27 अगस्त 2026
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जेपी नड्डा ने आरक्षण सुधार प्रतिनिधियों से की सौहार्दपूर्ण बैठक, जल्द अगली मुलाकात के संकेत

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जेपी नड्डा ने आरक्षण सुधार प्रतिनिधियों से की सौहार्दपूर्ण बैठक, जल्द अगली मुलाकात के संकेत

सारांश

जेपी नड्डा ने 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' के प्रतिनिधियों से मुलाकात की — जंतर-मंतर विरोध के बाद यह पहली केंद्रीय स्तर की बातचीत है। नड्डा ने जल्द अगली बैठक का संकेत दिया, लेकिन संगठन का नाम लेने से परहेज़ किया। आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का यह संवाद-केंद्रित रुख राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 27 अगस्त 2026 को आरक्षण सुधार प्रतिनिधियों हर्ष दुबे , रण बहादुर सिंह चौहान और मृत्युंजय पाठक से बैठक की।
21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद यह पहली केंद्रीय स्तर की वार्ता थी।
नड्डा ने एक्स पर बैठक को 'सौहार्दपूर्ण' बताया और जल्द अगली बैठक का संकेत दिया।
नड्डा ने अपनी पोस्ट में 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' संगठन का कोई उल्लेख नहीं किया।
आंदोलन की माँग — जाति-आधारित आरक्षण की जगह आय, दिव्यांगता और पारिवारिक स्थिति आधारित कोटा — संवैधानिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' के इंस्टाग्राम पेज पर 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।

केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को आरक्षण सुधार समर्थकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। ये वही कार्यकर्ता हैं जिन्होंने 21 अगस्त को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारत की मौजूदा जाति-आधारित आरक्षण प्रणाली में आमूल बदलाव की माँग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। बैठक के बाद नड्डा ने जल्द ही एक और दौर की वार्ता का संकेत दिया है।

बैठक में क्या हुआ

नड्डा ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इस बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, '21 अगस्त को जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, टीम के सदस्यों हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान और मृत्युंजय पाठक के साथ सौहार्दपूर्ण चर्चा हुई। इस संबंध में हम जल्द ही फिर मिलेंगे।' हालाँकि, नड्डा ने अपनी पोस्ट में 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' संगठन का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया और न ही बैठक में हुई विस्तृत चर्चा का ब्यौरा दिया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई और इसके इंस्टाग्राम पेज पर 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। यह समूह सरकार से माँग कर रहा है कि सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली को पूरी तरह जाति के आधार पर तय करने के बजाय आर्थिक स्थिति, दिव्यांगता और पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर पुनर्गठित किया जाए। 21 अगस्त के जंतर-मंतर प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समर्थक एकत्रित हुए थे और जाति-आधारित आरक्षण को आय-आधारित कोटा से बदलने की वकालत की थी।

राज्य स्तर पर भी बढ़ी सक्रियता

गौरतलब है कि नड्डा के साथ यह बैठक हर्ष दुबे और अन्य प्रतिनिधियों द्वारा लखनऊ में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात के कुछ ही दिन बाद हुई है। उस बैठक में उपमुख्यमंत्री ने इन प्रतिनिधियों की माँगें BJP के केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखने का वादा किया था। यह बैठक उसी क्रम की अगली कड़ी मानी जा रही है।

आरक्षण सुधार की माँग का दायरा

प्रदर्शनकारी समूह का स्पष्ट रुख है कि शिक्षा और रोज़गार में आरक्षण का आधार केवल जाति नहीं होना चाहिए। उनकी माँग है कि कोटा प्रणाली में आर्थिक कमज़ोरी, दिव्यांगता और पारिवारिक पृष्ठभूमि को प्राथमिक मानदंड बनाया जाए। यह माँग संवैधानिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि भारत में आरक्षण की व्यवस्था दशकों पुरानी है और इसमें किसी भी बदलाव का व्यापक सामाजिक असर होता है।

आगे क्या होगा

नड्डा के बयान के अनुसार, सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच जल्द एक और बैठक होने की संभावना है। हालाँकि, अगली बैठक की तारीख या एजेंडे का अभी कोई आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरकार का यह संवाद-केंद्रित रवैया आंदोलन को संस्थागत चैनल में लाने की कोशिश हो सकती है, लेकिन आरक्षण नीति में किसी ठोस बदलाव की घोषणा अभी दूर की कौड़ी नज़र आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकार ने 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' का नाम लेने से जानबूझकर परहेज़ किया — यह राजनीतिक सतर्कता का स्पष्ट संकेत है। आरक्षण भारत की सबसे विभाजनकारी नीतिगत बहसों में से एक है और BJP के लिए यह दोधारी तलवार है — OBC और SC/ST वोट बैंक को नाराज़ करने का जोखिम बनाम सवर्ण समर्थक वर्ग की माँगों को नज़रअंदाज़ करने का दबाव। 50 लाख से अधिक सोशल मीडिया फॉलोअर्स वाले इस आंदोलन को केवल 'सौहार्दपूर्ण चर्चा' तक सीमित रखना सरकार की फूँक-फूँककर चलने की नीति को दर्शाता है। असली सवाल यह है कि क्या यह संवाद किसी नीतिगत समीक्षा की ओर जाएगा, या केवल आंदोलन की धार कुंद करने का प्रयास है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपी नड्डा ने किन आरक्षण सुधार प्रतिनिधियों से मुलाकात की?
नड्डा ने 27 अगस्त 2026 को हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान और मृत्युंजय पाठक से बैठक की। ये तीनों 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' से जुड़े प्रतिनिधि हैं जिन्होंने 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था।
'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' की मुख्य माँग क्या है?
यह आंदोलन माँग करता है कि सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में जाति-आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक स्थिति, दिव्यांगता और पारिवारिक परिस्थितियों को आधार बनाया जाए। इस आंदोलन की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई और इसके इंस्टाग्राम पेज पर 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।
नड्डा की बैठक के बाद अगली वार्ता कब होगी?
नड्डा ने एक्स पर पोस्ट कर जल्द ही अगली बैठक का संकेत दिया है, लेकिन अभी तक कोई तारीख या एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का इस मामले में क्या रोल है?
नड्डा की बैठक से कुछ दिन पहले हर्ष दुबे और अन्य प्रतिनिधियों ने लखनऊ में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात की थी। पाठक ने इन प्रतिनिधियों की माँगें BJP के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुँचाने का वादा किया था, जिसके बाद नड्डा के साथ यह बैठक हुई।
क्या सरकार आरक्षण नीति में बदलाव पर विचार कर रही है?
अभी तक सरकार की ओर से आरक्षण नीति में किसी बदलाव का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है। नड्डा ने बैठक को 'सौहार्दपूर्ण' बताया और अगली वार्ता का संकेत दिया, लेकिन किसी नीतिगत प्रतिबद्धता का उल्लेख नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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