जेपी नड्डा ने आरक्षण सुधार प्रतिनिधियों से की सौहार्दपूर्ण बैठक, जल्द अगली मुलाकात के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को आरक्षण सुधार समर्थकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। ये वही कार्यकर्ता हैं जिन्होंने 21 अगस्त को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारत की मौजूदा जाति-आधारित आरक्षण प्रणाली में आमूल बदलाव की माँग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। बैठक के बाद नड्डा ने जल्द ही एक और दौर की वार्ता का संकेत दिया है।
बैठक में क्या हुआ
नड्डा ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इस बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, '21 अगस्त को जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, टीम के सदस्यों हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान और मृत्युंजय पाठक के साथ सौहार्दपूर्ण चर्चा हुई। इस संबंध में हम जल्द ही फिर मिलेंगे।' हालाँकि, नड्डा ने अपनी पोस्ट में 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' संगठन का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया और न ही बैठक में हुई विस्तृत चर्चा का ब्यौरा दिया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई और इसके इंस्टाग्राम पेज पर 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। यह समूह सरकार से माँग कर रहा है कि सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली को पूरी तरह जाति के आधार पर तय करने के बजाय आर्थिक स्थिति, दिव्यांगता और पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर पुनर्गठित किया जाए। 21 अगस्त के जंतर-मंतर प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समर्थक एकत्रित हुए थे और जाति-आधारित आरक्षण को आय-आधारित कोटा से बदलने की वकालत की थी।
राज्य स्तर पर भी बढ़ी सक्रियता
गौरतलब है कि नड्डा के साथ यह बैठक हर्ष दुबे और अन्य प्रतिनिधियों द्वारा लखनऊ में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात के कुछ ही दिन बाद हुई है। उस बैठक में उपमुख्यमंत्री ने इन प्रतिनिधियों की माँगें BJP के केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखने का वादा किया था। यह बैठक उसी क्रम की अगली कड़ी मानी जा रही है।
आरक्षण सुधार की माँग का दायरा
प्रदर्शनकारी समूह का स्पष्ट रुख है कि शिक्षा और रोज़गार में आरक्षण का आधार केवल जाति नहीं होना चाहिए। उनकी माँग है कि कोटा प्रणाली में आर्थिक कमज़ोरी, दिव्यांगता और पारिवारिक पृष्ठभूमि को प्राथमिक मानदंड बनाया जाए। यह माँग संवैधानिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि भारत में आरक्षण की व्यवस्था दशकों पुरानी है और इसमें किसी भी बदलाव का व्यापक सामाजिक असर होता है।
आगे क्या होगा
नड्डा के बयान के अनुसार, सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच जल्द एक और बैठक होने की संभावना है। हालाँकि, अगली बैठक की तारीख या एजेंडे का अभी कोई आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरकार का यह संवाद-केंद्रित रवैया आंदोलन को संस्थागत चैनल में लाने की कोशिश हो सकती है, लेकिन आरक्षण नीति में किसी ठोस बदलाव की घोषणा अभी दूर की कौड़ी नज़र आती है।