संजय निषाद बोले: यूजीसी लागू हो, सामान्य वर्ग के बच्चों की सुरक्षा भी ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 25 अगस्त 2026 को लखनऊ में यूजीसी लागू करने के साथ-साथ सामान्य (उच्च) वर्ग के बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने यूपी कैबिनेट बैठक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बयान, हिजाब पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले और उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के दावों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी।
यूजीसी और सामान्य वर्ग की सुरक्षा
निषाद ने कहा, 'यूजीसी लागू होना चाहिए, लेकिन ऊँची जातियों के बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके बच्चे भी बच्चे ही हैं और वे मासूम हैं। इसलिए उनके लिए भी उचित प्रावधान किए जाने चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण और सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।
यूपी कैबिनेट बैठक पर प्रतिक्रिया
कैबिनेट बैठक के बारे में मंत्री ने कहा, 'मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करता हूँ। उत्तर प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए जो भी प्रस्ताव आते हैं, उन्हें आवश्यक संशोधनों के साथ मंजूरी दी जाती है। जिन प्रस्तावों पर और विचार-विमर्श की आवश्यकता होती है, उन्हें पुनर्विचार के लिए रोका जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि वर्ल्ड फिश सेंटर से जुड़े विभागीय प्रस्ताव को भी जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
हिजाब विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रुख
हिजाब को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हालिया फैसले पर निषाद ने संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा, 'देश की आधी आबादी महिलाओं की है। संविधान के तहत उन्हें आज़ादी, बराबरी, सम्मान, खुशहाली, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा के मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। अतः महिलाओं को यह तय करने का अधिकार है कि वे क्या पहनें, कहाँ बैठें और क्या लिखें।' गौरतलब है कि हिजाब पर विभिन्न उच्च न्यायालयों के अलग-अलग फैसले देश में इस मुद्दे को लगातार चर्चा में बनाए हुए हैं।
एक मतदाता सूची की माँग
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए निषाद ने कहा, 'चुनाव आयोग को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। मतदाता सूची एक ही होनी चाहिए — चाहे ग्राम सभा का चुनाव हो, विधानसभा का हो, लोकसभा का हो या कोई अन्य निकाय चुनाव। जब व्यक्ति एक है और वह उसी गाँव या शहर में मतदान करता है, तो सूची भी एक ही होनी चाहिए। इस मामले में एकरूपता लाना ज़रूरी है।'
आगे क्या
निषाद के ये बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई संवेदनशील मुद्दों को एक साथ छूते हैं — उच्च शिक्षा नीति, धार्मिक स्वतंत्रता, चुनावी सुधार और सामाजिक न्याय। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि सरकार यूजीसी के क्रियान्वयन में सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा के लिए क्या ठोस प्रावधान करती है।