं और साथ ही विकसित भारत बनाने की बात कर रहे हैं — ऐसे में विकसित भारत कैसे बनेगा?' उन्होंने इस आंदोलन को राष्ट्रहित में चलाया जा रहा बताया।
टेंट और मंच की अनुमति न मिलने पर विवाद
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें टेंट लगाने और मंच बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि अन्य आंदोलनों में यह सुविधा मिलती है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'टेंट और मंच की व्यवस्था करने वालों को भी धमकाया जा रहा है। क्या हम गरीब हैं, इसलिए हमें टेंट लगाने की भी इजाजत नहीं दी जाएगी?' हालाँकि एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि उन्हें अनुमति मिल चुकी है और उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की।
आर्थिक आधार पर आरक्षण की माँग
प्रदर्शनकारियों का केंद्रीय तर्क यह है कि गरीबी जाति देखकर नहीं आती। उनकी माँग है कि सरकार आर्थिक स्थिति को आरक्षण का आधार बनाए — चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति हो। उन्होंने कहा कि आरक्षण सुधार की माँग बहुत पहले उठनी चाहिए थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में ऐसा नहीं हुआ।
आगे की राह
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से अपील की कि आंदोलन में शामिल होने आ रहे लोगों को न रोका जाए। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब देशभर में आरक्षण नीति को लेकर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी शिक्षा जगत में असंतोष बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और विस्तार लेगा या नहीं, यह प्रशासन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।