क्या अखिलेश यादव एसआईआर पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं? : संजय निषाद
सारांश
Key Takeaways
- संजय निषाद ने अखिलेश यादव के आरोपों को निराधार बताया।
- उन्होंने भविष्य के आकलन पर जोर दिया।
- ईडी की जांच स्वतंत्र रूप से चल रही है।
- भारत को फिर से सशक्त बनाने का समय आ गया है।
- कांग्रेस की नीतियां अब पुरानी हो चुकी हैं।
लखनऊ, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव द्वारा एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों पर सख्त प्रतिक्रिया दी है।
संजय निषाद ने कहा कि इस प्रकार के निराधार आरोप लगाना उचित नहीं है और यह केवल भ्रम फैलाने का प्रयास है।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि किसी भी समझदार व्यक्ति की पहचान यही होती है कि वह भविष्य का सही आकलन कर सके और समाज को सही दिशा दिखा सके। इतिहास सब कुछ देखता है और उसी के आधार पर जिम्मेदार लोग सोच-समझकर बयान देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि 60 से 70 प्रतिशत वोटों की गिनती की बात सामने आती है, तो शेष 30 प्रतिशत वोटों के बारे में सभी विधायकों और राजनीतिक दलों को जानकारी होती है। ऐसे में इसे लेकर साजिश की बात करना तर्कसंगत नहीं है।
ईडी की ओर से कोलकाता से हवाला के जरिए गोवा स्थित आई-पैक कार्यालय तक 20 करोड़ रुपए भेजे जाने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निषाद ने कहा कि यह पूरी तरह जांच का विषय है। पहले जांच एजेंसियां संरक्षण में काम करती थीं, लेकिन अब वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही हैं। समय आने पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि सबको जोड़कर चलने से आने वाले 20 वर्षों में भारत विश्व गुरु बन सकता है, संजय निषाद ने कहा कि भारत अतीत में भी विश्व गुरु और सोने की चिड़िया रहा है। एक समय भारत में शिक्षा का स्तर बहुत ऊंचा था, जीडीपी मजबूत थी और दुनियाभर से छात्र तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने आते थे। हालांकि विदेशी आक्रांताओं ने भारत को कमजोर किया, लेकिन अब समय आ गया है कि देश फिर से सशक्त भारत बने।
प्रियंका गांधी के जन्मदिन पर कांग्रेस पार्टी द्वारा 100 दिन की कार्ययोजना जारी किए जाने के सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि कांग्रेस की नीतियां अब पुरानी और अप्रासंगिक हो चुकी हैं। इसी वजह से कांग्रेस जनता के बीच अपनी पकड़ खो रही है और लगातार राजनीतिक रूप से कमजोर होती जा रही है।