जंतर-मंतर प्रदर्शन अनुमति विवाद: करणी सेना की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 9 सितंबर को करेगा सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
करणी सेना ने 6 सितंबर को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति न मिलने के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। दिल्ली पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए यह अनुमति देने से इनकार किया था। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को निर्धारित की है।
मामले का घटनाक्रम
दिल्ली उच्च न्यायालय ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए करणी सेना से प्रदर्शन की तारीख बदलने का सुझाव दिया। न्यायालय ने कहा कि यदि पुलिस किसी निश्चित तिथि पर अनुमति देने में असमर्थ है, तो संगठन किसी अन्य तारीख को प्रदर्शन कर सकता है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि प्रदर्शन की तिथि पहले ही एक बार बदली जा चुकी है और यह दूसरा अवसर है जब अनुमति नहीं दी जा रही। इस पर उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को अगली सुनवाई तक अपना लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
प्रदर्शन का कारण: यूजीसी के नए नियम
करणी सेना और सवर्ण समाज के संगठन 'यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026' के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। इनकी मांग है कि सरकार इन नियमों को पूरी तरह वापस ले। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा नीति को लेकर देशभर में विभिन्न सामाजिक समूहों में असंतोष बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि करणी सेना 6 सितंबर को जंतर-मंतर की ओर बड़े मार्च की चेतावनी दे चुकी है। सुरक्षा कारणों से अनुमति न मिलने के बाद संगठन ने न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता चुना।
दिल्ली पुलिस का रुख
पुलिस का तर्क है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राजधानी में सुरक्षा के विशेष इंतजाम हैं, जिसके चलते बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों की अनुमति देना संभव नहीं है। न्यायालय ने भी स्पष्ट किया कि पुलिस का पक्ष सुने बिना एकतरफा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
करणी सेना: संक्षिप्त परिचय
करणी सेना मुख्य रूप से राजस्थान में सक्रिय एक क्षत्रिय (राजपूत) संगठन है, जिसकी स्थापना 2006 में हुई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य क्षत्रिय समाज के अधिकारों, संस्कृति और हितों का संरक्षण तथा समाज को राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर संगठित करना है।
आगे क्या होगा
दिल्ली उच्च न्यायालय 9 सितंबर 2026 को दोनों पक्षों को सुनने के बाद अगला आदेश देगा। तब तक यह स्पष्ट नहीं है कि करणी सेना को 6 सितंबर के प्रदर्शन की अनुमति मिलेगी या नहीं। न्यायालय का अंतिम निर्णय सार्वजनिक प्रदर्शन के अधिकार और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन को परिभाषित करेगा।